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सम्पत्ति छानबिन आयोगलाई पूर्व प्रधानमन्त्री, न्यायाधीश, कूटनीतिज्ञ और सुरक्षा अधिकारियों की सम्पत्ति जांचने का अधिकार

सरकार द्वारा गठित सम्पत्ति छानबिन आयोग को विक्रम संवत २०६२/६३ से सत्ता में रहे उच्च पदस्थ राजनीतिक अधिकारी और कर्मचारियों के साथ-साथ पूर्व न्यायाधीशों से पूर्व उच्च सैन्य अधिकारियों की सम्पत्ति की जांच करने का अधिकार प्राप्त हुआ है। राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, शिकायत आने पर आयोग लगातार तैनात सैनिक अधिकारियों, पद पर कार्यरत न्यायाधीशों तथा कार्यक्षेत्र में न आने वाले अन्य अधिकारियों की जांच के लिए संबंधित संस्थाओं से लिखित अनुरोध कर सकता है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह द्वारा सत्ता संभालने के बाद इसी माह की शुरुआत में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रकुमार भण्डारी की अध्यक्षता में यह पाँच सदस्यीय आयोग गठित किया गया था।

आयोग को प्रथम चरण में एक वर्ष की अवधि के लिए आर्थिक वर्ष २०६२/२०६३ से २०८२/८३ चैत्र मसांत तक पदोनत पदधारियों की सम्पत्ति संकलन, पुष्टि और जांच का कार्यक्षेत्र प्रदान किया गया है, जबकि द्वितीय चरण में विक्रम संवत २०४८ से आर्थिक वर्ष २०६१/२०६२ तक के उच्च पदाधिकारियों की सम्पत्ति जांचने की जिम्मेदारी भी सौंपी गयी है। आयोग को कार्यपालिका, न्यायपालिका तथा विधायिका तीनों निकायों के उच्च पदस्थ अधिकारियों की सम्पत्ति की जांच करने का सक्षम क्षेत्राधिकार प्राप्त है।

आयोग नेपाल सरकार और पूर्व श्री ५ कालीन सरकार के प्रधानमंत्रियों, मंत्रियों, राज्य मंत्रियों तथा सहायक मंत्रियों की सम्पत्ति की छानबीन कर रहा है। इसी प्रकार, नेपाल अधिराज्य के संविधान २०४७, नेपाल के अंतरिम संविधान २०६४ तथा वर्तमान संविधान के अनुसार नियुक्त संवैधानिक संस्थाओं के प्रमुख और पदाधिकारी तथा पूर्व न्यायाधीश भी जांच के दायरे में आ चुके हैं। नेपाल राष्ट्र बैंक के गवर्नर, संचालक समिति के अधिकारी, डेप्युटी गवर्नर, कार्यकारी निर्देशक सहित राजपत्रांकित प्रथम श्रेणी या उससे उच्च स्तर के कर्मचारियों की भी जांच करने का अधिकार आयोग को दिया गया है।

आयोग की जांच में यदि किसी पदाधिकारी या कर्मचारी के गैरकानूनी तरीके से संपत्ति अर्जित करने के प्रमाण मिलते हैं, तो स्रोत अज्ञात संपत्ति विवरण समेत विस्तृत जांच कर एफआईआर और कार्रवाई के लिए संबंधित संस्थाओं को सिफारिश करने और संघीय सरकार को निर्देश देने का प्रावधान है। सूचना में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि आयोग स्वतंत्र, निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से कार्य करेगा तथा किसी भी प्रकार के दबाव या प्रभाव में नहीं आएगा।