
सम्पत्ति जाँचबुझ आयोग का कार्यालय स्थित केशरमहल।
समाचार सारांश
संपादकीय समीक्षा।
- सम्पत्ति जाँचबुझ आयोग ने केशरमहल में कार्यालय स्थापित कर पहले चरण में सहसचिव स्तर तक के कर्मचारियों की सम्पत्ति विवरण संकलन शुरू किया है।
- आयोग ने अपनी वेबसाइट के माध्यम से ही विवरण संकलन की तैयारी की है।
- आयोग के अध्यक्ष राजेन्द्रकुमार भण्डारी ने कहा कि छानबिन के बाद यदि कैफियत मिलेगी तो विवरण सरकार को भेजा जाएगा और आवश्यक होने पर अख्तियार को अनुसन्धान हेतु सिफारिश की जाएगी।
२९ वैशाख, काठमांडू। नारायणहिटी दरबार संग्रहालय के पास केशरमहल में कार्यालय स्थापित करने वाले सम्पत्ति जाँचबुझ आयोग ने जाँचबुझ के दायरे में आने वाले कर्मचारियों की सम्पत्ति विवरण संकलन का काम शुरू कर दिया है। आयोग ने अपनी वेबसाइट तैयार करके उसी पर छानबिन में आने वाले व्यक्तियों से सम्पत्ति विवरण संग्रहित करने की योजना बनाई है।
सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और आयोग के अध्यक्ष राजेन्द्रकुमार भण्डारी ने बताया, ‘छानबिन में शामिल व्यक्तियों को आयोग की वेबसाइट पर अपना सम्पत्ति विवरण प्रस्तुत करने की व्यवस्था की जा रही है।’
राष्ट्रपति और पूर्व राष्ट्रपति, न्यायाधीश और सैन्य अधिकारी को छोड़कर आयोग को सहसचिव स्तर तक के अधिकारियों की सम्पत्ति जाँचने का कार्यादेश दिया गया है। आयोग ने शुरुआत में वर्ष २०८३ से लेकर वर्ष २०६२/६३ तक के सार्वजनिक पदाधिकारियों की सम्पत्ति की जाँचबुझ करने का निर्णय लिया है।
पूर्व में शिक्षा मंत्रालय और केशर पुस्तकालय के रूप में प्रयुक्त केशरमहल से शिक्षा मंत्रालय पहले ही स्थानांतरित हो चुका है। वर्तमान में वहाँ केशर पुस्तकालय और सार्वजनिक खरीद अनुगमन कार्यालय मौजूद हैं। खरीद अनुगमन कार्यालय के एक हिस्से को खाली कर आयोग ने अपने कार्यालय की स्थापना की है।
अब तक आयोग के पाँच सदस्य नियमित रूप से कार्यालय आते हैं, जबकि प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय ने इनके लिए एक शाखा अधिकारी, एक नासु तथा अन्य सहायक कर्मचारी नियुक्त किए हैं। न्याय सेवा के सहसचिव जो प्रशासनिक नेतृत्व संभालेंगे, अभी तक नियुक्त नहीं हुए हैं। आयोग को कुल मिलाकर करीब ४० कर्मचारी मिलने की व्यवस्था है।
दो चरणों में सम्पत्ति की जाँचबुझ करने वाला आयोग पहले चरण के बाद वर्ष २०६२/६३ से पहले वर्ष २०४८ तक के सार्वजनिक पदाधिकारियों की सम्पत्ति जांचेगा। भ्रष्टाचार के आरोपित और जिनके खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं, उनकी भी जाँचबुझ होगी, अध्यक्ष भण्डारी ने बताया।
अध्यक्ष भण्डारी ने कहा, ‘आयोग सम्पत्ति विवरणों की श्रंखला बद्ध जाँच करता है और यदि कैफियत मिलती है तो वह उसे नेपाल सरकार को भेजता है। यह विवरण अत्यंत गोपनीय रहता है तथा यदि अख्तियार को ट्रांसफर कर जांच में मुकदमा चलाने के योग्यता पाए जाते हैं तो तभी संबंधित व्यक्तियों की जानकारी सार्वजनिक होती है।’
परंपरागत फॉर्म के जरिए जानकारी संग्रह कठिन होने के कारण आयोग पदाधिकारी वेबसाइट के माध्यम से विवरण संकलन और विश्लेषण की योजना बना रहे हैं। यदि संभव हुआ तो संपत्ति विश्लेषण हेतु सॉफ़्टवेयर भी विकसित किया जा सकता है, हालांकि समय की कमी के कारण यह कठिन दिख रहा है।
राजपत्र में प्रकाशित निर्देशानुसार, सहसचिव स्तर तक के कर्मचारियों और कार्यालय प्रमुखों के अधीन कर्मचारियों की सम्पत्ति भी जांच का दायरा होगा। अध्यक्ष भण्डारी ने कहा, ‘यदि शिकायत आई तो किसी भी स्तर के व्यक्ति के खिलाफ जांच हो सकती है। अगर किसी की सम्पत्ति छुपाने का आरोप सत्यान्वेषण से पता चलता है तो उन व्यक्तियों के खिलाफ भी जांच होगी।’
दो चरणों में सम्पत्ति जांचने वाला आयोग पहले चरण के बाद ही वर्ष २०६२/६३ से पूर्व २०४८ तक के सार्वजनिक पदाधिकारियों की सम्पत्ति की जांच करेगा। भ्रष्टाचार के आरोपित तथा मुकदमाधीन व्यक्तियों की भी जांच होगी, वे भी अध्यक्ष भण्डारी के अनुसार।
उनके अनुसार, यदि उस दौर के मुकदमाधीन व्यक्तियों से अधिक सम्पत्ति पाई गई तो आयोग सरकार के माध्यम से अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग को पत्राचार करेगा। इसके बाद की जांच अख्तियार के अधिकार क्षेत्र में होगी।
सरकार ने २ बैशाख २०८३ को सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्रकुमार भण्डारी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय आयोग गठित किया था। आयोग में पुनरावेदन अदालत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पुरुषोत्तम पराजुली, उच्च अदालत के पूर्व न्यायाधीश चण्डीराज ढकाल, पूर्व पुलिस उपमहानिरीक्षक गणेश केसी और चार्टर्ड एकाउंटेंट प्रकाश लम्साल सदस्य हैं।
एक वर्ष की अवधि वाले आयोग को सार्वजनिक पदाधिकारियों की सम्पत्ति की जाँचबुझ कर यदि कोई अनियमितता मिलती है तो तत्काल सरकार को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। आयोग अपने कार्य पूर्ण होने पर सरकार को अंतिम रिपोर्ट सौंपेगा।





