
नेपाल में लगभग २९ हजार तृतीयलिंगी हैं, जिनमें से ७६ प्रतिशत से अधिक यौनकर्म से अपनी आजीविका चलाते हैं। तृतीयलिंगी नागरिकता पाने की प्रक्रिया में अभी भी संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि मेडिकल प्रमाण पत्र मांगने की प्रवृत्ति ने प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है। तृतीयलिंगी समुदाय में आत्महत्या, हिंसा और नशे की लत अधिक है, जबकि सरकार की सुरक्षा और रोजगार के अवसरों की कमी है।
काठमाडौं के थापाथली में भीड़ कम होती जा रही है। कुछ दूरी पर चाय की दुकानों में एक-दो ग्राहक ही नजर आते हैं। सड़क की बत्तियों की रोशनी में लोगों की परछाईयां साफ दिखने लगी हैं। उसी रोशनी में छिपी हुई हैं, बोबी तामांग (परिवर्तित नाम)। २९ वर्षीया बोबी ट्रांसजेंडर हैं और यौनकर्मी भी। उन्होंने चार वर्ष पहले इसी तरह सड़क पर उतरकर रातें बिताना शुरू किया था। ये चारों साल की हर रात एक अनंत प्रतीक्षा में बीती।
बोबी एक प्रतिनिधि हैं, जो ट्रांसजेंडर होने के कारण यौनकर्म में हैं। उनकी तरह और भी कई लोग इस पेशे में हैं, केवल जीने के लिए। राष्ट्रीय तथ्यांक कार्यालय के अनुसार नेपाल में लगभग २९ हजार तृतीयलिंगी हैं, जिनमें से लगभग ७६ प्रतिशत से अधिक की मुख्य आजीविका यौनकर्म है। शीतल गुरुङ कहती हैं, “हम क्या करके जीवित रहें? न तो कोई नौकरी देता है, न काम पर रखता है।”
जब जीविका के लिए पैसे चाहिए और सभी रास्ते बंद हो जाते हैं, तो उनके लिए सड़क ही आखिरी सहारा बचता है। यह कोई पेशा नहीं, बल्कि जीवित रहने का अंतिम विकल्प और मजबूरी होती है। तृतीयलिंगी के पेशेवर विकल्पों में मुख्यतः नृत्य और देह व्यापार ही बचे हैं, बताते हैं जनकपुर के मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रदीप कुमार। उन्होंने कहा, “समाज पहले हमारी समझ नहीं पाता था, बाद में घृणा करता था, अब कुछ जगह स्वीकार भी करने लगा है।”





