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बाख्रापालन से स्वरोजगार बने कुलबहादुर पुन

१५ वैशाख, म्याग्दी । मङ्गला गाउँपालिका-२ हिदी के कुलबहादुर पुन ने चार वर्षों पहले दो बाख्राओं से शुरू किया फार्म अब लाखों की वार्षिक आय का स्रोत बन चुका है। ५० वर्षीय पुन ने वैदेशिक रोजगार और पारंपरिक खेती-किसानी के विकल्प के रूप में अपने गांव में व्यवस्थित बाख्रापालन शुरू कर आत्मनिर्भर और स्वरोजगार बनने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा, ‘घर में मौजूद दो माउबाख्राओं से शुरू हुआ फार्म अब पाठापाठी, खसिबोका और माउबाख्राओं की संख्या ४८ तक बढ़ चुकी है,’ और जोड़ा, ‘हम सालाना १५ से २० बाख्राओं की बिक्री करते हैं।’

बाख्रापालन शुरू करने के बाद उन्होंने घरेलू खर्चों को चलाने और अपने बच्चों की पढ़ाई में सहूलियत महसूस की है। सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय पुन पहले पारंपरिक खेती-किसानी और पशुपालन के जरिए अपनी जीविका चला रहे थे। उनकी पत्नी भी बाख्रापालन में उनका सहयोग कर रही हैं। उन्होंने बताया कि १८ माह से २ साल की खसी का वजन अनुसार उनका मूल्य १५ हजार से २० हजार रुपये तक हो सकता है। बाबियाचौर, तातोपानी और बेनी बाजार में मांस के लिए खसीबोका की बिक्री होती है।

पुन ने विक्रम संवत २०७८ में हिदी बाख्रापालन फार्म की स्थापना कर व्यवसाय की शुरुआत की थी। वे स्थानीय जमुनापारी जाति के बाख्राओं की नस्ल सुधार कर उन्नत बोयर जात के बोका पालकर पाठापाठी उत्पादन कर रहे हैं। बोयर बोका से सुधारित पाठापाठी जल्दी बढ़ते हैं और इनका वजन भी अधिक होता है, जिससे आय में वृद्धि होती है। पुन का अनुभव है कि यह फार्म आर्थिक रूप से अत्यंत प्रभावशाली साबित हो रहा है। फार्म में बाख्राओं के लिए व्यवस्थित खोर निर्माण हेतु डोगलबेतील अस्पताल एवं पशु सेवा विज्ञ केंद्र ने पाँच लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया था। मङ्गला गाउँपालिका ने ७५ प्रतिशत अनुदान पर उन्नत बोयर जात का एक बोका उपलब्ध कराया है।