
तस्वीर स्रोत, ANFA
विश्व फुटबॉल महासंघ फीफा प्रत्येक सदस्य राष्ट्र को फुटबॉल के महाकुंभ कहे जाने वाले ‘फुटबॉल विश्वकप’ में पहुंचने का प्रयास करता है।
नेपाल भी 40 वर्षों से इस प्रयास में लगा है। लेकिन यह स्पष्ट है कि विश्वकप के अंतिम चरण तक पहुंचना किसी भी राष्ट्र के लिए आसान नहीं है।
इसके लिए फीफा द्वारा बनायी गई कड़ी, चरणबद्ध क्वालीफाइंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जो महाद्वीस के अनुसार विभिन्न कोटों और नियमों के अधीन होती है।
नेपाल ने साल 1986 के विश्वकप से क्वालीफाइंग खेलना शुरू किया। इस अवधि में 9 बार क्वालीफाइंग चरण खेले गए, जिसमें नेपाल ने एशियाई क्वालीफाइंग के दूसरे चरण तक पहुंचने में सफलता पाई।
नेपाल ने पिछले चार दशकों की क्वालीफाइंग यात्रा में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। इस बार का फीफा विश्वकप 2026 भी इसी तरह एक उतार-चढ़ाव से भरा और यादगार रहा है।
नेपाल की इस बार की क्वालीफाइंग यात्रा प्रतिस्पर्धा के बजाय विवादों, शून्य प्रभावी परिणाम और घरेलू मैदान पर खेल न पाने के कारण पीड़ा भरे चक्र में उलझी हुई नजर आई।
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क्वालीफाइंग में नेपाल का प्रदर्शन कैसा रहा?
नेपाल ने 2080 असोज 25 से क्वालीफाइंग यात्रा शुरू की और दूसरे चरण को पूरा किया। आठ महीनों तक संघर्ष करने के बाद नेपाल क्वालीफाइंग से बाहर हो गया।
फीफा के नियमों के अनुसार एशिया में निचली रैंकिंग वाले देशों को मुख्य ड्रॉ में प्रवेश से पहले एशियाई क्वालीफाइंग के प्लेऑफ खेलना होता है। इस ‘होम एंड अवे’ प्लेऑफ में नेपाल ने दक्षिण-पूर्वी एशियाई प्रतिद्वंद्वी लाओस के खिलाफ मुकाबला किया।
2080 असोज 25 को दशरथ रंगशाला में नेपाल ने घरेलू मुकाबला खेला जो 1-1 के गोल स्कोर से समाप्त हुआ। नेपाल की तरफ से अंजन विष्ट ने गोल किया। अगले सप्ताह लाओस में हुए ‘अवे मैच’ में मनिष डांगी के गोल से नेपाल 1-0 से जीता।
कुल मिलाकर नेपाल 2-1 के योगफल से दूसरे चरण में प्रवेश करने में सफल रहा।
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दूसरे चरण में पहुँचे 36 एशियाई देशों में नेपाल को समूह ‘एच’ में रखा गया। इस समूह में उसके प्रतिस्पर्धी संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और यमन थे।
नेपाल टीम ने कभी दक्षिण कोरिया को ड्रा कराया था या मकाऊ के खिलाफ हेट्रिक सहित जीत दर्ज की थी, लेकिन दूसरे चरण में प्रदर्शन सामान्य रहा।
हालांकि केवल खिलाड़ियों की प्रदर्शन में ही दोष नहीं था। फुटबॉल विश्लेषक संजीव मिश्र कहते हैं, “आंतरिक विवाद, खिलाड़ियों की अनियमितताएं और घरेलू मैदान पर खेलने में असमर्थता के कारण खिलाड़ी खुलकर खेल नहीं पाए।”
‘होम एंड अवे’ प्रारूप में खेले गए छह मैचों में नेपाल छह में से पांच बार हार गया।
नेपाल ने यूएई के खिलाफ 4-0, 4-0, बहरीन के खिलाफ 5-0 और 3-0 एवं यमन के खिलाफ 2-0 और 2-2 का स्कोर हासिल किया।
