गोपाल नेपाली के बेटे ने सऊदी अरब में दो साल कड़ी मेहनत करके पैसा भेजा। उसी पैसे से घर बनवाया गया। छुट्टियों में आकर जाने के बाद वह यहीं रह गया। गोपाल के लिए मनोहरा बस्ती का घर केवल पत्थर और ईंटों का ढेर नहीं था, बल्कि वह उनके बेटे की यादों का बक्सा था।