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‘डार्क एनर्जी’: ब्रह्माण्ड के विशाल नवीन नक्शे से मिली संकेत

पाँच हज़ार फाइबर-ऑप्टिक सेंसरों से सुसज्जित एक अत्यंत शक्तिशाली उपकरण ने ब्रह्माण्ड का विशाल नक्शा प्रस्तुत किया है। यह सबसे बड़ा नक्शा हमारी ब्रह्माण्ड संबंधी वर्तमान अवधारणा को चुनौती दे रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका के एरिजोना स्थित किट पीक राष्ट्रीय वेधशाला में स्थापित ‘डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट’ (डेसी) नामक उपकरण ने 4.7 करोड़ से अधिक तारामंडल और क्वेज़ार, तथा 2 करोड़ से अधिक तारों की छवियां खींची हैं। यह संख्या पूर्व में गिनी गई तारामंडलों एवं अन्य ब्रह्माण्डीय वस्तुओं की कुल संख्या से छह गुना अधिक है। ये छवियां लगभग 11 अरब प्रकाश वर्ष दूर की हैं, अर्थात् डेसी ने ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के प्रारंभिक चरण में मौजूद तारामंडलों की तस्वीरें ली हैं। कोलंबिया स्थित ईसीसीआई विश्वविद्यालय के खगोल वैज्ञानिक लुस आन्हेला गार्सिया के अनुसार वह काल करीब 13.7 अरब वर्ष पूर्व है।

यह नक्शा तारामंडलों की संरचना और उनकी बनावट को बेहतर रूप से समझने में मदद करता है तथा अब तक विज्ञान के लिए विशाल रहस्य मानी जाने वाली ‘डार्क एनर्जी’ से संबंधित नए संकेत प्रदान करता है। डेसी ने पाँच वर्षों में आकाश के एक तिहाई भाग का नक्शांकन किया है। इस दौरान, विशेष रूप से इस उपकरण ने एक ही रात में एक लाख से अधिक तारामंडलों का मापन किया। उन तारामंडलों से प्रकट हुई रोशनी फाइबर-ऑप्टिक डिटेक्टरों के माध्यम से उपकरण में प्रवेश करती है, जिससे उनकी ‘स्पेक्ट्रम’ अर्थात वर्णक्रम को मापा जा सकता है और ब्रह्माण्ड के कितना फैलाव हुआ है, इसका आकलन संभव होता है। लेकिन डेसी की एक अन्य बड़ी सफलता यह है कि इसने ‘डार्क एनर्जी’ को समझने के लिए एक नया दृष्टिकोण दिया है। माना जाता है कि ब्रह्माण्ड का 70 प्रतिशत तत्व ‘डार्क एनर्जी’ पर आधारित है, जो ब्रह्माण्ड के फैलाव को प्रेरित करने वाली शक्ति की तरह कार्य करता है।

अब तक डार्क एनर्जी को ‘कॉस्मोलॉजिकल कॉन्स्टैंट’ यानी ‘ब्रह्माण्डीय स्थिरांक’ माना जाता है। अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने सामान्य सापेक्षता सिद्धांत के समीकरणों में इस स्थिरांक को सम्मिलित किया था। क्लेयर कैमरोन ने ‘साइंटिफिक अमेरिकन’ पत्रिका में प्रकाशित एक लेख में बताया है कि यह अवधारणा ब्रह्माण्ड के स्थिर विस्तार की व्याख्या करती है। यह नवीन खोज इस विचार को और मजबूत करती है कि विकसित होती हुई ऊर्जा के रूप में डार्क एनर्जी स्थिर नहीं रहती, बल्कि समय के साथ विकसित होती है।