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बालेन सरकार द्वारा प्रस्तुत प्रथम बजट में संसद में देखे गए दृश्य

१५ जेठ, काठमाडौं। संघीय संसद के संयुक्त सत्र में शुक्रवार को अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले द्वारा प्रस्तुत बजट राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी नेतृत्व वाली सरकार का पहला बजट है।

जेनजी आंदोलन के बाद राजनीतिक बदलाव, अर्थशास्त्र समझने वाले अर्थमंत्री, लगभग दो तिहाई बहुमत वाली एकल सरकार, और आम नागरिकों की तीव्र विकास एवं समृद्धि की चाहत इस बजट से जुड़ी बड़ी उम्मीदें उत्पन्न करती हैं। ये अपेक्षाएं संसद में भी प्रकट हुईं।

संसद भवन अभी निर्माणाधीन है, इसलिए वैकल्पिक रूप से बहुउद्देश्यीय हॉल में बजट भाषण दिया गया। एक हॉल में आगंतुक बिठाए गए थे। निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि, नागरिक समाज के नेता और अन्य हितधारक टेलीविजन के माध्यम से बजट सुनने संसद भवन पहुंचे थे।

हालांकि, पूर्व अर्थमंत्रियों ने पारंपरिक तरीके से बजट सुनाने के लिए संसद नहीं जाना चुना।

सरकार ने २१ खरब २४ अरब ३४ करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया। इसमें चालू खर्च के लिए १२ खरब ७० अरब ५८ करोड़ और पूंजीगत खर्च के लिए ४ खरब ३१ अरब १० करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

वित्तीय प्रबंधन के लिए ४ खरब २२ अरब ६४ करोड़ रुपये घोषित किए गए। आगामी आर्थिक वर्ष का बजट चालू वर्ष के संशोधित अनुमान से २५ प्रतिशत अधिक है।

बजट सुनते समय एक निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि ने कहा, ‘आकार ठीक है, लेकिन स्रोतों की स्पष्टता नहीं है।’

अर्थमंत्री वाग्ले के अनुसार, आगामी वित्तीय वर्ष में १४ खरब ५ अरब राजस्व संग्रहण, ६१ अरब ७४ करोड़ विदेशी अनुदान, २ खरब ४७ अरब विदेशी ऋण तथा ४ खरब १० अरब आंतरिक ऋण जुटाने का लक्ष्य है। इस आधार पर सरकार ७ प्रतिशत आर्थिक विकास का विश्वास रखती है।

बालेन बैठे, हर्क चले

दोपहर ४ बजे निर्धारित बजट भाषण १४ मिनट विलंब से शुरू हुआ क्योंकि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) संसद भवन देर से पहुँचे।

प्रधानमंत्री बालेन ने पूरा बजट भाषण सुना, लेकिन श्रम संस्कृति पार्टी अध्यक्ष हर्क साम्पाङ ने अधिभार नहीं लिया। बीच में बाहर जाकर फेसबुक पर लिखा, ‘प्रधानमंत्री आए। जवाबदेही बनाने का मेरा दबाव है। इसलिए वे सुनें, उनके बजट भाषण को सुनना मैंने छोड़ दिया। नीति तथा कार्यक्रम नहीं सुनी, सिर्फ बजट सुना।’

हालांकि, जैसा हर्क ने कहा, बालेन ने नीति तथा कार्यक्रम नहीं सुनीं ऐसा नहीं है। २८ वैशाख को राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल के नीति तथा कार्यक्रम पढ़ने के दौरान बालेन बीच में उठकर चले गए थे। इसके १७ दिन बाद ही वे संसद लौटे।

बजट भाषण सुनते हुए प्रधानमंत्री बालेन शाह: तस्वीर/ रासस

विपक्षी दलों ने इस विषय पर बालेन से जवाब मांगा, लेकिन वे नहीं मिले। नीति तथा कार्यक्रम पर चर्चा और उठने वाले सवालों के जवाब में भी प्रधानमंत्री उपस्थित नहीं हुए।

