प्रधानमंत्री के विकल्प के रूप में रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने भारत जाने वाले हैं?

समाचार सारांश
- राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने 18 जेठ से तीन दिवसीय भारत यात्रा की तैयारी कर रहे हैं।
- प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने विदेश मामलों में कड़ा रुख अपनाते हुए कम से कम एक वर्ष तक कोई विदेश यात्रा नहीं करने की नीति बनाई है।
- सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल के अनुसार, अध्यक्ष लामिछाने की भारत यात्रा व्यक्तिगत और पार्टीगत है, जिसका सरकार से कोई संबंध नहीं है।
१६ जेठ, काठमांडू – प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की यात्रा संबंधी कोई प्रगति न होने के बीच राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के अध्यक्ष रवि लामिछाने इस सप्ताह भारत यात्रा की तैयारी में हैं।
जहाँ प्रधानमंत्री पार्टी अध्यक्ष नहीं हैं, वहीं अध्यक्ष लामिछाने प्रधानमंत्री माने जाने वाले बालेंद्र शाह से पहले भारत जाने वाले हैं।
राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी प्रमुख की यात्रा सरकार प्रमुख से पहले होना स्वाभाविक है। डॉ. संजीव हुमागाईं के अनुसार, इस तरह की यात्राएँ कोई नई प्रथा या ‘‘डिपार्चर’’ नहीं हैं, बल्कि कूटनीतिक परंपरा का हिस्सा हैं।
‘इसे सरकार के पतन का संकेत न माना जाए बेहतर होगा। अतीत में कुछ षड़यंत्र प्रचार हुए, लेकिन ऐसी यात्राओं को सामान्य रूप से लेना चाहिए,’ हुमागाईं ने कहा।
हालांकि पार्टी अध्यक्ष की यात्रा को सामान्य माना जाता है, फिर भी सरकार इसको और ऊँचा दर्जा देने की संभावना पर अभी तक कोई ध्यान नहीं दे रही है।

प्रधानमंत्री की भारत यात्रा नहीं होने के बावजूद अध्यक्ष लामिछाने को सरकार की ओर से राजदूत के रूप में भारत भेजा जा सकता है, ऐसा हुमागाईं का मानना है।
‘अगर यह पार्टी स्तर की यात्रा नहीं होती, बल्कि नेपाल सरकार का प्रतिनिधित्व करती और विदेश मंत्री के साथ होती, तो यह अधिक उच्चस्तरीय होती,’ उन्होंने कहा।
पहले भी सत्ता में या प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री की आधिकारिक यात्रा से पहले भारत की यात्रा की है।
फरवरी 2010 में नेकपा एमाले अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने शांति प्रक्रिया, राजनीतिक स्थिरता और दलों के बीच सहमति के लिए नई दिल्ली यात्रा की थी, जब माधवकुमार नेपाल प्रधानमंत्री थे।
उस दौरान ओली ने तत्कालीन भारतीय विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा सहित उच्च अधिकारियों से मुलाकात की थी।
सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने रास्वपा अध्यक्ष लामिछाने की भारत यात्रा व्यक्तिगत और पार्टीगत होने की पुष्टि की है। मंत्री समिति की बैठक के बाद पोखरेल ने कहा कि यह यात्रा प्रधानमंत्री और सरकार की नहीं है।
‘प्रधानमंत्री अभी विदेश नहीं जाएंगे, उनका समय अत्यंत व्यस्त है। इसलिए अध्यक्ष अपने तरीके से यात्रा कर रहे हैं,’ उन्होंने बताया।

