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संसद नजदीक होते हुए भी प्रधानमंत्री बालेन क्यों दूर हैं?

२०७९ साल के चुनाव में काठमाडौँ के मेयर बनने के बाद बालेन ने युवा वर्ग में राजनीति के प्रति रुचि जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूर्वप्रधानमंत्री प्रचण्ड ने संसद में बालेन को संख्या की बहुमत पर अत्यधिक गर्व न करने और विश्वास तथा सहयोग को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री बालेन ने संसदीय मर्यादा और संवाद की कमी के कारण युवाओं में निराशा बढ़ने और लोकतंत्र में संवाद का आवश्यक होने की बात कही। नेपाली राजनीति ने लंबे समय से युवाओं को देशविहीन बना दिया है। राजनीति में भ्रष्टाचार और बिगड़ती प्रथाओं ने उद्यम और रोजगार की कमी पैदा की है। इससे युवाओं के रोजगार की तलाश में विदेश जाने की संख्या बढ़ी है, वहीं २०४८/५० साल के कांग्रेस-कम्युनिस्ट द्वंद्व ने राजनीति के प्रति चरम वितृष्णा को बढ़ावा दिया है।

इसने एक मनोविज्ञान को जन्म दिया जिसने पार्टी सदस्यता लेने से रोक लगाई और राजनीति को एक गंदा खेल मानना शुरू कर दिया। इससे नई पीढ़ी की राजनीति में भागीदारी लगभग समाप्त हो गई। राजनीतिक नर्सरी में पौधों से अधिक झाड़ियां उग आईं। पहली पीढ़ी इतिहास के बोझ को सहते हुए सत्ता की लालच में डूब गई। दूसरी पीढ़ी ने पहली पीढ़ी की आलोचना करते हुए खुद को झाड़ के रूप में प्रस्तुत किया। सवाल मर गए, विद्रोह के बीज अंकुरित हुए। तीसरी पीढ़ी भी दूसरी पीढ़ी की पिछली कतार में सीमित रही। इसी पृष्ठभूमि में जेनरेशन जेड को विद्रोह का नेतृत्व करना पड़ा। वहीं अवसर की तलाश में नई पार्टी के नेताओं ने नई तरह के गठबंधन बनाए। बालेन उसी परिप्रेक्ष्य में भाग्यशाली बने।

बालेन ने पृष्ठभूमि में कुछ काम और तैयारी की थी। २०७९ के चुनाव में काठमाडौँ के मेयर बनकर उन्होंने एक अभूतपूर्व लहर अपने साथ लाई। ‘मुझे राजनीति में दिलचस्पी नहीं है’ कहने पर भी युवाओं ने राजनीति के विषय में गहराई से सवाल और रूचि दिखानी शुरू कर दी। समग्र नेपाली राजनीति को आगे बढ़ाना और युवाओं को व्यवस्था के प्रति आशावादी बनाना उनका योगदान कम नहीं था। भदौ महीने में विश्वव्यापी मीडिया में नेपाल की राजनीतिक समीक्षा होने पर एक नया आयाम जुड़ा। परंपरागत रास्ते से बिलकुल अलग पृष्ठभूमि से आए व्यक्ति भी सीधे सत्ता के नेतृत्व तक पहुंच सकते हैं, यह संदेश विश्व भर में फैला। इससे नेपाल के बाहर भी प्रभाव पड़ा। भदौ से विश्वव्यापी मीडिया में नेपाल की राजनीति का व्यापक प्रचार-प्रसार हुआ। मुख्य संदेश था: ‘गैरपरंपरागत मार्ग से आए व्यक्ति भी मेयर या प्रधानमंत्री बन सकते हैं।’

डोनाल्ड ट्रम्प, शी जिनपिंग, नरेन्द्र मोदी, व्लादिमीर पुटिन जैसे ‘स्ट्रांग मैन’ के युग में यह एक पूरी तरह भिन्न प्रकार का लोकतांत्रिक परिवर्तन था। इसने बालेन को केवल साधारण प्रधानमंत्री न होकर युग परिवर्तन करने वाले नेता के रूप में उभरने का अवसर दिया। लेकिन सत्ता संभालने के बाद बालेन की गतिविधियों को देखकर ऐसा लगता है कि वे युग परिवर्तन के नेता कम और संख्या के गर्व से भरे शासक बनने की ओर बढ़ रहे हैं। मंगलवार को संसद में खड़े होकर पूर्वप्रधानमंत्री प्रचण्ड द्वारा दृष्टव्य पुरानी गलतियों को स्वीकारते हुए बालेन को दिया गया सुझाव वाणी में मन भी जाता है। उन्होंने कहा, ‘हार सहना जितना कठिन है, जीत पचाना उससे भी अधिक कठिन है। संख्या के गर्व में अहंकार न बनाएं, हमसे सीखें।’