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सुशीला कार्की ने डॉ. मनोज शर्मा की नियुक्ति को असंगत बताया

पूर्व प्रधानमंत्री तथा पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की ने प्रधान न्यायाधीश सिफारिश में चौथे नंबर पर रहे डॉ. मनोज शर्मा की नियुक्ति को गलत बताया है। कार्की ने कहा कि वरिष्ठतम न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल सक्षम हैं और महिला प्रधान न्यायाधीश को रोकना सरकार की गलती है। उन्होंने न्यायाधीश की नियुक्ति योग्यता के अनुसार होनी चाहिए और सपना प्रधान मल्ल ने महिलाओं से जुड़े कानूनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। २४ वैशाख, काठमांडू।

संवैधानिक परिषद ने गुरुवार को किए गए प्रधान न्यायाधीश नियुक्ति सिफारिश पर पूर्व प्रधानमंत्री एवं पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की ने गंभीर असहमति जताई है। उनसे बातचीत में उन्होंने कहा कि विधि और परंपरा के विपरीत चौथे वरीयता वाले न्यायाधीश डॉ. मनोज शर्मा को प्रधान न्यायाधीश के लिए सिफारिश करना गलत है। संवैधानिक परिषद तथा अन्य सभी प्रधान न्यायाधीशों में कार्यरत वरिष्ठतम न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ल ही सक्षम हैं, उनका तर्क है।

कार्की ने पूछा, ‘इतिहास में इतनी योग्य और सक्षम महिला, उसमें क्या कमी थी?’ उन्होंने कहा, ‘इसका परिणाम यह सरकार बाद में भोगेगी।’ योग्य और सक्षम महिला को रोकना सरकार की बड़ी भूल है और इसके नतीजे वर्तमान सरकार को भुगतने होंगे।

उन्होंने कहा, ‘राज्य की तीन संस्थाएं हैं, सभी की अपनी प्रतिष्ठा और गंभीरता होती है। पुलिस में नियुक्ति कैसे होती है? पहले चयनित होकर ही आता है। एक साधारण सैनिक भी धीरे-धीरे प्रमोशन पाकर ऊपर पहुंचता है।’ उन्होंने जारी रखा, ‘न्यायाधीशों की भी इसी तरह प्रमोशन होता है। सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति योग्यता के अनुसार होनी चाहिए। यदि कुछ योग्यता नहीं है तो उसे बाहर किया जा सकता है।’ कार्की ने यह भी कहा कि जब वे प्रधान न्यायाधीश थीं, तब उन्हें दुनिया की तीसरी महिला प्रधान न्यायाधीश कहा गया था और वर्तमान सरकार ने बिना सोच-विचार निर्णय लिया है।

‘अभी जो सपना प्रधान मल्ल हैं, वे किसी अयोग्य व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने लंबे समय तक वकालत की है। उन्होंने आईएनजीओ और एनजीओ के बीच भी वकालत की है। उन्होंने कानून बनाने में भी सहयोग दिया है,’ उन्होंने कहा। कार्की ने कहा कि देश में महिलाओं से संबंधित कानून लाने में सपना प्रधान मल्ल जैसे नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।