
फेसबुक और इंस्टाग्राम के दैनिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या करीब दो करोड़ से कम हो गई है। इन लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के फीड की घटती गुणवत्ता, अत्यधिक विज्ञापन और बार-बार दोहराई जाने वाली सामग्री ने उपयोगकर्ताओं को असंतुष्ट कर दिया है। जब उपयोगकर्ता यह महसूस करने लगे कि प्लेटफॉर्म उनकी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर रहा, तो मेटा ने अपने एल्गोरिदम में व्यापक परिवर्तन शुरू किए। रिपोर्टों के अनुसार, मेटा अब फेसबुक और इंस्टाग्राम में मूल सामग्री को प्राथमिकता देने का लक्ष्य रखती है।
हाल के समय में फेसबुक और इंस्टाग्राम के उपयोगकर्ताओं ने शिकायत की है कि उनका फीड पहले से अलग और कम आकर्षक हो गया है। वे पाते हैं कि फीड में अधिकतर पोस्ट प्रायोजित होते हैं, सामग्री बार-बार दोहराई जाती है और एल्गोरिदम के आधार पर सुझाई गई पोस्टों की संख्या बढ़ गई है। इससे दोस्तों और फॉलो किए गए खातों से आने वाली पोस्टें कम दिखाई देने लगी हैं। कई उपयोगकर्ता इसे एक एल्गोरिदम-संचालित मनोरंजन प्लेटफॉर्म जैसा अनुभव कर रहे हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि मेटा ने यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए सुझाई गई सामग्री पर ज्यादा ध्यान दिया है, लेकिन इससे उपयोगकर्ता अनुभव पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। मेटा का व्यापार मॉडल विज्ञापनों पर आधारित है, लेकिन वर्तमान रणनीति से उपयोगकर्ताओं का अनुभव प्रभावित हो रहा है। उन्हें नियमित रूप से बहुत अधिक प्रायोजित विज्ञापन और प्रचार सामग्री दिखाई जाती है, जिससे वे परेशान हो जाते हैं।
मेटा ने बढ़ती आलोचनाओं को देखते हुए अपने रिकमेंडेशन एल्गोरिदम में बदलाव शुरू कर दिया है। इंस्टाग्राम में भी उल्लेखनीय परिवर्तन किए जा रहे हैं, जिनमें मूल सामग्री को अधिक प्राथमिकता दी जाएगी जबकि रिपोस्ट की गई या कम संपादित सामग्री की पहुंच घटाई जाएगी। मेटा के लिए सबसे बड़ी चुनौती मुद्रीकरण और उपयोगकर्ता संतुष्टि के बीच संतुलन बनाए रखना है।