प्रतिनिधि सभा नियमावली के अनुसार जेठ महीने के पहले सप्ताह में प्रधानमंत्री के साथ प्रश्नोत्तर होना था।

लेकिन प्रधानमंत्री बालेन ने अवसर नहीं दिया। संसद में सांसदों के अकस्मात प्रश्न, शून्यकाल और विशेष समय में पूछे गए सवालों के जवाब नहीं मिले।

बालेन को खोजते हुए हर्क साम्पाङ ने संसद की पिछली बैठकों में लगातार प्ले कार्ड दिखाए। शुक्रवार को बालेन मौजूद थे, तब हर्क स्वयं उठकर चले गए।

१७ दिन बाद संसद लौटे बालेन से अब सांसदों के सवालों के जवाब देने की मांग हर्क की है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, ‘आज खोपी का देवता बाहर निकाला गया। अब बोलने वाला हूँ।’

बालेन और हर्क साम्पाङ दोनों २१ फागुन के चुनाव से संसद पहुंचे हैं। दोनों २०७९ के स्थानीय तह चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार थे। बालेन काठमाडांै के मेयर और हर्क धरान उपमहानगरपालिका के मेयर थे। मेयर पद छोड़े और पूरा संघीय संसद में पहुंचे।

नई प्रतिनिधि सभा में ये दोनों ‘आइकन पात्र’ जैसे हैं और इनके अपने-अपने विशेष गुण हैं। इनके संवाद और छुपा छुपी के कारण संसद में रोचक माहौल बना हुआ है।

क्यूआर कोड से बजट पुस्तिका

पहले बजट भाषण के दिन सांसदों, पत्रकारों और आगंतुकों को बजट की किताब दी जाती थी।

इस बार सरकार ने बजट की किताब की बजाय क्यूआर कोड उपलब्ध कराया, जिससे सब लोग आसानी से बजट प्राप्त कर सके।

पूर्व अर्थमंत्री बजट को सूटकेस में लेकर संसद में प्रस्तुत होते थे और रातो सूटकेस बजट का प्रतीक माना जाता था। कुछ अर्थमंत्रियों ने पेड़ी से बने थैले में बजट ले जाने की परंपरा थी।

अर्थमंत्री वाग्ले ने इस बार परंपरा तोड़ी और नेपाली कागज की फाइल में बजट रखा।

रास्वपा ने खुद को पारंपरिक दलों से अलग दिखाने की कोशिश की है। डॉ. वाग्ले ने भी पूर्व अर्थमंत्रियों से अलग छवि बनाने का प्रयास किया। बजट को नेपाली कागजात में लेकर नई शुरुआत की।

पूर्व अर्थमंत्री बजट पढ़ कर आते थे और मीडिया से सवालों के जवाब देते थे।

लेकिन इस बार वाग्ले ने ऐसा नहीं किया। बजट भाषण के अंत में संसद में ही बजट के बाद क्या होगा, इसका उल्लेख किया और मीडिया को कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

इसके बजाय बजट भाषण के बाद वाग्ले ने संसद में शीर्ष संवाद किया। इस संवाद में अर्थमंत्री वाग्ले, प्रधानमंत्री बालेन, रास्वपा के सभापति रवि लामिछाने और प्रवक्ता मनिष झा शामिल थे।

प्रवक्ता झा ने ऑफलाइन सवाल पूछा, ‘प्रत्येक बजट का एक आशय होता है, मैंने अर्थमंत्री से पूछा कि इस बजट के मुख्य आशय क्या हैं?’

