
६ जेठ, काठमांडू। प्रतिनिधि सभा के हाल के कुछ सत्रों में एक समान दृश्य देखा जाता है। जब सत्र शुरू होता है तो श्रम संस्कृति पार्टी के सदस्य किसी न किसी तरह विरोध कर रहे होते हैं।
कभी पर्चा और प्ले कार्ड दिखाते हैं। कभी वे प्ले कार्ड पर लिखे नारों को पढ़ते हैं। कभी सभापति से समय लिए बिना सरकार से सवाल पूछते हैं।
सभापति डोलप्रसाद अर्याल ने प्रतिनिधि सभा नियमावली के नियम २० और २१ के अनुसार मर्यादा बनाए रखने के लिए सदस्यों को बार-बार चेतावनी दी है। लेकिन श्रम संस्कृति पार्टी के संसदीय दल के नेता हर्कराज राई (हर्क साम्पाङ) इसे मानते नहीं हैं। वे सभापति के माइक दिए जाने या न दिए जाने की परवाह किए बिना अपनी बात रखते हैं।
बुधवार सूचना एवं संचार मंत्री विक्रम तिमिल्सिना ने प्रतिनिधि सभा के आकस्मिक, शून्य और विशेष सत्रों में उठाए गए प्रश्नों का उत्तर दिया। इसके बाद सांसद साम्पाङ उठे और सभापति से समय मांगे बिना प्रश्न पूछने लगे। उन्होंने हिमालयी और पहाड़ी क्षेत्रों में इंटरनेट की कमजोर पहुंच का मुद्दा उठाया।
सभापति ने बताया कि सत्र के संचालन के दौरान बोलने के लिए उनसे समय मांगना आवश्यक है और मंत्री के उत्तर पर स्पष्टीकरण देने का प्रावधान नहीं है। लेकिन साम्पाङ ने इस बात को स्वीकार नहीं किया और संचार मंत्रालय से संबंधित अपने सुझाव देने लगे।
सभापति ने रोकते हुए कहा, “संसद में नियम हैं। केवल सभापति से समय मांग कर ही बोलने की अनुमति है।” पर साम्पाङ ने कहा कि उन्होंने समय मांगा था। हालांकि अर्याल ने सभा की मर्यादा बनाए रखने का निर्देश दिया क्योंकि समय लिए बिना बात की जा रही थी।
लेकिन हर्क साम्पाङ फिर भी नहीं माने। संचार मंत्री ने बिना माइक के साम्पाङ के उठाए प्रश्नों के जवाब देते हुए कहा कि सरकार फोरजी और टूजी नेटवर्क सुधार के लिए काम कर रही है और आने वाले वर्ष में काफी सुधार होगा।

जवाब मिलने के बाद साम्पाङ बैठ गए।
मंत्री के जवाब में स्पष्टीकरण देने की व्यवस्था न होने के बावजूद साम्पाङ ने इस अवसर का सदुपयोग किया।
संचार मंत्री के बाद युवा मंत्री रामजी यादव ने भी आकस्मिक, शून्य और विशेष सत्रों में उठाए गए सवालों के जवाब दिए। इसके बाद श्रम संस्कृति पार्टी के अरुण राई उठे और सभापति से नियमावली के नियमों के पालन के बारे में सवाल किया।
सभापति ने जवाब में बताया कि स्पष्टीकरण का प्रावधान नहीं है और कभी-कभी ही बोलने की अनुमति मिलती है।
लेकिन हर्क साम्पाङ ने कहा, ‘इस तरह नहीं चलेगा। हम जो प्रश्न उठा रहे हैं उनका उत्तर नहीं दिया जाएगा तो नहीं चलेगा। जो करना है करें, लेकिन ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए।’ सभापति नियमावली का हवाला देते हुए बार-बार कहा कि समय मांग कर और मिलने के बाद ही बोलना चाहिए।

