रूस ने बाल्टिक देशों में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालत जाने की चेतावनी दी

काठमाडौं । बाल्टिक देशों में रहने वाले रूसी नागरिकों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए रूस ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में जाने की चेतावनी दी है। रूसी मीडिया तास के अनुसार, रूस लातविया, लिथुआनिया और एस्टोनिया के साथ बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करने का प्रयास कर रहा था। लेकिन ये प्रयास विफल रहने पर रूस ने कानूनी रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में इज़्वेस्टिया अखबार को जानकारी दी है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने बाल्टिक देशों द्वारा रूसी समुदाय के प्रति किए जा रहे व्यवहार की कड़ी आलोचना की है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ‘हमने लातविया, लिथुआनिया और एस्टोनिया से कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी गलतियों को सुधारने का आग्रह किया। लेकिन उन देशों के अधिकारी गैरकानूनी नीतियां बंद करने से इनकार कर चुके हैं। बातचीत के माध्यम से मतभेदों का समाधान करने के हमारे सभी प्रयास विफल रहे हैं। इसलिए अब हमें संयुक्त राष्ट्र की मुख्य न्यायिक संस्था में अपने दावे ले जाने होंगे।’
मंत्रालय ने बाल्टिक देशों में मौजूद रूसी भाषी आबादी, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार रक्षकों पर हो रहे दमन की ओर संयुक्त राष्ट्र का ध्यान आकर्षित करने की बात कही है। रूस ने आरोप लगाया है कि ‘रूसी प्रचार’ का बहाना बनाकर लातविया की सूचना प्रणाली से असहमत आवाजों को हटा दिया जा रहा है। साथ ही, एस्टोनिया ने अपनी संविधान में केवल एस्टोनियाई मूल के लोगों को प्राथमिकता दी है, जिसके चलते वहां के अल्पसंख्यक रूसी नागरिकों के अधिकारों का खुलकर हनन किया जा रहा है, जो रूसी विदेश मंत्रालय द्वारा स्पष्ट किया गया है।
