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पूर्वी नवलपरासी में गैँडा मृत पाया गया, करंट लगने से मौत की आशंका

पूर्वी नवलपरासी के कावासोती नगरपालिका १ स्याउली टोला में मृत अवस्था में पाए गए गैँडे को करंट लगाकर मारे जाने की आशंका जताई गई है। चितवन राष्ट्रिय निकुञ्ज से आए तकनीकी टीम ने मृत गैँडे का पोस्टमार्टम किया है और उसकी रिपोर्ट आज शाम तक आने की बात कही गई है। इस चालू आर्थिक वर्ष में निकुञ्ज और आसपास के क्षेत्रों में २० गैँडे विभिन्न कारणों से मरे हैं और गैँडा गणना २०८३ में स्थगित कर दी गई है। २ जेठ, चितवन।

पूर्वी नवलपरासी के कावासोती नगरपालिका १ स्याउली टोला में शुक्रवार सुबह मृत पाए गए गैँडे को करंट लगाकर मारे जाने की संभावना है। पूर्व-पश्चिम राजमार्ग से लगभग २ किलोमीटर उत्तर में भीम प्रसाद दर्जी के स्वामित्व वाले ऐलानी खेत के भीतर लगभग २५ वर्षीय नर गैँडा मृत पाया गया। गैँडा के मृत होने के पास विद्युत धराप के लिए उपयोग किए जाने वाले सामग्री भी डिविजन वन कार्यालय पूर्व नवलपरासी द्वारा बरामद किए गए हैं।

मृत गैँडे को डिविजन वन कार्यालय लेकर, चितवन राष्ट्रीय निकुञ्ज से आए तकनीकी दल ने पोस्टमार्टम किया। निकुञ्ज के सूचना अधिकारी अविनाश थापामगर ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आज शाम तक आएगी। पोस्टमार्टम के बाद गैँडा की एक खाल और १२ खुर सुरक्षित रूप से निकाले गए हैं, जबकि बाकी अंगों को डिविजन वन कार्यालय नवलपुर परिसर के भीतर गड्ढा खोदकर व्यवस्थित किया गया है। घटना स्थल के आसपास तलाशी के दौरान मृत गैँडे के स्थान से लगभग २०० मीटर दक्षिण में लोकाहा खोल के काँसघारी क्षेत्र में जिआई तार से बंधे २७ बाँस के खंभे छुपाए हुए मिले।

इसी तरह, घटना स्थल के उत्तर-पश्चिम दिशा में एक घर से सिंगल फेज विद्युतीय रिंग सहित लगभग १३ मीटर तार भी बरामद हुआ है। घटना स्थल से मिले साक्ष्य और परिस्थितियों से प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है कि गैँडे की मौत करंट लगने से हुई है। इसी आधार पर घटना स्थल की भोगचलन करने वाले दर्जी को हिरासत में लेकर जांच की जा रही है। डिविजन वन कार्यालय ने घटना की और जांच के लिए एक जांच अधिकारी नियुक्त कर आवश्यक कार्रवाई शुरू की है, सूचना अधिकारी सुवास अधिकारी ने बताया।

निकुञ्ज के सूचना अधिकारी थापामगर के अनुसार चालू आर्थिक वर्ष के बैशाख तक निकुञ्ज एवं आसपास के क्षेत्रों में २० गैँडे विभिन्न कारणों से मरे हैं। इस आर्थिक वर्ष में गैँडा गणना का कार्यक्रम था, लेकिन समय की कमी के कारण इसे अगले वर्ष के लिए स्थगित कर दिया गया है। बजट की कमी के कारण पिछले वर्ष २०८१ में होने वाली गैँडा गणना २०८२ में टाली गई थी और २०८२ में फिर से समय कम होने की वजह से इसे २०८३ में स्थानांतरित कर दिया गया है। प्रत्येक चार वर्ष में होने वाली गैँडा गणना पिछली बार २०७७ चैत ९ से २७ तक हुई थी। सन् २०२१ में हुई इस गणना में देश के सभी राष्ट्रीय निकुñज और संरक्षण क्षेत्रों में कुल ७५२ गैँडों की संख्या दर्ज हुई थी, जिनमें से चितवन राष्ट्रीय निकुञ्ज में ही ६९४ गैँडे पाए गए।