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अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की उम्मीद से कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे

समाचार सारांश

सम्पादकीय समीक्षा पश्चात तयार गरिएको।

  • अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की संभावनाओं से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम 5.5 प्रतिशत गिर कर 98 डॉलर प्रति बैरल रह गया है।
  • तेल के मूल्य में गिरावट से जापान का निक्केई सूचक लगभग 3 प्रतिशत और यूरोप के स्टॉक्स 600 सूचक में 0.8 प्रतिशत सुधार आया है।
  • अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलमार्ग बंदी जैसे मुख्य मुद्दों पर अभी भी कुछ असहमति बनी हुई है।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष खत्म करने वाली शांति समझौता होने की संभावना के कारण विश्व बाजार में कच्चे तेल का मूल्य प्रति बैरल 100 डॉलर से नीचे आ गया है।

इस सकारात्मक विकास ने विश्व के शेयर बाजारों में सुधार लाया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का मानक माने जाने वाले ‘ब्रेंट क्रूड’ का मूल्य 5.5 प्रतिशत गिरकर प्रति बैरल लगभग 98 डॉलर हो गया है, जो पिछले दो हफ्तों में सबसे कम स्तर है।

हालांकि, होर्मुज जलमार्ग की बंदी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अमेरिका और ईरान के बीच अभी भी कुछ मतभेद मौजूद हैं।

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा तेहरान पर मिसाइल हमले के बाद यह रणनीतिक जलमार्ग बंद हो गया था।

इस बंदी के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई थी। वार्ता में हो रहे उतार-चढ़ाव पर आईएनजी की कमोडिटीज स्ट्रैटेजी प्रमुख वॉरेन पैटरसन ने रॉयटर्स को बताया, ‘‘हम पहले भी ऐसे हालात देख चुके हैं, लेकिन पिछली वार्ता टूट गई थी। इसलिए इस बार बाजार तुरंत प्रतिक्रिया देने की बजाय सावधानी बरत रहा है।’’

इससे एशियाई और यूरोपीय शेयर बाजारों में उत्साह बढ़ा है। जापान का ‘‘निक्केई’’ सूचक लगभग 3 प्रतिशत बढ़ा है और यूरोप के समग्र ‘‘स्टॉक्स 600’’ सूचक में 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

सोमवार को अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों में सार्वजनिक छुट्टियां थीं, जिसके कारण वहां के प्रमुख बाजार बंद रहे।

इसी दिन विश्व की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर का मूल्य 0.25 प्रतिशत गिर गया। वहीं, ब्रिटिश पाउंड 0.5 प्रतिशत बढ़कर 1.3492 डॉलर पर पहुंच गया, जो 14 मई के बाद सबसे ऊंचा स्तर है।

बाजार की इस स्थिति पर विश्लेषक स्टीफन इन्स ने कहा, ‘‘निवेशक दुनिया के सबसे संवेदनशील ऊर्जा जलमार्ग के पुनः खुलने की संभावना का मूल्यांकन शुरू कर चुके हैं। इसलिए सरकारों के बॉन्ड, सोना और शेयर बाजार का भविष्य सकारात्मक दिशा में बढ़ रहा है। हाल की ऊर्जा संकट से उपजी मुद्रास्फीति और ब्याज दर वृद्धि की चिंताएं कम हुई हैं, जो बाजार की सही प्रतिक्रिया है।’’

इराक युद्ध से तेल, गैस और रासायनिक उर्वरकों जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं के दाम बढ़ने पर वैश्विक महंगाई की चिंता बढ़ी थी। इससे आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।

इसी चिंता के चलते केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों में कटौती की पूर्व योजनाओं को स्थगित कर ब्याज दरें बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध के प्रभाव से बैंक ऑफ इंग्लैंड इस वर्ष दो बार ब्याज दर बढ़ा सकता है।