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एमाले ने अपनी अभिव्यक्ति में सुधार किया, बादल ने फिर दोहराई

समाचार सारांश

  • एमाले संसदीय दल के नेता रामबहादुर थापाले संसद के नीति तथा कार्यक्रम पर फिर से प्रश्न उठाकर पुनर्लेखन का सुझाव दिया है।
  • थापाले नेपाली सेना की भूमिका और लिपुलेक अतिक्रमण को लेकर सवाल उठाए तथा सरकार की मौनता की आलोचना की।
  • संसद में थापाकी अभिव्यक्ति पर रास्वपा और राप्रपा के सांसदों ने आपत्ति जताई और अभिलेख से हटाने की मांग की है।

२९ वैशाख, काठमाडौं। संसद के पिछले सत्र में सेना को लेकर विवादित अभिव्यक्ति देने वाले एमाले संसदीय दल के नेता रामबहादुर थापा ने इस सत्र में भी उसी प्रकार की विचारधारा सार्वजनिक की है।

सरकार के नीति तथा कार्यक्रम पर चर्चा में हिस्सा लेने के लिए मंगलवार को प्रतिनिधि सभा के रोस्टम पर खड़े हुए थापा ने सेना के विषय में भी अभिव्यक्ति दी।

‘जब देश बर्बाद हो रहा था और अपने ही सर्वोच्च कमांडर के मुख्यालय पर हमला हुआ था, तो नेपाली सेना, देश के प्रमुख रक्षक, रहस्यमय तरीके से क्यों चुप रही?’ थापा ने मंगलवार को प्रतिनिधि सभा में प्रश्न उठाया, ‘लिपुलेक में अतिक्रमण के समय नजदीकियों को भेदे बगैर सेना परेड खेल रही थी?’

उन्होंने सरकार के नीति तथा कार्यक्रम को निरस्त करने योग्य बताया और पुनर्लेखन करने की सलाह दी। ‘सौ बिंदुओं वाला नीति तथा कार्यक्रम उस कथित सौ बिंदु के वचनपत्र का नया संस्करण और निरंतरता है। इसलिए राष्ट्र को असाधारण संकट से बचाने के लिए इसे निरस्त कर पुनर्लेखन करना चाहिए,’ उन्होंने कहा।

देश में अकेले शासन चलाने की योजना बनाए जाने में रास्वपा को शामिल बताकर थापा ने नीति तथा कार्यक्रम में न सम्मिलित कुछ प्रश्न भी उठाए। थापा के संबोधन के दौरान सांसदों का विरोध होने पर एमाले भी झुका हुआ नजर आया।

थापा ने रास्वपा के उदय, जनयुद्ध के दौरान देखे गए दृश्य और नेपाली सेना को लेकर प्रश्न उठाए। खासकर सेना को लेकर किया गया प्रश्न ज्यादा महत्व मिला है।

एमाले के उपाध्यक्ष थापा ने नीति तथा कार्यक्रम के मुख्य विषयों की जगह सेना, जनयुद्ध के अग्रणी और रास्वपा को प्राथमिकता देते हुए टिप्पणी की।

‘राष्ट्रिय ध्वज ओढ़कर देश जलाने वाले देशद्रोही के प्रति यह नीति तथा कार्यक्रम चौंकाने वाले तरीके से क्यों मौन है?’ सांसदों के विरोध के बीच उन्होंने सवाल किया, ‘असंगत नीति का मजाक उड़ाते हुए सशस्त्र समूहों के नृत्य पर यह नीति तथा सरकार क्यों चुप हैं?’

रास्वपा पर अराजक भीड़ कहने की टिप्पणी पर सांसद मनिष खनाल ने बादल के भाषण के दौरान आपत्ति जताई। सभापति डीपी अर्याल के आग्रह पर बादल से पूरी बात कहने की अनुमति दी गई। इसके बाद बोलने का मौका पाये रास्वपा सांसद खनाल ने सेना की मर्यादा और चुनाव में जनता के दिए मत को स्वीकार करने की अपील की।

‘आपने नेपाली सेना को विवाद में लाने वाले बयान दिए हैं,’ खनाल ने कहा, ‘चुनाव में जनता द्वारा निर्वाचित का अपमान करने वाले अराजकतत्व को भीड़ कहना उचित नहीं। मैंने आपकी पूरी अभिव्यक्ति को अभिलेख से हटाने की मांग करता हूं।’

