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विपक्षी दलों ने प्रस्तावित प्रधानन्यायाधीश की कार्ययोजना और उजुरी अध्ययन के लिए अतिरिक्त समय की मांग की

५ जेठ, काठमाडौं । विपक्षी दलों ने प्रस्तावित प्रधानन्यायाधीश की कार्ययोजना और उजुरी संबंधी अध्ययन हेतु समय बढ़ाने की मांग की है। आज सम्पन्न सुनुवाइ समिति की बैठक में विपक्षी सदस्यों ने अतिरिक्त समय की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। नेकपा के नेता एवं समिति सदस्य वर्षमान पुन ने कहा कि निर्णय शुरू से ही मोटे तौर पर ज्ञात था, अतः प्रक्रिया को पूरा कर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हम केवल कार्यपालिका के निर्णय के खिलाफ असहमति प्रकट करने आए हैं ऐसा नहीं है। संवैधानिक परिषद में तीनों अंग और विपक्ष भी शामिल हैं। इसलिए प्रक्रिया पूरी होकर ही अगला कदम उठाएं। कार्य को देर से ना करें। थोड़ा अध्ययन के लिए समय दें।’

उन्होंने यह भी कहा कि जिस दिन नीति कार्यक्रम पारित होता है, उसी दिन प्रधानन्यायाधीश की आगामी ६ वर्षों की कार्ययोजना को भी ध्यान से देखना आवश्यक है। ‘इसलिए आज अच्छी तरह अध्ययन करें और कल सुबह सुनवाई शुरू करें। यदि बहुमत हो तो पारित कर सकते हैं, इसमें कोई समस्या नहीं होगी,’ उन्होंने कहा। दूसरे ओर, एमाले के नेता एवं समिति सदस्य पद्मा अर्याल ने बिना चर्चा के एक ही दिन में सभी कार्य संपन्न करने पर सवाल उठाए और जल्दबाजी में काम करने से पारदर्शिता न होने की बात कही। उन्होंने कहा, ‘बैठक से पहले मैंने सोचा था कि आज केवल उजुरी वितरित की जाएगी, अध्ययन और चर्चा अगले दिन होगी, उसके बाद सुनवाई होगी। लेकिन आज ही सब कुछ अंतिम रूप दिया जाएगा, ऐसी जल्दबाजी क्यों?’

उन्होंने जोर देते हुए कहा, ‘उजुरीकर्ता की शिकायत सुननी चाहिए और हमें समझने के लिए समय दिया जाना चाहिए। इस तरह की जल्दबाजी और अपारदर्शी निर्णय समिति की गरिमा पर भी प्रश्न खड़ा करता है।’ उन्होंने प्रस्ताव रखा कि उजुरी आज प्राप्त की जाए, कल बुधवार अध्ययन किया जाए और परसों चर्चा हो। एक ही दिन में शीघ्र अनुमोदन से कार्यपालिका के निर्णय पर सवाल उठ सकते हैं। बैठक में समिति के सदस्य प्रेमप्रसाद दंगल ने भी सुनवाई की गति तेज होने पर चिंताएं व्यक्त करते हुए प्रस्तावित प्रधानन्यायाधीश की कार्ययोजना अध्ययन के लिए समय मांगा। ‘सुबह १० बजे उजुरीकर्ता से चर्चा और साढ़े १ बजे सुनवाई, यह गति बहुत अधिक तेज है। मान लें उजुरीकर्ता लाइन में हैं,’ उन्होंने कहा, ‘सभापति जी, हमें समय चाहिए, उजुरी का अध्ययन करने और प्रधानन्यायाधीश की कार्ययोजना अवलोकन करने के लिए। कल सुबह ७ बजे बैठक हो।’ एक अन्य सदस्य नरबहादुर विष्ट ने भी जल्दबाजी पर असंतोष जताते हुए समिति का नाम ही अनुमोदन समिति रखने का सुझाव दिया। ‘यह कैसी जल्दबाजी है? यह क्या नया अभ्यास है? क्या कुछ भी करने की नई रीत है?’ उन्होंने प्रश्न करते हुए कहा, ‘इसे अनुमोदन समिति ही कहें तो उचित होगा।’