
फोन या कंप्यूटर पर काम करते समय स्मार्टफोन के टचस्क्रीन या कंप्यूटर के कीबोर्ड को छूने की आवश्यकता निकट भविष्य में समाप्त हो सकती है। मेटा ने अपने एआई स्मार्ट चश्मे के लिए ऐसी नई सुविधा पेश की है, जिससे उपयोगकर्ता हवा में अपनी उंगली चलाकर केवल टाइप कर सकेंगे। कंपनी ने इसके लिए एक खास प्रकार की न्यूरल रिस्टबैंड तकनीक विकसित की है, जो हाथ की सूक्ष्म गतिविधियों को भी पहचानने में सक्षम है। यह तकनीक मेटा के एआई स्मार्ट चश्मे, रेबन मेटा स्मार्ट ग्लासेस के साथ काम करेगी। यह उपयोगकर्ताओं को स्क्रीन, कीबोर्ड या वॉयस कमांड के बिना संदेश भेजने में सक्षम बनाएगी। साथ ही, यह सुविधा व्हाट्सएप सहित विभिन्न मैसेजिंग ऐप्स का भी समर्थन करेगी।
कंपनी के अनुसार, नाड़ी में बांधे जाने वाले इस बैंड द्वारा हाथ की नसों से निकलने वाले विद्युत संकेतों को पढ़ा जाता है और इसी आधार पर कमांड समझे जाते हैं। अर्थात, उपयोगकर्ता केवल उंगली की हल्की हरकत से टेक्स्ट लिखने या ऐप्स को नियंत्रित करने के काबिल होंगे। मेटा ने लगभग छह महीने पहले यह स्मार्ट ग्लास पेश किया था और अब इसमें एआई आधारित संचार क्षमताओं को और भी उन्नत बनाने का काम जारी है। नए अपडेट में सबसे महत्वपूर्ण सुविधा न्यूरल हैंडराइटिंग है, जिसके जरिये स्मार्टफोन को हाथ में लिए बिना टाइप किया जा सकेगा। इसके लिए किसी भौतिक या डिजिटल कीबोर्ड की आवश्यकता नहीं होगी।
मेटा रेबन डिस्प्ले पहनने वाले लोग हवा में उंगली घुमा कर टाइप कर सकेंगे। उपयोगकर्ताओं को हावामें उसी तरह उंगली चलानी होगी जैसे किसी कापी पर अक्षर लिखा जाता है। उदाहरण के लिए, अंग्रेजी अक्षर ‘M’ लिखने के लिए हावामें ‘M’ आकार बनाते हुए उंगली को घुमाना होगा। हालांकि, इसके लिए मेटा के रेबन स्मार्ट चश्मे के साथ-साथ उपयोगकर्ता को न्यूरल रिस्टबैंड भी पहनना होगा। यह बैंड मानव हाथ की हरकतों को ट्रैक कर समझकर कमांड में परिवर्तित कर देता है। यह सुविधा व्हाट्सएप, मैसेंजर, इंस्टाग्राम तथा एंड्रॉइड और iOS के अन्य मैसेजिंग ऐप्स का भी समर्थन करेगी।
