
१४ जेठ, खोटाङ । ‘अभी के लिए प्रत्येक वडामा दो से पाँच-छह किसान प्रहरी या किसान सेना रखकर बंदर को भगाया जा सकता है। किसान खेत-बारी में बंदर आने की सूचना देकर सहयोग कर सकते हैं,’ नेकपा एमाले खोटाङ के उपाध्यक्ष कुमार आचार्य ने कहा। कृषि फसल में क्षति पहुंचाने वाले जंगली जानवरों को नियंत्रित करने के उपाय खोजने के लिए खोटाङ जिला समन्वय समिति ने जेठ १३ गते किसानوں के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया था। उक्त कार्यक्रम में आचार्य ने बंदर नियंत्रण संबंधी अपनी राय रखी।
जिला समन्वय समिति के सभाहल में आयोजित कार्यक्रम में किसान, जनप्रतिनिधि, प्रशासन, सुरक्षा निकाय, कृषि से जुड़े कार्यालय और राजनीतिक दल के प्रतिनिधि बुलाए गए थे। सहभागी ध्यानबहादुर राई ने बंदर भगाने के लिए निश्चित वेतन सहित वर्ष में छह महीने रखवाली करने का सुझाव दिया। बंदर सहित जंगली जानवरों को भगाने के लिए रखवाली रखने पर सहमति जताने वाले किसान झमप्रसाद आचार्य ने प्रत्येक वडा में फसल संरक्षण समिति गठित कर स्थानीय सरकार के माध्यम से रखवाली प्रबंधन करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि रखवाली के माध्यम से बंदर पर निगरानी रखी जा सकेगी तथा फसल के पास आने पर उसे भगा भी जा सकता है।
किसान उद्धवप्रसाद आचार्य की भी यही राय है। बंदर भगाने के लिए नगरपालिका, गाउँपालिका या वडा कार्यालय द्वारा रखवाली की व्यवस्था करने पर किसान राहत प्राप्त कर सकेंगे, उनका विश्वास है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य निवेश करे तो बंदर नियंत्रण संभव होगा। संवाद में सहभागी किसानों ने बंदर भगाने के लिए रखवाली प्रबंधन से लेकर बंदर न खाने वाले फसल आयात करने, बंदरों को पकड़कर बंध्याकरण करने, अन्यत्र स्थानांतरित करने और आवश्यक पड़ने पर मारने के विषयों पर चर्चा की। सामुदायिक वन उपभोक्ता महासंघ के अध्यक्ष मोहन गुरुङ ने बंदर नियंत्रण के लिए परंपरागत ज्ञान और कौशल अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सरकार हर तीन साल में चैत महीने में राष्ट्रीय स्तर पर एक बार बंदर भगाने का अभियान चलाए तो बंदर नियंत्रण संभव होगा। बंदर किसानों के लिए समस्या बन चुका है, लेकिन बंदर नियंत्रण के लिए अब तक पूर्ण उपाय नहीं मिल पाया है। बंदर सहित जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को कम करने के उपाय खोजने और शोध करने का कार्य जारी है, जिला समन्वय समिति खोटाङ के प्रमुख सनबहादुर राई ने बताया।
