
समाचार सारांश
समीक्षा पश्चात् तैयार किया गया।
- राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी ने सार्वजनिक पद संभालने से पहले अपनी संपत्ति विवरण सार्वजनिक करने का चुनावी वादा किया था।
- अब तक १८२ रास्वपा सांसदों में से केवल ५८ सांसदों ने ही संघीय संसद सचिवालय में अपनी संपत्ति विवरण जमा की है।
- संसद सचिवालय ने सांसदों को जेठ १० तक संपत्ति विवरण जमा करने का नोटिस जारी किया है।
२९ वैशाख, काठमाडौं। भ्रष्टाचार निवारण ऐन और अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ऐन के अनुसार सार्वजनिक पद पर नियुक्त व्यक्ति को ६० दिनों के भीतर अपनी संपत्ति का विवरण संबंधित कार्यालय में जमा करना होता है।
लेकिन राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी ने कानूनी व्यवस्था से आगे बढ़कर, सार्वजनिक पद संभालने से पहले ही अपनी संपत्ति विवरण सार्वजनिक करने का चुनावी वादा किया था।
२१ फागुन के चुनाव के लिए रास्वपा द्वारा प्रस्तुत १०० बिंदुओं के वचनपत्र के बिंदु संख्या १६ में यह प्रतिबद्धता दर्ज है: ‘सार्वजनिक पद संभालने से पहले हम अपनी संपत्ति विवरण पूर्ण रूप से सार्वजनिक करेंगे।’
चुनाव से पहले और कार्यकाल पूरा होने पर अपनी और परिवार की संपत्ति में आए परिवर्तनों का स्वतंत्र लेखापरीक्षण कराकर उसे जनता के सामने प्रस्तुत करने का भी यह वचनपत्र में उल्लेख है।
इन वादों के कारण रास्वपाने दो सीटें कम होकर भी दो-तिहाई मत लेकर सरकार गठित कर ली है। प्रतिनिधि सभा और उसके अंतर्गत विषयगत समितियाँ भी बन चुकी हैं।
हालांकि, सार्वजनिक पद संभालने से पहले अपनी संपत्ति विवरण सार्वजनिक करने की प्रतिबद्धता के अनुसार रास्वपा के सांसदों ने अब तक अपनी संपत्ति का विवरण सार्वजनिक नहीं किया है।
संघीय संसद सचिवालय के सांसद सुविधा शाखा के अनुसार, केवल ५८ सांसदों ने ही अपनी संपत्ति विवरण जमा करवाई है जो सचिवालय के सांसद सुविधा शाखा में रखी गई है।
प्रतिनिधि सभा में रास्वपा के १८२ सांसद हैं। इसके अलावा नेपाली कांग्रेस के ३८, नेकपा एमाले के २५, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के १७, श्रम संस्कृति पार्टी के ७, राप्रपा के ५ और एक स्वतंत्र सांसद हैं। इनमें से केवल ५८ सांसदों ने ही संपत्ति विवरण जमा किया है।
सांसदों के पास संपत्ति विवरण जमा करने का समय अभी बाकी है। संघीय संसद सचिवालय की सांसद सुविधा शाखा ने जेठ १० तक संपत्ति विवरण जमा करने का सूचना जारी किया है।
भ्रष्टाचार निवारण ऐन २०५९ की धारा ५० की उपधारा (१) और अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ऐन २०४८ की धारा ३१ क की उपधारा (१) के अनुसार सार्वजनिक पद पर नियुक्त व्यक्ति को अपनी संपत्ति विवरण प्रस्तुत करना जरूरी है।
दोनों कानूनों के अनुसार सार्वजनिक पद पर नियुक्त होने की तिथि से ६० दिनों के अंदर अपनी और परिवार की नामित संपत्ति का स्रोत सहित अद्यतन विवरण संबंधित निकाय या अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य है। संसद सचिवालय ने भी इसी अनुरूप संपत्ति विवरण प्रस्तुत करने का आग्रह किया है।
इस प्रकार है रास्वपा का वचनपत्र





