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इतिहास अध्ययन का महत्व और इलाम साहित्य महोत्सव २०८३

१९ वैशाख, इलाम। हम भविष्य को बेहतर बनाना चाहते हैं, लेकिन हम अतीत में क्यों लौटते हैं? इतिहास पढ़ना क्यों आवश्यक है? सुजित मैनाली के इस प्रश्न का जवाब देते हुए इलाम के युद्ध वैद्य ने कहा- ‘मुख्य बात यह है कि इतिहास हमें स्वयं को पहचानने में मदद करता है। मैं कौन था, कहाँ था, यह बहुत महत्वपूर्ण है।’ महेंद्र रत्न बहुमुखी कैंपस के पूर्व प्रमुख रहे वैद्य ‘इलाम का इतिहास’ पुस्तक के लेखक और इतिहास विशेषज्ञ भी हैं। पूर्वी पहाड़ी क्षेत्र के इतिहास की चर्चा से शुरू हुए सत्र में उन्होंने यह विचार प्रस्तुत किया।

पाँचवें संस्करण के इलाम साहित्य महोत्सव २०८३ में ‘जराके कुरा, हाम्रो इतिहासको चर्चा’ विषय पर वैद्य के साथ लेखक मोहन मैनाली भी चर्चा में शामिल थे। ‘आगे बढ़ने के लिए कभी-कभी पीछे लौटना पड़ता है, पीछे क्या है? देखना पड़ता है। जीवन को सरल बनाने के लिए इतिहास पढ़ना जरूरी है। इतिहास को विद्यालयों में अनिवार्य पढ़ाई का हिस्सा बनाया जाना चाहिए,’ मैनाली ने जोड़ा, ‘अगर हमने पानी का इतिहास ठीक से पढ़ा होता तो बेलासे ‘झापा से इलाम आने वाले छोटे रास्ते’ में समस्याएँ नहीं आतीं।’

मदन पुरस्कार विजेता पुस्तक ‘मुकाम रणमैदान’ के लेखक मैनाली ने इतिहास को पढ़ना एक जरूरी विषय होने पर चर्चा की। उन्होंने ‘हिमालपारी, हिमालवारी’ विषय में भी इतिहास की चर्चा की। नेपाल-चीन संबंधों के इतिहास की चर्चा पत्रकार सुधीर शर्मा ने की। ‘इतिहास की निरंतरता ही वर्तमान है। इतिहास को समझे बिना वर्तमान की तस्वीर समझ नहीं आती। नेपाल का लिखित इतिहास बहुत पुराना नहीं है, लेकिन चीन के पास बहुत पहले के लेखन सामग्री मौजूद हैं,’ शर्मा ने कहा, ‘नीति निर्माण करने वाले लोगों को और हमें खुद भी सतर्क होकर देश को सही दिशा में ले जाने के लिए इतिहास का अध्ययन करना चाहिए।’

‘भिक्षु, व्यापार और विद्रोह’ पुस्तक के लेखक शर्मा ने विगत की गलतियों को पुनः दोहराने से रोकने और सशक्त राष्ट्रीय नीति निर्माण के लिए इतिहास के गहन अध्ययन की आवश्यकता पर जोर दिया। पत्रकार दीपक सापकोटा के साथ चर्चा में उन्होंने इतिहास को महत्वपूर्ण विषय बताया। महोत्सव के पहले दिन ‘डिजिटल मासुभात और हम पत्रकार’ विषय पर बोलते हुए प्रधान संपादक बसन्त बस्नेत ने कहा कि अब इतिहास पढ़ने और पढ़ाने का समय आ गया है।

इलाम साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन शिक्षा विधेयक से जुड़ी समस्याओं पर डॉ. योगेन्द्रमान श्रेष्ठ, पूर्ण गौतम और टंक गौतम के साथ सटेन्द्र जवेगुले चर्चा की। इसी तरह, सीमावर्ती साहित्य के बारे में वेनिता क्षेत्री, कृष्ण बराल और ज्ञानेन्द्र याक्सोंस के साथ डॉ. हेम भण्डारी ने संवाद किया। दूसरे दिन कविता पाठ कार्यक्रम भी संपन्न हुआ।

अरेन्ज इकोनोमी और ग्रीन इकोनोमी के माध्यम से इलाम का विकास: इलाम साहित्य महोत्सव २०८३ के दूसरे तथा अंतिम दिन इलाम-१ के सांसद निष्कल राई ने ‘अरेन्ज इकोनोमी और ग्रीन इकोनोमी के माध्यम से इलाम का विकास’ की अवधारणा साझा की। उन्होंने इलाम को केवल दृश्य या नजारों वाला स्थान नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सभ्यतापूर्ण क्षेत्र बताया और प्रकृति को नष्ट किए बिना संसाधनों का उपयोग करने को ग्रीन इकोनोमी कहा।

उन्होंने बताया कि ग्रीन इकोनोमी का अभ्यास शुरू हो चुका है, लेकिन इलाम को आने वाले समय में अरेन्ज इकोनोमी के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र का विकास करना होगा। ‘हमारी संस्कृति, परंपरा, संगीत और कला भी आर्थिक संपत्ति हैं। केवल चाय उत्पादन ही नहीं, वह अपनी कहानी और ब्रांड भी है, अब हमें उन कहानियों को भी बेचना होगा,’ उन्होंने कहा। पर्यटक केवल स्थान नहीं, अनुभव और स्थानीय कहानियाँ खोजकर आते हैं, इसलिए स्टोरीटेलिंग पर्यटन को बढ़ावा देना आवश्यक है। सृजनात्मक अर्थव्यवस्था या अरेन्ज इकोनोमी को अब इलाम को विकसित करके बेचने की आवश्यकता है।

इलाम में इको-टूरिज्म के लिए पर्याप्त आधार होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृति से जुड़ा अनुभव बेचने से पर्यटक का ठहराव बढ़ाया जा सकता है। ‘अगर अरेन्ज इकोनोमी के अभ्यास को लागू किया जा सके तो इलाम का पर्यटन दो से चार गुना बढ़ सकता है,’ उन्होंने कहा।

दो दिन तक चलने वाला इलाम साहित्य महोत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कविता, पर्यटन, आख्यान सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा, रचनापाठ, सम्मान और पुरस्कार वितरण के साथ यह महोत्सव समापन हुआ।