सुदूरपश्चिम के स्थानीय जनप्रतिनिधियों का स्थानीय तह संख्या और सीमा परिवर्तन पर विचार

२६ वैशाख, डोटी। संघीय सरकार द्वारा गाउँपालिका, नगरपालिका तथा वडाओं की संख्या और सीमा परिवर्तन के लिए नए मानदंडों का प्रारम्भिक मसौदा सार्वजनिक किए जाने के बाद इस विषय पर तीव्र बहस छिड़ गई है। सरकार के मसौदे पर सुदूरपश्चिम के स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की हैं।
कैलाली के लम्कीचुहा नगरपालिका की मेयर सुशीला शाही ने स्थानीय तह की संख्या और सीमा परिवर्तन आवश्यक बताया है। लेकिन उन्होंने इस संदर्भ में विस्तृत अध्ययन कर निर्णय लेने पर जोर दिया। ‘‘पुनर्संरचना के दौरान किए गए सीमांकन में मेल नहीं है,’’ शाही ने कहा, ‘‘कुछ-कुछ बस्तियों में वडा कार्यालय की पहुंच अपूर्ण है तो कुछ बस्तियों के लिए नगरपालिका तक जाना कठिन है। इसमें सुधार आवश्यक है।’’ उन्होंने कुछ गाउँपालिकाओं को स्तरोन्नत कर नगरपालिकाओं का दर्जा देने की आवश्यकता भी जताई। कुल मिलाकर स्थानीय तह की संख्या घटाने के पक्ष में उनकी राय है। ‘‘जनता अधिकांश आधारभूत सेवाएँ वडा कार्यालयों से ही प्राप्त करती है। वडाओं की संख्या बढ़ाकर स्थानीय तह की संख्या घटाने से व्यावहारिकता बढ़ेगी,’’ उन्होंने कहा।
डडेलधुरा के आलिताल गाउँपालिका के अध्यक्ष शेरसिंह पार्की ने तत्काल स्थानीय तह की संख्या और सीमा परिवर्तन आवश्यक नहीं माना। उनके अनुसार, ‘‘विकास, लोगों की पहुंच और भौगोलिक दूरी को ध्यान में रखकर सीमा तुरंत बदलना उचित नहीं है।’’ वे वडाओं की संख्या बढ़ाने के पक्ष में हैं। केवल जनसंख्या देखकर स्थानीय तह की संख्या घटाना या विलय करना उचित नहीं है, उनका मानना है। बझाङ के साइपाल गाउँपालिका के अध्यक्ष महावीर बोहरा भौगोलिक दूरी और विकास स्तर का ध्यान रखते हुए स्थानीय तह की संख्या और सीमा परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर देते हैं। ‘‘यदि केवल जनसंख्या कम होने को आधार बना लिया गया तो जनता को सेवा प्राप्त करने में काफी कठिनाइयाँ उठानी पड़ेंगी,’’ बोहरा ने बताया।
बैतडी के डिलासैनी गाउँपालिका के अध्यक्ष सन्तोषप्रकाश जोशी ने कहा कि स्थानीय तह की संख्या और सीमा परिवर्तन आवश्यक होने पर भी निर्णय जल्दबाज़ी में नहीं लेना चाहिए। ‘‘स्थानीय तहों को भी इस विषय पर पूर्ण चर्चा करनी चाहिए और विशेषज्ञ टीम द्वारा व्यापक विमर्श आवश्यक है,’’ उन्होंने कहा। डडेलधुरा के अजयमेरु गाउँपालिका के अध्यक्ष उमेशप्रसाद भट्ट ने मानदंड के मसौदे पर असहमति जताई। ‘‘स्थानीय तह के प्रमुखों को अध्ययन समिति में शामिल किए बिना संख्या और सीमा परिवर्तन संभव नहीं है,’’ उन्होंने कहा।
दार्चुला के मार्मा गाउँपालिका के अध्यक्ष जमनसिंह धामी ने कहा कि पूर्व में स्थानीय तह की संरचना बनाते समय भूगोल और सीमाओं का मेल न होने की समस्याएँ आईं जिन्हें हल करना आवश्यक है। ‘‘कई जगह पालिका-पालिकाओं के बीच सीमा विवाद हैं। कई बस्तियों को अपने वडा और पालिका कार्यालय से सेवा प्राप्त करने में कठिनाई होती है। इन समस्याओं का समाधान जरूरी है,’’ धामी ने बताया। डोटी के जोरायल गाउँपालिका के अध्यक्ष दुर्गादत्त ओझा ने कहा कि वर्तमान स्थिति में पुनर्संरचना की आवश्यकता नहीं है। ‘‘१० वर्ष भी पूरे नहीं हुए हैं और अभी तक संरचना में कई काम पूरे नहीं हुए हैं। कार्यालय जैसी भौतिक संरचनाओं पर भारी खर्च हो चुका है। शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात जैसी बुनियादी जरूरतों पर अभी पर्याप्त काम बचा है,’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए फिलहाल इस विषय पर बहस करना उपयुक्त नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि कम से कम अगले २० वर्षों तक स्थानीय तह की संख्या और सीमा यथावत रखी जानी चाहिए और विकास कार्यों पर जोर देना चाहिए।





