प्रदीप पौडेल ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के कार्यकाल से संसदीय व्यवस्था में आई कमजोरी पर दी टिप्पणी

३० वैशाख, काठमाडौं। नेपाली कांग्रेस के महामंत्री प्रदीप पौडेल ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) के डेढ़ महीने के कार्यकाल को नेपाली संसदीय व्यवस्था को कमजोर करने वाला बताया है। उन्होंने बुधवार को फेसबुक पर ‘सार्वभौम संसद के हुर्मत, लोकतंत्र पर निर्मम प्रहार’ शीर्षक से यह टिप्पणी की।
‘प्रधानमंत्री के पिछले डेढ़ महीने के कार्यकाल ने संसदीय व्यवस्था और लोकतांत्रिक जवाबदेही को और भी कमजोर कर दिया है,’ महामंत्री पौडेल ने लिखा, ‘सुविधाजनक बहुमत होने के बावजूद संसद को छल कर अध्यादेश लाना, नियमावली के माध्यम से मूल कानून का उल्लंघन करना, सम्माननीय राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तुत सरकार की नीति तथा कार्यक्रम का बहिष्कार करना और सांसदों को जवाब देने के लिए संसद में उपस्थित न होना सामान्य पदीय कमजोरी नहीं है।’
उन्होंने बताया कि ऐसे क्रमबद्ध घटनाक्रम स्थापित संसदीय अभ्यास, संवैधानिक व्यवस्था और लोकतंत्र पर किया गया निर्मम प्रहार हैं। ‘सामान्य नागरिक और संपूर्ण राज्य को इस तरह हल्के में लेकर कार्यपालिका द्वारा दिखाया गया व्यवहार अत्यंत गैरजिम्मेदाराना है,’ उन्होंने कहा।
पौडेल ने कहा कि नागरिकों के प्रतिनिधि सर्वोच्च स्थल संसद से चुने गए प्रमुख जब अपनी न्यूनतम जिम्मेदारी भी निभाने में असमर्थ होते हैं, तो राज्य की जवाबदेही और कमजोर हो जाती है। ‘व्यक्तिगत स्वभाव जो भी हो, सार्वजनिक पद पर कार्यरत व्यक्ति को राज्य द्वारा निर्धारित मर्यादा और अनुशासन का पालन करना चाहिए,’ उन्होंने लिखा, ‘स्थापित विधि, प्रोटोकॉल और आचार संहिता का उल्लंघन कर स्वतःस्फूर्त व्यवहार करना पदीय गरिमा की चरम अवमूल्यन है।’
प्रधानमंत्री बालेन के इस तरह के व्यवहार से देश की संपूर्ण राजनीति को दुर्घटना की ओर धकेलने की संभावना बढ़ गई है, उन्होंने कहा। ‘राज्य की न्यूनतम मूल्यमान्यताओं की अवहेलना करते हुए सार्वभौम संसद के हुर्मत लेने के कार्य लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए कभी स्वीकार्य नहीं हो सकते,’ पौडेल ने अपने बयान के अंतिम में लिखा।





