
सन् १९९६ के १० मई को सगरमाथा आरोहण के दौरान आई हिमआँधी ने १२ पर्वतारोहियों की जान ले ली और कई घायल हो गए। जान क्रैकौर ने सगरमाथा आरोहण और उसी वर्ष हुई इस दुर्घटना के व्यक्तिगत अनुभव को समेटते हुए अपनी पुस्तक ‘इन्टु थिन एयर’ लिखी है। सन् १९९६ में सगरमाथा आरोहण की अनुमति लेने पर टोली के लिए ७२ हजार और एकल आरोही के लिए १५ हजार अमेरिकी डॉलर शुल्क लगता था, जो आज कहीं अधिक बढ़ चुका है। सगरमाथा के इतिहास में सन् १९९६ एक ऐसा वर्ष बन गया जो कभी नहीं भूला जा सकता।
उसी वर्ष १० मई को आई हिमआँधी ने १२ पर्वतारोहीयों की जान ली और अनेक घायल हुए। यह घटना इतिहास के पन्नों पर दर्दनाक रूप से अंकित है और सगरमाथा की वापसी की राह पर घाव बन कर मौजूद है। उस वर्ष सगरमाथा आरोहण के दौरान क्या-क्या हुआ? उस समय दुनिया के श्रेष्ठ पर्वतारोही शिखर के आनंद में मग्न थे। मौसम सामान्यतः साफ था। १० मई १९९६ को आई भयंकर हिमआँधी ने सगरमाथा को झकझोर दिया। इस घटना में आठ अनुभवी पर्वतारोहीयों की मृत्यु हुई और कई घायल हुए।
सगरमाथा आरोहण के लिए नेपाल और चीन की सरकारों ने अनुमति शुल्क लेना शुरू किया था, और इस वर्ष सबसे अधिक आरोही मारे गए। २०१४ में १६, २०१५ के भूकंप के बाद आई हिमआँधी में २२, और २०२४ में हुई बड़ी घटनाओं में शेर्पा समुदाय के १६ लोगों की जान गई। सन् १९२२ से लेकर मार्च २०२६ तक कुल ३३९ लोगों ने अप्रत्याशित रूप से जीवन खोया है, जिनमें से १५७ ने बिना ऑक्सीजन के आरोहण प्रयास के दौरान अपनी जान गवाई।
लेखक क्रैकौर ने उस दुर्घटना के घटनाक्रम, उपचार व बचाव प्रयासों का विस्तृत विवरण किया है। इस घटना ने सगरमाथा आरोहण के जोखिम और चुनौतियों की पूर्ण तस्वीर प्रस्तुत की है। सगरमाथा दुर्घटना के पीड़ितों की अधिकांश मौतें हिमआँधी और तूफानों के कारण हुई हैं। लेखक क्रैकौर की पुस्तक एवं उसमें शामिल विवादास्पद कथन पर्वतारोहण क्षेत्र में नई दृष्टि और समझ प्रदान करने में सफल रहे हैं।