पत्रकारों के बहार रखे गए सवालों का जवाब शीर्ष नेताओं से लेने के लिए उन्होंने यह प्रश्न किया।

अर्थमंत्री वाग्ले ने तीन बातें बताईं।

पहला: अर्थव्यवस्था में बड़ा उत्प्रेरण (Big Bang)

दूसरा: पूर्वाधार में बड़ा प्रोत्साहन (Big Push)

तीसरा: सुशासन में बड़ा प्रभाव (Big Hit)

जेनजी आंदोलन के बाद राजनीतिक परिवर्तित सरकारों द्वारा प्रस्तुत इस बजट पर सामाजिक बहस इसी तीन विषय पर हो, यह अर्थमंत्री की इच्छा थी, जिसकी प्रधानमंत्री बालेन और रास्वपा के सभापति लामिछाने ने भी सराहना की।

प्रवक्ता झा ने मिडिया के सामने यही बात रखी।

दो तिहाई बहुमत वाली सरकार द्वारा प्रस्तुत इस बजट का सार समझाते हुए उन्होंने कहा, ‘फेसलेस, कॉन्टैक्टलेस हुआ, घर बैठे डिजिटल लेनदेन संभव हुआ तो व्यक्तिगत मुलाकात न होने से भ्रष्टाचार संबंधी कई कामों पर नियंत्रण किया जा सकता है।’

गोल्डस्टार जूते का चर्चा

प्रधानमंत्री बालेन गंभीर बहस और विचार-विमर्श के बीच भी अलग किस्म के दृश्यों से नागरिकों का ध्यान आकर्षित करते हैं। शुक्रवार को भी ऐसा ही हुआ। वे गोल्डस्टार के जूते पहन कर संसद में उपस्थित थे।

लगभग डेढ़ घंटे तक बजट चर्चा में ध्यानमग्न रहने के दौरान वे कभी- कभी टेबल पर ठोकर मारकर समर्थन जताते रहे। भाषण खत्म होने के बाद उन्होंने नजदीकी सांसदों से हाथ मिलाए।

संसद से बाहर निकलते समय उनकी रास्वपा की विदुषी राणासंँग मुलाकात हुई।

‘मैं बाहर निकल रहा था। वह भी निकलीं और करीब आकर बोलीं – मैंने गोल्डस्टार जूते पहन रखे हैं।’ राणाऐं बताती हैं।

शुरुआत में राणा का अनुमान था ‘नहीं होगा शायद’ लेकिन फिर पता चला ‘है तो सच, हमारी कंपनी के जूते पहने हैं। प्रधानमंत्री ने नेपाल में बने उत्पाद का उपयोग किया, जिससे बहुत खुशी हुई।’

सांसद् राणा गोल्डस्टार जूते कंपनी की प्रमुख भी हैं।

उनके अनुसार गोल्डस्टार का उत्पादन ५५ वर्षों से चल रहा है। वर्तमान में ३ हजार कर्मचारी हैं जिनमें ७० प्रतिशत महिलाएं हैं।

सशस्त्र संघर्ष, नाकाबंदी, भूकंप और कोरोना जैसे कारणों से निर्यात में बाधा आई लेकिन भारत को निर्यात जारी है।

‘इतनी परेशानियों के बावजूद भी हम नेपाल में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री का इसका उपयोग देखकर खुशी हुई।’ उन्होंने कहा।

सांसद राणा ने याद दिलाया कि कुछ समय पहले प्रधानमंत्री ने डी डी सी उत्पाद भी इस्तेमाल किया था। वे बताती हैं, ‘प्रधानमंत्री आंतरिक उत्पादन को बढ़ावा देने वाले देशभक्त हैं।’

प्रधानमंत्री बालेन ने कुछ समय पहले विराटनगर की गार्मेन्ट उद्योग द्वारा निर्मित ट्राउजर पहना था, जिससे युवाओं में ‘बालेन ट्राउजर’ के नाम से चर्चा हुई थी।

शुक्रवार संसद में प्रधानमंत्री द्वारा गोल्डस्टार जूते को भी प्रमोट करना यह पहला मौका है।