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प्रहरी इन्सपेक्टर और जवान के खिलाफ विभागीय कार्रवाई

इलाका प्रहरी कार्यालय खुर्कोट, सिन्धुली में हिरासत में मृत पाए गए श्रीकृष्ण विक की घटना की जांच रिपोर्ट पुलिस प्रधान कार्यालय में जमा कर दी गई है। इस रिपोर्ट में इन्सपेक्टर बसन्त भुजेल और पुलिस जवान अर्जुन सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है तथा भुजेल को स्थानांतरण किया गया है। श्रीकृष्ण विक को ७ वैशाख की शाम हिरासत के शौचालय में लटका हुआ पाया गया था और चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित किया था। २२ वैशाख, काठमांडू। इलाका प्रहरी कार्यालय खुर्कोट, सिन्धुली में हिरासत के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए श्रीकृष्ण विक के मामले की जांच रिपोर्ट पुलिस प्रधान कार्यालय को सौंप दी गई है। इस घटना की जांच के लिए राष्ट्रीय पुलिस प्रशिक्षण प्रतिष्ठान, महाराजगंज के डीआईजी दिनेशकुमार आचार्य की अध्यक्षता में ५ सदस्यों की समिति गठित की गई थी। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट पुलिस प्रधान कार्यालय को गृह मंत्रालय में भी भेज दी है, जिसकी जानकारी नेपाल पुलिस के केन्द्रीय प्रवक्ता डीआईजी अविनारायण काफ्ले ने दी। ‘रिपोर्ट हम जमा कर चुके हैं और इसे गृह मंत्रालय को भेजा गया है,’ काफ्ले ने कहा।

सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में इलाका प्रहरी कार्यालय खुर्कोट के इन्सपेक्टर बसन्त भुजेल और उस समय हिरासत ड्यूटी पर तैनात पुलिस जवान अर्जुन सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है। सिफारिश के अनुसार इन्सपेक्टर भुजेल को खुर्कोट से स्थानांतरित कर बागमती प्रदेश कार्यालय भेजा गया है, पुलिस ने यह भी जानकारी दी है। खुर्कोट में अब जिले के पुलिस कार्यालय से एक अन्य इन्सपेक्टर को ड्यूटी पर लगाया गया है। इसके अलावा, खुर्कोट में तैनात अन्य १० पुलिसकर्मियों को भी रिपोर्ट में सतर्क करने और ध्यानाकर्षण देने की सिफारिश की गई है।

हिरासत में मृत पाए गए विक के मामले को संदिग्ध मानते हुए पुलिस ने स्वतंत्र समिति बनाकर आगे की जांच शुरू की थी। पुलिस महानिरीक्षक दानबहादुर कार्की ने ११ वैशाख को जांच समिति गठित की थी। आचार्य की अध्यक्षता में समिति में यूएन शाखा के एसपी रवीन्द्रनाथ पौडेल, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीआईबी) के इन्सपेक्टर इन्द्रजित सुनार, काठमांडू उपत्यका अपराध जांच कार्यालय के इन्सपेक्टर प्रेम रेग्मी और उसी कार्यालय के सई राजेश्वर देवकोटा सदस्य थे।

७ वैशाख की शाम हिरासत के शौचालय में लटका हुआ मिला विक को बचाने के लिए सिन्धुली अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित किया। राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के सांसद खगेन्द्र सुनार, रिमा विश्वकर्मा, सुष्मा स्वर्णकार, खिमा विश्वकर्मा, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) के सांसद गणेश विक सहित कई लोग जिला प्रशासन कार्यालय सिन्धुली पहुंचे और प्रदर्शन कर जांच की मांग की।

विक के विसरा परीक्षण और “होल बॉडी” पोस्टमार्टम के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है।

क्या है घटना?
श्रीकृष्ण विक और खोटाङ की एक किशोरी के बीच लगभग २ वर्षों से प्रेम संबंध थे। २८ चैत्र से किशोरी बेपता होने की शिकायत पर उनके परिवार ने पुलिस को ३० चैत्र को खोज-बीन की अनुमति दी थी।

पुलिस के अनुसार ३ वैशाख की दोपहर उस किशोरी और श्रीकृष्ण विक अपने स्वजन के साथ पुलिस थाने सातदोबाटो पहुंचे। उस समय किशोरी के परिजनों ने बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पूछताछ में यह पता चला कि किशोरी सिन्धुली की है और उसकी उम्र मात्र १६ साल है, इसलिए ४ वैशाख को उसे सिन्धुली भेज दिया गया।

४ वैशाख को श्रीकृष्ण को इलाका प्रहरी कार्यालय खुर्कोट लाया गया था। उसके बाद पुलिस ने बलात्कार के आरोप में जांच शुरू की। इसी बीच ७ वैशाख की शाम लगभग ६ बजे हिरासत के शौचालय में लटका पाया गया विक को पुलिस ने बचाया।

राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के सांसद खगेन्द्र सुनार ने आरोप लगाया है कि लड़की को झांसा देकर बलात्कार की रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करवाए गए हैं।