ट्रम्प ने जर्मनी से 5,000 सैनिक वापस बुलाने का निर्णय, चांसलर की युद्ध आलोचना से जुड़ा

अमेरिका ने आगामी 6 से 12 महीनों के भीतर जर्मनी से लगभग 5,000 सैनिक वापस बुलाने का निर्णय लिया है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और जर्मन चांसलर मर्ज की विवादपूर्ण टिप्पणियों के बाद आया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सैन्य वापसी से नाटो की एकता कमजोर हो सकती है और यूरोप में अमेरिकी प्रभाव कम हो सकता है।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह प्रक्रिया अगले 6 से 12 महीनों के भीतर पूरी होगी। मर्ज ने पिछले महीने एक कार्यक्रम में कहा था कि अमेरिका के पास कोई स्पष्ट योजना नहीं है और इस युद्ध से कैसे बाहर निकला जाए यह ज्ञात नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान समझौते को सफलतापूर्वक लागू नहीं किया और इस कारण बिना किसी नतीजे के इस्लामवाद से निपटना पड़ रहा है, जिससे अमेरिका ईरान के सामने अपमान के स्थिति में है।
जर्मनी में 36,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। दिसंबर तक वहां 36,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक मौजूद थे। ट्रम्प ने यूरोपीय देशों को ‘कागजी बाघ’ कहते हुए आरोप लगाया कि जरूरत पड़ने पर ये देश अनावश्यक और असहाय साबित होते हैं। सैनिकों की वापसी का यह प्रयास राष्ट्रपति ट्रम्प की जर्मनी से सैनिकों की वापसी की सार्वजनिक योजना का हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका ने जर्मनी से सैनिक वापस बुलाए तो इससे नाटो की एकता कमजोर होगी। अमेरिकी संसद में भी इस निर्णय की आलोचना हो रही है। कई नेताओं ने इसे जिम्मेदारीहीन कदम बताया है और कहा है कि इससे यूरोप में अमेरिकी प्रभुत्व कमजोर हो सकता है।





