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क्या प्रधानमंत्री कार्यालय में भी बजट लेखन का काम हो रहा है?

समाचार सारांश

संकलित और संपादकीय समीक्षा की गई।

  • प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के सचिवालय ने आगामी वित्तीय वर्ष २०८३/८४ के नीति, कार्यक्रम एवं बजट सुझावों के लिए एक पोर्टल लॉन्च किया है।
  • अर्थ मंत्रालय ने बजट लेखन के लिए बनाए गए कोर टीम में बदलाव करते हुए नए सहसचिवों को शामिल किया है।
  • प्रधानमंत्री शाह ने सातों प्रदेशों के सांसदों के साथ बजट केंद्रित चर्चा कर सुझाव मांगे हैं, लेकिन संसद में प्री-बजट चर्चा कम हुई है।

२७ वैशाख, काठमांडू – शनिवार को प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के सचिवालय ने प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय के नाम पर एक नया पोर्टल लिंक सार्वजनिक किया।

इस पोर्टल के माध्यम से आगामी वित्तीय वर्ष २०८३/८४ के लिए सरकारी नीति तथा कार्यक्रम और बजट के संबंध में सुझाव मांगे गए हैं।

‘नेपाल सरकार, प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय सुझाव संकलन पोर्टल’ नामक इस पोर्टल पर लिखा है, ‘नेपाल के जनसाधारण की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को शामिल करते हुए बजट, नीति और कार्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया को पारदर्शी, प्रभावी और सहभागितापूर्ण बनाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से सुझाव संकलन पोर्टल जारी किया गया है।’

यह पोर्टल प्रकाशित होने का समय नीति तथा कार्यक्रम लेखन लगभग पूरा हो चुका है। क्योंकि नीति तथा कार्यक्रम अगले सोमवार को राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल द्वारा जारी किया जाना है। इसलिए नागरिकों से प्राप्त सुझावों को नीति तथा कार्यक्रम में शामिल करने की संभावना कम है।

सरकारी छुट्टी के दिनों शनिवार और रविवार को इस पोर्टल पर नागरिकों की भागीदारी अच्छी रही। रविवार शाम तक साढ़े चार बजे तक कुल ६,७०५ सुझाव मिले, जिनमें से ३,३०५ नीति सम्बन्धी और २,२४५ बजट सम्बन्धी सुझाव थे। इससे स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय का यह पोर्टल बजट सुझाव संकलन पर अधिक केंद्रित है।

नीति तथा कार्यक्रम बनाने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालय की होती है, जबकि बजट तैयार करने का कार्य अर्थ मंत्रालय करता है, जिसके लिए बजट लेखन के लिए एक समर्पित टीम बनाई जाती है।

प्रधानमंत्री कार्यालय भवन

बजट संबंधी सुझाव संकलन, बजट पूर्व चर्चा और सुझावों के संग्रह में अर्थ मंत्री स्वयं सक्रिय होते हैं। वर्तमान अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले भी इस प्रक्रिया में सीधे जुड़े हुए हैं।

पहले जहां सरकार बजट के लिए नागरिकों से सुझाव मांगती थी, वह कार्य केवल अर्थ मंत्रालय तक सीमित था। लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा बजट लक्षित सुझाव संकलन की यह पहल पहली बार देखने को मिली है। यह संकेत करता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय बजट लेखन में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

कई अर्थ मंत्रालय के अधिकारी भी इस पहल को लेकर असमंजस में हैं। मंत्रालय के एक अनाम अधिकारी ने कहा, ‘अभी भी अर्थ मंत्रालय सुझाव ले रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय के बजट सुझाव संकलन की खबर देखकर पता चला। संभवतः इन सुझावों को एक साथ अर्थ मंत्रालय को भेजा जाएगा।’

सरकारी हलकों में लंबे समय से कहा जाता रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय बजट तैयारी का समानांतर काम कर रहा है। हालांकि अर्थ मंत्रालय के बाहर बजट लेखन का कोई प्रचलन नहीं था, इसलिए इसे अफवाह ही माना जाता था। लेकिन प्रमुख सचिव ने बजट सुझाव मांगने के बाद यह आशंका और मजबूत हुई है।

‘प्रधानमंत्री कार्यालय बजट वक्तव्य लेखन नहीं करता, लेकिन योजना बनाने, नीतिगत निर्णय लेने जैसे कई कार्यों में सक्रिय दिखाई देता है,’ एक संबंधित स्रोत ने बताया।

अर्थमंत्री के निकट एक सूत्र के अनुसार, पोर्टल प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी किए जाने के बावजूद, इसमें आने वाले सुझावों को अर्थमंत्री भी देख सकते हैं।