इन निराशाजनक आठ महीनों के दौरान यमन के साथ बराबरी नेपाल के लिए एकमात्र सांत्वना था। टीम के लिए संजीव बिष्ट और जिलेस्पी जंग कार्की ने गोल किए थे।
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घरेलू मैच न खेल पाने का दर्द
नेपाल ने ‘प्लेऑफ’ में लाओस के साथ एक मैच और यमन के साथ एक मैच काठमांडू के दशरथ रंगशाला में खेला था।
लेकिन बाकी के मैच खेलने की अनुमति नहीं मिली।
क्योंकि एएफसी ने रंगशाला के मैदान की स्थिति, फ्लडलाइट और सुरक्षा व्यवस्थाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुकूल न मानते हुए इसे अयोग्य घोषित किया था।
पहले दो मैच सफलतापूर्वक आयोजित हुए रंगशाला अचानक अयोग्य घोषित होना आश्चर्यजनक था, पर इसका कारण एन्फा और राखेप के बीच सुधार ko लेकर तकराव दिखा।
नेपाल और बहरीन के बीच 2080 चैत 8 को दशरथ रंगशाला में मैच निर्धारित था, लेकिन एएफसी की रिपोर्ट के बाद बहरीन ने दोनों मैच अपनी घरेलू ज़मीन पर खेलने का मौका पा लिया।
उस वक्त कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि एन्फा घरेलू मैदान पर खेलना ही नहीं चाहता। घरेलू मैच अपने देश में न खेलने के कारण नेपाल को दूसरे तटस्थ मैदान पर खेलना पड़ा, जो भी संभव नहीं हो पाया।
एन्फा के प्रवक्ता सुरेश शाह ने उस समय कहा था, “हमने भूटान, सऊदी अरब, मलेशिया और बहरीन के चार में से एक जगह का प्रस्ताव दिया था। लेकिन एएफसी ने दोनों मैच बहरीन में ही खेलने की अनुमति दे दी।”
इस मुद्दे ने खेल जगत में हलचल मचाई और संसद में भी चर्चा हुई।
बहरीन के साथ हुए मैच में नेपाल फेल हुआ, लेकिन इसके दो महीने बाद 2081 जेठ 24 को यूएई के साथ घरेलू मैच भी एन्फा काठमांडू में आयोजित नहीं कर पाया।
इसका कारण रंगशाला की मरम्मत में नेपाल की असफलता थी।
इस मामले में राखेप और एन्फा पदाधिकारियों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। दोनों ने एक-दूसरे की मदद न करने की बात कही।
राखेप के तत्कालीन सदस्य सचिव टंकलाल घिसिंग ने बताया, “एन्फा ने खेल संबंधित जानकारी राखेप को नहीं दी। प्रतियोगिता निर्धारित होने और आवश्यक तैयारियां करने की जानकारी भी नहीं दी।”
एन्फा पदाधिकारीयों ने जवाब दिया कि राखेप ने जानबूझकर उपेक्षा की।
दशरथ रंगशाला में मैच नहीं होने के कारण मुकाबला सऊदी अरब के दमाम के प्रिंस मोहम्मद बिन फाहद स्टेडियम में खेला गया।
घरेलू मैदान पर घरेलू दर्शकों के बीच खेलने से बेहतर परिणाम का संभावना अधिक होती है, लेकिन वह ‘आवे मैच’ में संभव नहीं होता, यह वैश्विक मान्यता नेपाल के खिलाड़ियों ने इस्तेमाल नहीं कर पाए।
कुल मिलाकर, फीफा विश्वकप 2026 की नेपाल की क्वालीफाइंग यात्रा में खिलाड़ी उच्च ऊर्जा के साथ खेल नहीं पाए और दर्शकों को घरेलू मैदान पर उनका उत्साह बढ़ाने का मौका नहीं मिला। यह विश्वकप क्वालीफाइंग नेपाल के खिलाड़ियों के लिए दर्दनाक हार की याद तक सीमित रही।
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