सुबह करीब साढ़े चार बजे उठकर टॉर्च की रोशनी में चढ़ाई शुरू की। आकाश में टिमटिमाते सितारे अभी पूरी तरह चमक नहीं रहे थे, वे हमारे यात्रा साथी बन गए थे। यह यात्रा खासकर गोसाईकुण्ड की सुंदरता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ का वातावरण यात्रा को और भी आनंदमय बना देता है।