सभापति ने तीन बार नियम तोड़ने वाले सांसदों को चेताया, लेकिन साम्पाङ और अरुण राई ने निरंतर सवाल पूछने की जरूरत पर जोर दिया।
सभापति ने संसद संचालन के नियम, मर्यादा और कानून के अनुरूप व्यवहार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “प्रतिपक्षी को सवाल पूछने का अधिकार है, मैं समय दूंगा” लेकिन वे समय लिए बिना बोलते रहे हैं।
हर्क साम्पाङ ने कहा, ‘हम तैयार हैं। जनता और सार्वभौम संसद के लिए हम निलंबन का खतरा सहेंगे।’
राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के संसदीय दल के नेता बालेन्द्र शाह (बालेन) प्रधानमंत्री बने दो महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक संसद को संबोधित नहीं किया है। इस कारण वे सरकार को संसद के प्रति जवाबदेह नहीं मानते और इसी विषय पर सवाल उठा रहे हैं।
सरकार प्रमुख रास्वपा और सभापति डोलप्रसाद अर्याल ने प्रधानमंत्री को संसद में उपस्थित कराने में असमर्थता जताई है, इसलिए श्रम संस्कृति पार्टी लगातार सवाल करती आ रही है।
प्रतिनिधि सभा में श्रम संस्कृति पार्टी के सात सांसद हैं, जबकि रास्वपा के दो सीटों से अधिक होने के कारण सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत है। सभापति अर्याल भी रास्वपा के ही हैं।
सोमवार को प्रतिनिधि सभा में श्रम संस्कृति पार्टी के सांसद प्ले कार्ड और पर्चा लेकर आए थे। उन्होंने सभापति के सामने जाकर प्ले कार्ड दिखाए और फिर अपने स्थानों पर बैठ गए।
प्ले कार्ड पर लिखा था, ‘प्रधानमंत्री संसद के प्रति जवाबदेह बनना ही होगा। प्रश्नों से भागना संभव नहीं!’, ‘जनमत का सम्मान करो। संसद को छलकर अध्यादेश लाना बंद करो! संसदीय जिम्मेदारी निभाओ!’ आदि।
सभापति ने ऐसे विरोध के तरीके अपनाने से मना करते हुए मर्यादा में रहकर विरोध करने का सख्त आदेश दिया और कहा कि इसे भविष्य में आदेश के रूप में भी लागू किया जाएगा।
लेकिन श्रम संस्कृति पार्टी नियमित रूप से प्ले कार्ड दिखाकर विरोध जारी रखे हुए है। बुधवार को भी वे पर्चा लेकर सत्र में पहुंचे और सभापति के सत्र शुरू करने की घोषणा के तुरंत बाद उठकर विरोध प्रदर्शन किया।
जब सभापति ने पूछा कि क्यों उठे, तो सभी सात सांसदों ने अपने पर्चों पर लिखे नारों को पढ़ा और फिर फिर अपने स्थानों पर चले गए।
उनके पर्चों पर लिखे नारों में ये शामिल हैं:
संसदीय सर्वोच्चता कायम करो,
सरकार संसद के प्रति जवाबदेह बने,
कानून का शासन लागू करो,
प्रतिपक्ष की आवाज सुनी जाए,
संसदीय समितियों में भागीदारी बढ़ाओ,
बोलने का समय बढ़ाओ,
सुकुम्बासी को जीने दो,
नेपाली बनकर मुस्कुराने दो,
गरीबों को मारना मना है,
झूठे वादे मंजूर नहीं,
विदेशी कर्ज बंद करो,
सरकार जवाबदेह बने,
जवाब या इस्तीफा दो,
संसदीय सर्वोच्चता कायम करो,
निलंबित होने को तैयार।
निरंतर संसद में प्ले कार्ड दिखाने, नारे लगाने और बिना समय लिए बोलने के कारण सभापति हैरान हैं। उन्होंने कई बार आदेश, निर्देशन और निर्णय दिए, लेकिन उनका आदेश प्रभावी साबित नहीं हुआ है।
सभापति अर्याल ने प्रतिनिधि सभा नियमावली के नियम ३० के तहत श्रम संस्कृति पार्टी के सांसदों को अपने व्यवहार को सुधारने की चेतावनी दी है।
साम्पाङ ने कहा, ‘हमने कोई तोड़फोड़ या आगजनी नहीं की है, हम केवल जनता के सवाल उठाना चाहते हैं और यही करते रहेंगे। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होती, तब तक पर्चा दिखाते रहेंगे और इस तरह विरोध जारी रखेंगे।’
सत्र के बाद साम्पाङ ने बताया कि वे प्रधानमंत्री से जवाब की तलाश कर रहे हैं। सुकुम्बासी समुदाय के प्रबंधन सहित घरेलू मामलों पर प्रधानमंत्री से जवाब की जरूरत है। गृह मंत्रालय राष्ट्रपति स्वयं संभाल रहे हैं इसलिए जवाब प्रधानमंत्री से अपेक्षित है।

विदेशी ऋण लेने के संदर्भ, लिपुलेक सहित सीमा विवाद के मुद्दे पर भी प्रश्न हैं। उनका मुख्य उद्देश्य सरकार को संसद के अनुरूप जवाबदेह बनाना है।
“निलंबन का खतरा हो सकता है ना?” पूछे जाने पर साम्पाङ ने कहा, “ठीक है, हम तैयार हैं। जनता और सार्वभौम संसद के लिए हम निलंबित होने को तैयार हैं।”
