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रानी नाका से नेपाल प्रवेश के लिए परिचयपत्र अनिवार्य, सुरक्षा कड़ी

विराटनगर के रानी नाका पर नेपाल में प्रवेश के लिए परिचयपत्र अनिवार्य कर दिया गया है और सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। कोशी प्रदेश के पुलिस प्रमुख डिआइजी विनोद घिमिरे ने सीमा क्षेत्र में उच्च सतर्कता बरतने की जानकारी दी है। प्रमुख जिल्ला अधिकारी युवराज कट्टेल ने अवैध घुसपैठ और गैरकानूनी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए परिचयपत्र अनिवार्य किए जाने की पुष्टि की है। (२९ वैशाख, विराटनगर)

स्थानीय प्रशासन ने विराटनगर के रानी नाका के माध्यम से नेपाल प्रवेश पर सख्ती बढ़ाई है। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद जोगवनी होते हुए विराटनगर में प्रवेश करने वाली इस सीमा नाका पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पूर्वी सीमा नाका काकडभिट्टामा तो पहले से ही परिचयपत्र अनिवार्य है।

कोशी प्रदेश के पुलिस प्रमुख डिआइजी विनोद घिमिरे के अनुसार, भारत से लगे सभी सीमा क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई गई है। उनका कहना है कि रोहिंग्या शरणार्थियों के नेपाल प्रवेश करने की आशंका के कारण सीमा पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। ‘‘सीमा क्षेत्र में मौजूद सभी पुलिस इकाइयों ने सतर्कता बढ़ा दी है,’’ उन्होंने कहा, ‘‘नेपाल में प्रवेश के लिए परिचयपत्र अनिवार्य कर दिया गया है।’’

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के १५ वर्षों के शासन के बाद भाजपाके शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने हैं। अधिकारी कट्टर हिंदूवादी नेता माने जाते हैं। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद म्यांमार से बांग्लादेश होते हुए पश्चिम बंगाल में शरण लिए हुए रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों को छोड़ रहे हैं, जिससे उनके नेपाल प्रवेश करने की संभावना बढ़ गई है, इसलिए नाका पर सुरक्षा कड़ी की गई है।

पुलिस मुख्यालय ने भारत से लगी सभी जिलों में सतर्कता बरतने के लिए सर्कुलर जारी किया है। नाके पर तैनात सुरक्षा कर्मी नेपाल प्रवेश करने वालों से उनके आने के कारण भी पूछताछ कर रहे हैं। नाके पर सशस्त्र पुलिस और जनपद पुलिस की संयुक्त टुकड़ी तैनात की गई है। सुरक्षा जांच के लिए प्रशिक्षित कुत्ते भी तैनात किए गए हैं।

कोलकाता से हर तीन दिन पर ट्रेन जोगवनी तक आती है। रेल और सड़क मार्ग से पश्चिम बंगाल में बसे रोहिंग्या शरणार्थी नेपाल में प्रवेश करने की संभावना के कारण नाका पर कड़ी निगरानी की जा रही है, पुलिस ने बताया। प्रमुख जिल्ला अधिकारी युवराज कट्टेल ने कहा, ‘‘सीमा सुरक्षा हमारी नियमित जिम्मेदारी है, सीमा क्षेत्र में हो सकने वाली अवांछित गतिविधियों और भारतीय बाजार पर निर्भरता की प्रवृत्ति को रोकने के लिए कड़ाई की गई है। मोरङ जिले के सभी नाकों पर परिचयपत्र अनिवार्य किया गया है।’’