भारत के पूर्व राजदूत लोकराज बराल ने ऐसी यात्राओं को सामान्य एवं स्वाभाविक मानने की सलाह दी है।
‘इसे सामान्य समझना चाहिए। पहले भी प्रधानमंत्री से पहले पार्टी प्रमुख विदेश यात्रा कर चुके हैं,’ उन्होंने कहा।
बराल के अनुसार, पड़ोसी देशों और उनकी राजनीतिक पार्टियों के साथ संबंध बनाने के लिए ऐसी यात्राएं सहायक होती हैं।
‘हर देश अपने पड़ोसी देश के सत्तारूढ़ दल से अच्छे संबंध बनाने को उत्सुक होता है। मैं भारत में राजदूत था, वहां भी ऐसी बातों का अनुभव किया,’ बराल ने बताया।
प्रधानमंत्री न जाने पर अध्यक्ष को अवसर
फागुन 21 के चुनाव के बाद लगभग दो तिहाई बहुमत प्राप्त करने वाले रास्वपा अध्यक्ष लामिछाने की यह पहली विदेश यात्रा होगी।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, लामिछाने 18 जेठ को भारत जाएंगे और 20 को लौटेंगे। अभी तक दोनों पक्षों ने इस यात्रा की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
यात्रा के दौरान वह भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से मिलने वाले हैं।
पहले भारतीय प्रधानमंत्री ने ही बालेंद्र शाह को यात्रा का निमंत्रण दिया था। नरेंद्र मोदी ने शाह को बधाई संदेश भेजते हुए भारत यात्रा का भी आमंत्रण दिया था। फिर भी प्रधानमंत्री शाह की भारत यात्रा अभी तक तय नहीं हुई है।
प्रधानमंत्री शाह ने 27 मार्च 2026 को पद ग्रहण करने के बाद मोदी से मिलने से बधाई और भारत यात्रा का निमंत्रण प्राप्त किया था।

लेकिन रास्वपा ने जल्दी ही एक बयान जारी कर कहा था कि प्रधानमंत्री कम से कम एक वर्ष तक विदेश यात्रा नहीं करेंगे। इसलिए न केवल भारत, बल्कि अन्य देशों की यात्रा की तारीख भी तय नहीं हो पाई है।
सरकार बनने के दो महीनों में प्रधानमंत्री शाह ने कूटनीतिक मामलों में कड़ा रुख अपनाया है।
काठमांडू में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नए प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत रूप से मिलकर बधाई देना चाहा था, जो आम प्रथा मानी जाती थी।
लेकिन शाह ने विदेशी राजदूतों के साथ व्यक्तिगत मुलाकातें तोड़कर उन्हें समूह में मिला, इसने भारत को दिया जाने वाला विशेष सम्मान की परंपरा को तोड़ने जैसा प्रतीत हुआ है।
भारत ने लिपुलेक होते हुए कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्रा मार्ग शुरू करने की घोषणा के बाद, 3 मई 2026 को विदेश मंत्रालय ने औपचारिक रूप से कहा कि महाकाली नदी के पूर्व के लिम्पियाधुरा, लिपुलेक और कालापानी नेपाल का अभिन्न हिस्सा हैं। सरकार ने भारत और चीन दोनों को कूटनीतिक नोट भेजकर आपत्ति जताई थी।
इन घटनाओं के बीच 11 मई 2026 को होने की उम्मीद की जाने वाली भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की दो दिन की नेपाल यात्रा स्थगित हो गई। यह यात्रा मार्च के अंत में मॉरीशस में शिशिर खनाल और एस जयशंकर के बीच हुई चर्चा के बाद तय हुई थी।

यह यात्रा प्रधानमंत्री शाह को औपचारिक रूप से भारत यात्रा का निमंत्रण देने और द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए निर्धारित थी। लेकिन सूत्रों के अनुसार, शाह ने मिस्री से मिलने से मना करने के कारण यात्रा स्थगित हुई।
प्रधानमंत्री शाह का यह रवैया सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। अप्रैल 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत सेर्जियो गोर नेपाल आए। भारत के लिए अमेरिकी राजदूत भी रहे गोर ट्रम्प के करीबी माने जाते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री शाह ने उन्हें भी मिलने से इनकार किया।
इसके अलावा अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री समीर पल कपूर भी शाह से मिलने नहीं पाए। इस खबर ने चर्चा पैदा की। प्रधानमंत्री के सचिवालय ने व्यस्तता बताकर इसे नई कूटनीतिक प्रोटोकॉल बताया।
प्रधानमंत्री की यात्रा तय न होने के कारण विदेश मंत्री शिशिर खनाल की भारत यात्रा भी रद्द हुई। खनाल 18 जेठ को भारत जाने वाले थे, लेकिन भारत सरकार द्वारा 1 जून को होने वाले अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस सम्मेलन को स्थगित करने के बाद उनकी यात्रा भी रद्द कर दी गई।
यह सम्मेलन चौथे इंडिया-अफ्रीका फोरम सम्मेलन के साथ आयोजित होना था।





