
१९ वैशाख, काठमाडौं। नेकपा एमाले के नेता प्रदीप ज्ञवाली ने सरकार पर निर्वाचित सर्वसत्तावाद की दिशा में बढ़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने शनिवार को जिला समन्वय समिति के जिम्मेदारी विषयक कार्यक्रम में कहा कि १०० दिनों तक चुप रहने का मन था, लेकिन सरकार की गतिविधियों ने कुछ बातें अवश्य बोलनी पड़ने वाली स्थिति बना दी है। “कुछ बातें न बोलना, रिकॉर्ड न करना और समाज को जागरूक न करना संभव नहीं है,” ज्ञवाली ने कहा।
उन्होंने बताया कि सरकार की कार्यशैली को देखकर नेपाली जनता को उन लोकतांत्रिक अधिकारों के सिकुड़ने का खतरा दिखने लगा है, जो उन्होंने लंबे संघर्ष के बाद हासिल किए हैं। २०२१ साल के पंचायतकाल में नेपाल के लोगों ने सबसे पहला अधिकार स्वतंत्र विद्यार्थी यूनियन का अधिकार प्राप्त किया था, जो उन्होंने संघर्ष कर सुरक्षित किया था। ज्ञवाली ने कहा, “तब दल प्रतिबंधित थे, नेता जेल में थे, लेकिन विद्यार्थी ने स्वतंत्र विद्यार्थी यूनियन का अधिकार २०२१ साल में जीत लिया था। आज उस अधिकार को कटौती का ऐलान किया गया है।”
ज्ञवाली ने कहा कि ट्रेड यूनियन का अधिकार संविधान द्वारा सुनिश्चित है। उन्होंने कहा, “हाँ, ट्रेड यूनियन, विद्यार्थी संगठन और दलों में विकृतियां हो सकती हैं, लेकिन दलों में विकृति होने के कारण दल-रहित व्यवस्था की कल्पना करना गलत है।”
उन्होंने तत्कालीन राजा महेन्द्र शाह द्वारा २०१७ साल में इसी तरह के कदम उठाए जाने को भी याद दिलाया। उन्होंने बताया कि स्वतंत्र मीडिया को मजबूत न बनने देने के लिए विज्ञापनों पर नियंत्रण लगाया गया है, जो लगभग प्रतिबंध के समान है। उन्होंने कहा, “सामाजिक संजाल में भी इसी तरह का माहौल है। स्वस्थ बहस न हो, इसके लिए संगठित समूह बनाकर अलग विचारों को दबाया और उत्पीड़ित किया जा रहा है।” ज्ञवाली ने यह सभी गतिविधियां निर्वाचित सर्वसत्तावाद की ओर बढ़ने के संकेत बताए। उन्होंने कहा, “मुझे चिंता है कि हम निर्वाचित सर्वसत्तावाद और निर्वाचित अलोकतांत्रिक शासन की तरफ बढ़ रहे हैं, इसके प्रारंभिक संकेत दिखने लगे हैं।”





