‘नेपाल और बांग्लादेश में सरकार बदलकर दिखा चुके हैं, यहाँ मंत्री तक नहीं बदल पाते?’

३० वैशाख, काठमाडौँ। आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को भारत के युवा पीढ़ी से राष्ट्रीय योग्यता प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र चुहावट मामले में जवाबदेही की मांग की। उन्होंने युवाओं में राजनीतिक बदलाव करने की शक्ति होने का जिक्र करते हुए नेपाल और बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के उदाहरण पेश किए। पत्रकार सम्मेलन में बोलते हुए केजरीवाल ने कहा कि परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों का आत्मविश्वास इस प्रकार लगातार हो रही प्रश्नपत्र चुहावट की घटनाओं से कमजोर हुआ है। उन्होंने युवाओं से इस मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ सड़क पर उतरने की अपील की।
‘अगर बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों के युवा सरकार बदल सकते हैं, तो भारतीय युवा भी प्रश्नपत्र चुहावट की घटनाओं में जवाबदेही सुनिश्चित कर सकते हैं,’ उन्होंने कहा। केजरीवाल ने पूर्व में केंद्रीय अनुसन्धान ब्यूरो (CBI) की जांचों की प्रभावकारिता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि दोषियों को कभी कड़ी सजा मिली है या नहीं। ‘२०१४ में मोदी सरकार के बाद परीक्षाओं के प्रश्नपत्र चुहावट की ९३ घटनाएँ हुई हैं। ज्यादातर घटनाएं उन राज्यों में हुई हैं जहां बीजेपी की सरकार है,’ केजरीवाल ने ज़ोर दिया, ‘इससे ६ करोड़ युवाओं का नुकसान हुआ है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में ऐसी घटनाएं अधिक हुई हैं। ये राज्य और केंद्र में बीजेपी सरकार होना कोई संयोग नहीं है।’
केजरीवाल ने हाल ही में प्रश्नपत्रों के लीक होने की घटनाओं का केंद्र राजस्थान होने के कारण यहाँ नेताओं के शामिल होने की भी आशंका जताई। ‘अगर ऐसा है तो केंद्रीय अनुसन्धान ब्यूरो क्या कर सकता है? मैं युवा वर्ग से पूछना चाहता हूँ, क्या यह चलने देना सही है?’ केजरीवाल ने कहा। उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश के आंदोलनों का उदाहरण देते हुए युवाओं से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का अनुरोध किया। ‘अगर नेपाल और बांग्लादेश के युवा सड़कों पर उतरकर सरकार बदल सकते हैं, तो क्या हमारे युवा प्रश्नपत्र चुहावट में शामिल मंत्रियों को जेल नहीं भेज सकते? मुझे आप पर पूरा भरोसा है,’ उन्होंने कहा। ‘जिन लोगों की संलिप्तता पाई जाती है, उन्हें दोषी ठहराओ, जेल भेजो, सड़कों पर उतरो, विरोध करो और इस घृणित खेल को बंद कराओ।’ केजरीवाल ने इस मामले में हो रही केंद्रीय अनुसन्धान ब्यूरो की जांच पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि इससे कोई सार्थक परिणाम नहीं निकलेगा। ‘पहले की चुनाव प्रश्नपत्र चुहावट घटनाओं में ब्यूरो कुछ कर नहीं सका है,’ उन्होंने कहा। 2014 के बाद हुई विभिन्न परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र चुहावट के घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनका नतीजा देश के करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है।





