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ज्ञवाली: नेटवर्क नियंत्रण समाज को आत्म-सेन्सरशिप की ओर ले जा रहा है

नेकपा (एमाले) के नेता प्रदीप ज्ञवाली ने कहा है कि संविधान संशोधन गणतंत्र और लोकतंत्र के मूल स्तंभों को कमजोर नहीं करना चाहिए। ज्ञवाली ने वर्तमान राजनीतिक सत्ता संतुलन को लोकतांत्रिक और वामपंथी ताकतों के लिए प्रतिकूल बताया और संशोधन प्रक्रिया में सतर्क रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्वतंत्र मीडिया को कमजोर करने के प्रयासों और देश के निर्वाचित तानाशाही की ओर बढ़ने की चिंता व्यक्त की। 26 वैशाख, काठमाडौँ।

ज्ञवाली ने राष्ट्रीय जनमोर्चा द्वारा आयोजित ‘संविधान संशोधन, गणतंत्र और राष्ट्रीयता की रक्षा’ विषयक विचार गोष्ठी में कहा कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में संविधान निर्माण के लिए प्रमुख दलों की क्षमता कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधि सभा में तीन मुख्य दलों की कुल संख्या केवल 79 होने के कारण प्रतिकूल संविधान संशोधन को रोकने की शक्ति भी कम हो गई है।

उन्होंने कहा, “स्वतंत्र मीडिया को कमजोर करने का प्रयास हो रहा है और सोशल मीडिया पर नियंत्रण करके समाज को आत्म-सेन्सरशिप की ओर धकेला जा रहा है।” सरकार की हाल की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए ज्ञवाली ने कहा कि देश निर्वाचित तानाशाही की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने मौलिक अधिकारों, ट्रेड यूनियन अधिकारों और प्रेस स्वतंत्रता को सीमित करने की कोशिश को भी आरोपित किया।

प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यपालिका प्रणाली की बहस के संदर्भ में ज्ञवाली ने कहा कि नेपाल जैसे भू-राजनीतिक स्थिति वाले देश में यह व्यवस्था हानिकारक होगी। उन्होंने कहा, “मैंने सुना है कि प्रधानमंत्रीजी ने हिटलर के ‘मैनेजेरियल स्किल’ सीखकर समाज को एक ही सोच में समेटने की इच्छा व्यक्त की है। बहुलवादी और विविधता से भरे समाज में ऐसी सोच रखना आपत्तिजनक है।”