कर्णाली टूरिज्म मिट-२०२६: अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करते हुए सम्पन्न

कर्णाली टूरिज्म मिट–२०२६ सुर्खेत में सम्पन्न हुआ, जिसने कर्णाली को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई। भारत के ट्रैवल ट्रेड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश सिन्हा ने कर्णाली भ्रमण अनुभव को अविस्मरणीय बताया और यहां की आतिथ्य व प्राकृतिक सौंदर्य से प्रभावित होने का उल्लेख किया। पर्यटन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी संतोषविक्रम थापा ने कर्णाली को धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विश्व के सामने प्रस्तुत करने के लक्ष्य के साथ कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी दी।
१० जेठ, काठमांडू। कर्णाली प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता के साथ ‘कर्णाली टूरिज्म मिट-२०२६’ सम्पन्न हुआ। ‘‘प्रकृति और संस्कृति की गोद में’’ नारे के साथ ८ जेठ को शुरू हुआ यह टूरिज्म मिट रविवार को सुर्खेत में संपन्न हुआ। नेपाल पर्यटन बोर्ड और वीरेन्द्रनगर नगरपालिका के आयोजन तथा होटल व्यवसायी महासंघ सुर्खेत के समन्वय में आयोजित इस मिट में भारत के विभिन्न शहरों से लगभग ५० पर्यटन व्यवसायी, पत्रकार और ब्लॉगर शामिल थे। समापन समारोह में नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के केंद्रीय सदस्य पदमविक्रम शाही ने प्रतिभागियों द्वारा कर्णाली के ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों का अनुभव लेने का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम कर्णाली पर्यटन को बढ़ावा देने में नई ऊर्जा जोड़ने वाला रहा है। ‘‘कर्णाली धार्मिक दृष्टि से पवित्र भूमि है, यहां धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन, स्वास्थ्य पर्यटन और प्रकृति आधारित पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं,’’ उन्होंने कहा, ‘‘कर्णाली कैलाश मानसरोवर के प्रवेशद्वार भी है, भारत के लखनऊ से कुछ ही घंटों में गुरांसे के शीतलता का अनुभव किया जा सकता है, यहां का मौसम और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों के लिए अद्वितीय अनुभव प्रदान कर सकती है।’’ भारत के ट्रैवल ट्रेड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश सिन्हा ने कर्णाली भ्रमण अनुभव को अविस्मरणीय बताया।
उन्होंने कर्णाली के लोगों की आतिथ्य भावना, स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता से प्रभावित होने का उल्लेख किया। ‘‘हमें यहां अत्यंत आत्मीय स्वागत मिला है,’’ उन्होंने कहा, ‘‘कर्णाली अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में स्थापित होने की बड़ी क्षमता वाला क्षेत्र है, इसके प्रचार-प्रसार में हम भारतीय पर्यटकों को कर्णाली लाने का विश्वास दिलाना चाहते हैं।’’ भारत से आए पत्रकार बीएस परीहार ने कहा कि नेपाल और भारत के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध पर्यटन विकास का मजबूत आधार बन सकते हैं।
कर्णाली टूरिज्म मिट के तहत ९ जेठ को भारतीय पर्यटन व्यवसायियों और प्रतिभागियों को दैलेख के धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की परिचयात्मक यात्रा कराई गई। उपस्थित लोगों को हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव द्वारा सतिदेवी के मृत शरीर को ले जाते समय सतिदेवी की नाभि गिरी और नाभिस्थान तथा सिर गिरने वाले स्थल यानी शिरस्थान की यात्रा कराई गई, जहां वे अनवरत जलती हुई ज्वाला का दर्शन कर सके।
गुरांसे क्षेत्र में आयोजित अनुभव आदान-प्रदान कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कर्णाली के मौसम, पर्वतीय भू-दृश्य और स्थानीय आतिथ्य को पर्यटन के मुख्य आकर्षण के रूप में व्याख्यायित किया। समापन समारोह में पर्यटन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी संतोषविक्रम थापा ने कहा कि कर्णाली को केवल दुर्गम क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, साहसिक और प्राकृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विश्व के सामने पहचान दिलाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सम्मेलन के दौरान कर्णाली की मौलिक संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले हूड्के नृत्य, देउडा और स्थानीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ की गईं। साथ ही स्थानीय पारंपरिक व्यंजन और सामुदायिक आधारित पर्यटन क्रियाकलापों ने विशेष रूप से भारतीय पर्यटन व्यवसायियों का आकर्षण बढ़ाया, जो पर्यटन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी थापा ने बताया। उनके अनुसार इस कार्यक्रम से नेपाल-भारत पर्यटन सहयोग का विस्तार, कर्णाली में निवेश को प्रोत्साहन, अंतरराष्ट्रीय बाजार से संपर्क बढ़ाना और कर्णाली के नए स्थलों के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद है।
