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विशेष अदालत ने जारी की नई गिरफ्तारी वारंट, देउवा दंपति गिरफ्तारी के खतरे में

समाचार सारांश

समीक्षा पश्चात तैयार।

  • सर्वोच्च न्यायालय ने क्षेत्राधिकार न होने के कारण पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा और उनकी पत्नी आरजु देउवा को गिरफ्तार न करने का अंतरिम आदेश जारी किया है।
  • संपत्ति शुद्धिकरण अनुसंधान विभाग का मामला विशेष अदालत के क्षेत्राधिकार में आता है, इसलिए जिला अदालत की गिरफ्तारी अनुमति स्वतः निष्क्रिय मानी गई है।
  • गिरफ्तारी अनुमति मांगते समय आरजु देउवा का पूरा नाम उल्लेखित नहीं था और कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, ऐसा अदालत ने बताया है।

११ जेठ, काठमांडू। सर्वोच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी करने वाले न्यायालय के क्षेत्राधिकार न होने के आधार पर सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा और उनकी पत्नी एवं पूर्व विदेश मंत्री आरजु देउवाल को गिरफ्तार न करने का अंतरिम आदेश जारी किया है।

उन्होंने कहा कि उन्हें गैरकानूनी ढंग से गिरफ्तार करने के लिए जिला अदालत से अनुमति ले ली गई थी और इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री देउवा ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था।

संपत्ति शुद्धिकरण के गिरफ्तारी वारंट विशेष अदालत द्वारा जारी किए जाने चाहिए, यह नई अध्यादेश व्यवस्था है, लेकिन अनुमति जिला अदालत से ली गई थी।

इस आदेश में देउवा दंपति को जिला अदालत की अनुमति के आधार पर गिरफ्तार न करने कहा गया है। यदि विशेष अदालत से अलग से गिरफ्तारी वारंट जारी होता है तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है।

न्यायाधीश महेश शर्मा पौडेल और नित्यानंद पांडे की पीठ ने क्षेत्राधिकार का सवाल उठाते हुए दोनों को गिरफ्तार न करने का अंतरिम आदेश दिया है।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया है, ‘‘काठमांडू जिला अदालत से इस तरह से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के आधार पर गिरफ्तारी न करें, विपक्षी के नाम पर अंतरिम आदेश जारी किया जाता है।’’

संपत्ति शुद्धिकरण अनुसंधान विभाग ने २४ चैत २०८२ को पूर्व प्रधानमंत्री देउवा और उनकी पत्नी आरजु राणादेउवा को गिरफ्तार करने के लिए काठमांडू जिला अदालत से अनुमति ली थी।

सर्वोच्च के आदेश के अनुसार, उस अनुमति मांगते समय आरजु का पूरा नाम उल्लेखित नहीं था।

अदालत का क्षेत्राधिकार

उस समय गिरफ्तारी अनुमति सक्रिय थी, लेकिन बाद में सरकार ने नया अध्यादेश लाया। १८ वैशाख २०८३ को राजपत्र में प्रकाशित उस अध्यादेश के तहत संपत्ति शुद्धिकरण अनुसंधान विभाग के मामलों का निपटारा विशेष अदालत में ही होना तय हुआ।

फौजदारी कार्यविधि संहिता अधिनियम, २०७४ के अनुसार मामले चलाने वाला अदालत ही गिरफ्तारी अनुमति दे सकता है।

विशेष अदालत में मामला चलने वाले व्यक्ति को जिला अदालत की अनुमति पर गिरफ्तार करने का प्रयास करने पर सर्वोच्च ने रोक लगाई है।

सर्वोच्च द्वारा जारी अंतरिम आदेश में कहा गया है, ‘‘विशेष अदालत में मामला दर्ज होने के कारण २४ चैत २०८२ को काठमांडू जिला अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी अनुमति निष्क्रिय हो गई है।’’

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नाम और थर क्या है?

सर्वोच्च के अनुसार, जांच फाइल में पूर्व प्रधानमंत्री का पूरा नाम है, लेकिन आरजु का नाम और थर न लिखकर केवल ‘उनकी पत्नी’ लिखा गया था।

मुलुकी फौजदारी कार्यविधि के अनुसार गिरफ्तारी अनुमति के लिए नाम, थर, निवास स्थान, पहचान विवरण और अपराध का संक्षिप्त उल्लेख आवश्यक होता है।

‘‘लेकिन विभाग और जिला अदालत से अनुमति मांगते और देते समय ये कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी नहीं की गईं,’’ सर्वोच्च ने कहा, ‘‘इसलिए अनुमति मांगने और देने की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुसार नहीं हुई।’’

संपत्ति शुद्धिकरण का आरोपी फरार हो, सबूत नष्ट करे या जांच में बाधा डाले तो गिरफ्तारी की जा सकती है।

लेकिन गिरफ्तारी के दौरान कानूनी प्रावधानों का पालन आवश्यक होता है, यह सर्वोच्च ने स्पष्ट किया।

सर्वोच्च ने कहा, ‘‘केवल कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप ही गिरफ्तारी की जा सकती है, लेकिन स्वेच्छा से गिरफ्तारी करने में कोई विवाद नहीं होना चाहिए।’’

अब तक विशेष अदालत से गिरफ्तारी अनुमति नहीं मांगी गई है और वहां से कोई वारंट जारी नहीं हुआ है।

सरकार ने गिरफ्तारी वारंट के आधार पर देउवा दंपति के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस के लिए अंतरराष्ट्रीय पुलिस (इंटरपोल) से संपर्क किया था, लेकिन पर्याप्त प्रमाण न मिलने के कारण इंटरपोल नोटिस जारी करने से इनकार करता रहा है।

पूर्व प्रधानमंत्री देउवा दंपति पर पद का दुरुपयोग कर गैरकानूनी संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे हैं। जेएनजी आंदोलन के दौरान आगजनी में उनके घर में धन की आग लगने का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ, जिसकी जांच संपत्ति शुद्धिकरण विभाग कर रहा है।

विभाग देउवा परिवार की संपत्ति विवरण और अन्य सबूत इकट्ठा कर जांच कर रहा है। बालेन की अगुवाई वाली सरकार बनने के बाद अदालत से गिरफ्तारी अनुमति जारी हुई थी।