मनिष खनाल जैसे ही, राप्रपा की सांसद खुश्बू ओली ने भी विरोध जताया। ‘नेपाली सेना सम्बन्धी टिप्पणी केवल संस्था की आलोचना नहीं, राष्ट्रीय मनोबल पर हमला है,’ ओली ने कहा, ‘और यह निरंतर जारी है। इसके लिए खेद व्यक्त करना चाहता हूँ। ऐसी अभिव्यक्तियों को संसद के अभिलेख से हटाने की मांग करता हूँ।’

संसद के भीतर विरोध झेल रहे बादल से पत्रकारों ने भी विपरीत सवाल किए। वे जब गेट के बाहर आए तो उनसे पूछा गया, ‘यदि ओली की वजह से यह स्थिति आई है, तो आपकी वजह से क्या एमाले जमीन में समा जाएगा?’

बादल ने कहा– ‘मेरे कारण से एमाले और भी उठेगा।’

हालांकि आज उठाया गया एजेंडा पहले भी विवादित रहा था।

१९ चैत को प्रतिनिधि सभा की बैठक में भी एमाले संसदीय दल के नेता के रूप में इसी तरह के अभिव्यक्ति व्यक्त किए गए थे।

२१ फागुन को हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव में सेना, कर्मचारी, सुशीला कार्की नेतृत्व वाली सरकार और विदेशी ताकतों के भी एमालेलाई हराने के लिए जुटे होने का निष्कर्ष निकाला गया था।

इस निष्कर्ष पर एमाले पदाधिकारियों ने सार्वजनिक विरोध जताया था। उपाध्यक्ष विष्णुप्रसाद पौडेल और उपमहासचिव योगेश भट्टराई ने बादल द्वारा व्यक्त निष्कर्ष को अस्वीकार किया था।

नेताओं के विरोध के बाद २० चैत को एमाले सचिवालय की बैठक हुई। अध्यक्ष केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के कारण वह बैठक बादल की अध्यक्षता में हुई। उस बैठक में बादल की अभिव्यक्ति सुधारने का निर्णय लिया गया।

छ घंटे की चर्चा के बाद संसद में बादल द्वारा दिए गए निष्कर्ष को सुधारने और शीघ्र चुनाव समीक्षा बैठक आयोजित करने का निर्णय हुआ था।

हालांकि अब तक चुनाव हार की समीक्षा के लिए एमाले की कोई बैठक नहीं हुई। सर्वोच्च अदालत के आदेश पर रिहा हुए ओली स्वास्थ्य कारणों से आराम कर रहे हैं। उपाध्यक्ष विष्णुप्रसाद पौडेल, महासचिव शंकर पोखरेल समेत कई नेता उन्हें बैठक बुलाने के लिए दबाव बना रहे हैं।

ओली बैठक करने के इच्छुक नहीं हैं, लेकिन ओली के साथ खड़ा नेता बादल पार्टी के औपचारिक निर्णय के तहत पहले किया गया सुधार अब पुनः संसदीय दल के रूप में उठा रहे हैं।

एमाले के एक नेता का कहना है कि बादल की इस स्थिति को गहराई से समझना होगा। ‘एमाले के अंदर की लड़ाई में बादल ओली का समर्थन कर रहे हैं और पिछले समय में ओली के साथ काम करने वाले नेताओं से पुनर्गठन के सन्दर्भ में बात कर रहे हैं,’ उन्होंने कहा, ‘आज बादल की अभिव्यक्ति उस संघर्ष का प्रतिफल है।’

चैत के अंतिम सप्ताह पोखरा दौरे के दौरान बादल ने इसी प्रकार का संकेत दिया था। १९ चैत की सचिवालय बैठक में उन्होंने पार्टी लाइन के अनुसार बातें कही थीं और विरोध करने वाले नेताओं को दक्षिणपंथी कहा था। मतलब ओली की मंशा के अनुसार थापा की संसद में की तुलना में सचिवालय बैठक ने सुधार किया था।

लेकिन थापा ने आज संसद की बैठक में वही एजेंडा फिर से उठाया जिसे पहले एमाले ने सुधार चुका है।