बजट लेखन और सभी संबंधित प्रक्रियाएं अर्थमंत्री के नेतृत्व में ही हो रही हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। ‘बहुत अच्छा बजट बन रहा है, जो मंत्री जी के नेतृत्व में तैयार हो रहा है,’ अर्थमंत्री के निकट एक स्रोत ने कहा।

उन्होंने इस पहल को सरकार द्वारा जनता से सुझाव लेने का एक नया दृष्टिकोण बताया।

बजट लेखन टीम में बदलाव

एक महीने पहले गठित हुई अर्थ मंत्रालय की कोर टीम में पुनः बदलाव किया गया है। मंत्रिपरिषद ने सहसचिवों का तबादला किया, जिससे टीम के सदस्य भी बदल गए। नई टीम का पुनः गठन कर काम जारी है।

अर्थ मंत्रालय भवन

पहले सहसचिव उत्तरकुमार खत्री, डॉ. सुमन दाहाल, डॉ. धनिराम शर्मा, महेश भट्टराई और सेवन्तक पोखरेल को बजट लेखन टीम में रखा गया था। भट्टराई और पोखरेल के प्रदेशों में स्थानांतरण के बाद उनकी जगह सहसचिव अमृत लम्साल और टंकप्रसाद पाण्डेय को टीम में जोड़ा गया है।

सरकार की जल्दबाजी में कोर टीम के सदस्यों का तबादला करने से बजट लेखन में समन्वय की कमी हो सकती है, ऐसा मंत्री के समीप एक अधिकारी ने बताया।

सांसदों से भी प्रधानमंत्री ने मांगे बजट सुझाव

संविधान के अनुसार, संघीय सरकार को १५ जेठ तक आगामी वित्तीय वर्ष का बजट पेश करना होता है। बजट की तैयारी मंसिर माह से शुरू होती है। मध्यकालीन खर्च संरचना और राष्ट्रीय स्रोत अनुमान समिति माघ के अंत तक बजट सीमा निर्धारित करती है।

फिर औपचारिक बजट लेखन शुरू होता है। राष्ट्रीय योजना आयोग ७ फागुन तक योजना और स्रोत पर मार्गदर्शन अर्थमंत्री को देता है। जनवरी में अर्थ मंत्रालय बजट सीमांकन और तर्जुमा संबंधी निर्देश अन्य विभागों को भेजता है।

इसके अलावा राजस्व समिति राजस्व नीति और दर संबंधी सुझाव इकट्ठा करती रहती है। संसद की अर्थ समिति भी बजट सुझाव के लिए प्री-बजट चर्चा आयोजित करती है।

लेकिन इस बार माहौल अलग है। प्रधानमंत्री शाह ने पिछले चैत के तीसरे सप्ताह से सिंहदरबार में सातों प्रदेशों के सांसदों के साथ बजट केंद्रित चर्चा की और नीति तथा कार्यक्रम में शामिल करने के लिए सुझाव मांगे।

उसी चर्चा के आधार पर सरकार १०० बिंदुओं वाले विवरण को लागू करना और बजट निर्माण को केंद्रित करना चाहती है। प्रधानमंत्री शाह के सचिवालय ने भी इसी समय इसे सार्वजनिक किया था।

‘सरकार के बजट में प्रधानमंत्री की रुचि और नीति निर्देशन होना स्वाभाविक है, इसलिए सचिवालय ने सुझाव मांगा होगा। लेकिन इसे बजट लेखन में समानांतर कार्य समझना गलत होगा,’ अर्थ मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा।

सांसदों के साथ संसद में प्री-बजट चर्चा कम हुई

पहले संसद में प्री-बजट चर्चा को प्रतिनिधि अधिक महत्व देते थे, लेकिन इस बार बड़े दल और मजबूत सरकार के कारण प्री-बजट चर्चा को कम तवज्जो मिली है। सरकार ने चर्चा कम करके बजट अधिवेशन बुलाया है।

सांसदों की शिकायतें भी कम हैं। इसके बजाय मंत्री सांसदों के समूह से चर्चा कर रहे हैं।

अर्थमंत्री डॉ. वाग्ले, भौतिक पूर्वाधार मंत्री सुनिल लम्साल, पर्यटन मंत्री खड्गराज पौडेल, संचार तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. विक्रम तिमिल्सिना ने राष्ट्रीय जनता पार्टी के सांसदों से प्री-बजट चर्चा की हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड की सरकार ने २०७९ फागुन में आर्थिक कार्यविधि और वित्तीय उत्तरदायित्व अधिनियम २०७६ में संशोधन कर प्री-बजट चर्चा फागुन के महीने में संसद में प्रस्तुत करने की व्यवस्था की थी।

लेकिन केपी शर्मा ओली की सरकार ने इसे वापस ले लिया और बजट प्रकाशित होने से १५ दिन पहले प्रस्तुत करने की व्यवस्था की। इस बार भी वैसा ही होगा।