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उच्च अदालत ने ‘लालीबजार’ फिल्म की प्रदर्शन पर अस्थाई रोक लगाई

पाटन उच्च न्यायालय ने फिल्म ‘लालीबजार’ के प्रदर्शन को २२ वैशाख तक के लिए रोकने का अस्थाई आदेश जारी किया है। अदालत ने इस रोक का आधार वर्ष २०७५ में सुप्रीम कोर्ट के ‘नथिया’ और ‘ऐलानी’ मामलों के आदेश को माना है, जिसमें जातीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखा गया है। फिल्म के कुछ समुदायों के आत्मसम्मान को प्रभावित करने की संभावना के कारण अदालत ने दोनों पक्षों को २२ वैशाख को चर्चा के लिए आमंत्रित किया है।

पाटन उच्च न्यायालय का यह अस्थाई आदेश ७ वर्ष पूर्व सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेशों का पालन करता है। न्यायाधीश प्रकाश ढुंगाना की एकल पीठ ने २२ वैशाख तक फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाते हुए उसी दिन दोनों पक्षों की बहस के लिए सुनवाई निर्धारित की है। इसके अलावा अदालत ने २०७५ साल फागुन १५ को सुप्रीम कोर्ट के ‘नथिया’, ‘ऐलानी’ उपन्यास और ‘पंडित बाजेकी लौरी’ फिल्म से संबंधित मामले में दिए गए निर्देशात्मक आदेशों को आधार बनाया है।

इस मामले में न्यायाधीश ईश्वरप्रसाद खतिवड़ा और बमकुमार श्रेष्ठ की पीठ ने जातीय तथा सामाजिक संवेदनशील विषयों पर सावधानी बरतने तथा संबंधित संस्थाओं को आवश्यक निर्देश देने का आदेश दिया था। उच्च न्यायालय के आदेश में भी ‘लालीबजार’ से संबंधित प्रश्नों को गंभीर बताया गया है। याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत कारणों और साक्ष्यों के अनुसार, कुछ समुदायों के आत्मसम्मान को नुक्सान पहुंचने की संभावना को देखते हुए तत्काल फिल्म प्रदर्शन रोकना आवश्यक समझा गया है।

यह आदेश अंतिम निर्णय नहीं है, बल्कि एक अंतरिम स्थिति में संतुलन बनाए रखने का प्रयास है। आदेश में ‘अपरिणीय नुकसान की संभावना’ और ‘सुविधा संतुलन के सिद्धांत’ को भी ध्यान में रखते हुए फिल्म के प्रदर्शन को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है। केवल दोनों पक्षों की विस्तृत बहस के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ‘नथिया’ और ‘ऐलानी’ मामलों में वादी समुदाय के आत्मसम्मान को चोट पहुंचने के मामलों को गंभीरता से देखकर ऐसी कृतियों में भाषा, शैली और प्रस्तुति में संवेदनशीलता बरतने के आदेश दिए थे। अब २२ वैशाख को होने वाली सुनवाई के बाद अदालत द्वारा आगे का फैसला लिया जाएगा।