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त्रिभुवन विश्वविद्यालय क्रिकेट रंगशाला हटाने का प्रयास क्यों कर रहा है?

सरकार ने त्रिभुवन विश्वविद्यालय मैदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर की व्यवस्थित रंगशाला बनाने के लिए अब तक लगभग २ अरब रुपये का निवेश किया है। लेकिन त्रिवि के इस अल्टिमेटम से नेपाली क्रिकेट के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ी है। त्रिभुवन विश्वविद्यालय ने ४ वैशाख को १८ संघ-संस्थाओं को ३५ दिन का अल्टिमेटम देते हुए अपनी अतिक्रमित जमीन खाली करने का नोटिस जारी किया है। नेपाल क्रिकेट संघ का २५ साल का भाड़ा समझौता भी वैशाख में समाप्त हो रहा है। युवा तथा खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल ने कहा है कि त्रिवि क्रिकेट मैदान का भाड़ा समझौता जल्द ही नवीनीकृत होगा।

त्रिभुवन विश्वविद्यालय (त्रिवि) ने ४ वैशाख को अपनी अतिक्रमित जमीन खाली करने हेतु संबंधित संस्थाओं को ३५ दिन की अल्टिमेटम नोटिस जारी किया। इस अल्टिमेटम की सूची में १८ संघ-संस्थाएं हैं, जिनमें नेपाल क्रिकेट संघ (क्यान) भी शामिल है। त्रिवि की जमीन और अचल सम्पत्ति छानबीन समिति द्वारा तैयार रिपोर्ट के अनुसार, ये १८ संघ-संस्थाएं दो हजार से अधिक रोपनी जमीन का उपयोग कर रही हैं। इनमें क्यान ने क्रिकेट मैदान के रूप में उक्त जमीन का उपयोग किया है। क्यान का त्रिवि क्रिकेट मैदान के लिए २५ वर्ष का भाड़ा समझौता वैशाख में समाप्त हो रहा है, इसलिए त्रिवि ने क्यान को ३५ दिन का अल्टिमेटम दिया है।

त्रिवि का निष्कर्ष है कि बड़े खेल आयोजनों के दौरान महीनों तक विश्वविद्यालय का अध्ययन एवं अनुसन्धान प्रभावित होता है। क्यान ने २०५९ साल में राष्ट्रीय खेलकूद परिषद् (राखेप) के माध्यम से त्रिवि के साथ यह समझौता किया था। क्यान के महासचिव विनयराज पांडे के अनुसार, उस जमीन का पहले मोटरसाइकिल सिखाने के लिए उपयोग होता था, अब वहां प्यारापिट और फ्लडलाइट जैसी सुविधाएं लगाकर एक व्यवस्थित क्रिकेट रंगशाला बनी है। क्यान इसे अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए उपयोग कर रहा है। क्यान के मुताबिक, सरकार ने इस मैदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने में लगभग २ अरब रुपये का निवेश किया है। लेकिन त्रिवि के अल्टिमेटम से नेपाली क्रिकेट के लिए अनिश्चितता बढ़ रही है।

क्यान के पूर्व अध्यक्ष पांडे का कहना है, ‘अगर त्रिवि मैदान हट गया तो नेपाली क्रिकेट को अपूरणीय क्षति होगी। नेपाल के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य विकल्प कम हैं। जबरदस्ती या विवाद से समस्या का समाधान नहीं होगा, दोनों पक्षों को लाभकारी सहमति करनी होगी।’ सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली सरकार ने त्रिवि परिसर में स्थित इस मैदान को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट रंगशाला बनाने के लिए गुरुयोजना स्वीकृत की थी। इस गुरुयोजना के अनुसार रंगशाला निर्माण पर लगभग १० अरब रुपये खर्च होने का अनुमान है। क्यान के प्रवक्ता छुम्बी लामाले कहते हैं कि त्रिवि क्रिकेट रंगशाला नहीं होने से नेपाली क्रिकेट काफी पीछे रह जाएगा। पिछली आर्थिक वर्ष में सरकार ने मैदान के स्तरोन्नति के लिए लगभग ८५ करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिसमें ४३ करोड़ ७७ लाख रुपये प्यारापिट और ४२ करोड़ १९ लाख रुपये फ्लडलाइट की स्थापना में लगे हैं।

फिर भी त्रिवि ने क्यान को जमीन खाली करने का अल्टिमेटम जारी किया है। क्यान घरेलू मैदान में होने वाले अंतरराष्ट्रीय मैच त्रिवि मैदान में आयोजित करता रहा है। मुलपानी मैदान तैयार न होने तक नेपाल प्रीमियर लीग (एनपीएल) समेत अनेक प्रतियोगिताएं वहीं आयोजित होती रही हैं। नेपाली क्रिकेट जहां वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभर रहा है, उस समय राज्य या विश्वविद्यालय द्वारा इसके विकास में बाधा डालना राष्ट्रीय हित के खिलाफ होगा, राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान लेखबहादुर क्षेत्री का मानना है। क्षेत्री कहते हैं, ‘त्रिवि मैदान सिर्फ खेल क्षेत्र नहीं बल्कि राष्ट्र की एक संपत्ति है। ३० साल के इतिहास वाले मैदान को विश्वविद्यालय द्वारा अचानक हटाने की कोशिश गलत है।’

क्यान त्रिवि के साथ समझौता बढ़ाने के इच्छुक है। गत चैत २३ को हुई क्यान बोर्ड की बैठक में राष्ट्रीय खेलकूद परिषद (राखेप) के माध्यम से सरकार से समझौता अवधि बढ़ाने का अनुरोध करने का निर्णय लिया गया था। क्यान ने इसके लिए राखेप और युवा तथा खेलकूद मंत्रालय को पत्र भी भेजा है। युवा तथा खेलकूद मंत्री सस्मित पोखरेल ने कहा कि त्रिवि क्रिकेट मैदान के साथ जल्द ही नया भाड़ा समझौता होगा। उन्होंने बताया कि आज प्रधानमंत्री और मन्त्रिपरिषद के निर्णय के बारे में त्रिवि के उपकुलपति और उच्च पदाधिकारियों के साथ बैठक हुई, जो सकारात्मक रही। उन्होंने कहा, ‘आज सुबह त्रिवि उपकुलपति सहित बैठक हुई। सहमति बनी कि जमीन खाली नहीं की जाएगी, भाड़ा समझौता नवीनीकृत किया जाएगा। राज्य ने इसमे बड़ी रकम लगाई है। यह राज्य की संपत्ति है। लीज समझौता फिर से होना ही चाहिए।’