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सरकार के अधिनायकवाद के खिलाफ युवाओं को पोखरेल का आह्वान

नेकपा एमाले के महासचिव शंकर पोखरेल ने सरकार पर न्यायपालिका, व्यवस्थापिका और कार्यपालिका के बीच संतुलन तोड़ने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के संसद के प्रति जवाबदेह न होने की परंपरा विकसित करने की कोशिश की जा रही है और सर्वोच्च न्यायालय के नेतृत्व को स्वेच्छा से नियंत्रण में लेने का भी प्रयास हो रहा है। 33वें मदन-आश्रित स्मृति दिवस के अवसर पर रविवार को आयोजित विमर्श कार्यक्रम में महासचिव पोखरेल ने युवाओं से पॉपुलिज्म की आड़ में बढ़ते अधिनायकवाद के खिलाफ संगठित होकर आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया।

महासचिव पोखरेल ने सत्तारूढ़ दल और सरकार पर प्रधानमंत्री को संसद के प्रति उत्तरदायी न बनाने की परंपरा विकसित करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, ‘राज्य के तीन अंग – कार्यपालिका, न्यायपालिका और व्यवस्थापिका के बीच संतुलन ही भंग कर दिया गया है। ऐसी परिस्थितियों में युवाओं को पॉपुलिज्म के आवरण में बढ़ रहे अधिनायकवाद के विरोध में संगठित होकर संघर्ष करना आवश्यक है।’ साथ ही, मंत्रीयों की संपत्ति को लेकर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, ‘कैसे एक व्यक्ति जो निवेश करने की क्षमता नहीं जानता, देश का विकास कर सकता है?’ ऐसा बयान देते हुए उन्होंने आलोचना भी की।