ईरान युद्ध: नाकाबंदी ‘लम्बाने’ के संकेत से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं

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संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ नाकाबंदी “लंबी अवधि के लिए जारी रखने” की तैयारी की खबर के बाद तेल के दाम आसमान छू गए हैं।
ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल के बीच विवाद के लंबे समय तक खींचाव की आशंका से कच्चे तेल का दाम प्रति बैरल 120 अमेरिकी डॉलर से ऊपर पहुंच गया है।
फरवरी के अंत से शुरू हुए युद्ध के बाद यह तेल के दाम का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुख कार्यकारी अधिकारियों के साथ ईरानी बंदरगाहों और ट्रांसपोर्ट मार्गों पर नाकाबंदी को लंबे समय तक जारी रखने के विकल्प पर चर्चा की थी।
युद्ध शुरू होने से पहले विश्वव्यापी पेट्रोलियम निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत होर्मुज जलसंधि मार्ग से होता था। फिलहाल अमेरिका ईरान के विरुद्ध समुद्री नाकाबंदी बनाए हुए है।
क्यों बढ़ी चिंता
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अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ नाकाबंदी जारी रखने के संकेत देने से तेल के दामों में वृद्धि हुई है।
विश्व स्तर पर तेल की कीमतों का मानक माना जाने वाला ‘ब्रेंट क्रूड’ बुधवार को 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। कुछ समय के लिए यह कीमत 122 डॉलर तक भी पहुंची, जो 2022 के बाद का सबसे अधिक स्तर है।
सेवरॉन के मुख्य कार्यकारी माइक विर्थ सहित ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुखों ने मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की। इस बैठक में हालिया संघर्ष के कारण अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के उपायों पर चर्चा हुई।
ऊर्जा क्षेत्र के अधिकारियों ने इस मुलाकात को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलसंधि की लंबी अवधि के लिए बंद होने के संकेत के रूप में लिया है।
बैठक में घरेलू ऊर्जा उत्पादन, वेनेजुएला में प्रगति, तेल का भविष्य, प्राकृतिक गैस और जलसंधि से होने वाले परिवहन से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा हुई, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया।
यह वार्तालाप अमेरिकी राष्ट्रपति और ऊर्जा क्षेत्र के कार्यकारियों के बीच नियमित रूप से होते रहते हैं।
इससे पहले वाल स्ट्रीट जर्नल ने खबर दी थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने निकट सहयोगी अधिकारियों को ईरान के बंदरगाहों पर नाकाबंदी को लंबा करने का निर्देश दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का यह कदम ईरान की आर्थिक स्थिति को दबाव में रखने के लिए बताया गया है।
कीमत में उतार-चढ़ाव
ईरान ने अमेरिकी नाकाबंदी का जवाब देते हुए होर्मुज जलसंधि में जहाजों की आवागमन पर रोक जारी रखने की घोषणा की है।
होर्मुज जलसंधि के अवरुद्ध होने के कारण पिछले कुछ हफ्तों से ईंधन के दामों में व्यापक उतार-चढ़ाव देखे गए हैं।
28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने आक्रमण शुरू करने के बाद ईरान ने इसका जवाब देते हुए होर्मुज जलसंधि में चलने वाले जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था।
इस महीने की शुरुआत में तेहरान ने जलसंधि से गुजरने वाले सभी जहाजों को निशाना बनाए जाने की चेतावनी भी दी थी।
इसके बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को रोकने या वापस भेजने का भी ऐलान किया।
विश्लेषकों के अनुसार, ईरानी बंदरगाहों से कम से कम चार जहाज अमेरिकी नाकाबंदी क्षेत्र को पार कर चुके हैं।
17 अप्रैल को इज़राइल और लेबनान के बीच युद्ध-विराम की घोषणा के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल तक घट गई थी। अमेरिका ने 8 अप्रैल को ईरान पर आक्रमण स्थगित करने की सूचना दी थी। फिर भी वर्तमान कीमत अभी भी युद्ध से पहले के स्तर से काफी अधिक है।
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