पूर्वप्रहरी गणेश कार्की लूटपाट और हत्या में संलिप्त, पुलिस ने किया गिरफ्तार

काठमांडू के सुकेधारा में महिला को लूटने के दौरान फरार हुए पूर्वप्रहरी गणेश कार्की को पुलिस ने गोली चलाकर गिरफ्तार किया है। कार्की के पास से लूटा हुआ सुन का बाली, मोबाइल और खुकुरी बरामद किया गया है और उसके सहयोगी विष्णु गुरुङ को भी गिरफ्तार किया गया है। कार्की पहले से कर्तव्य हत्या और डाका चोरी के मामलों में सजा भुगत चुका था और पिछले भदौ में केंद्रीय कारागार सुन्धारा से फरार हुआ था।
१७ जेठ, काठमांडू। शनिवार दोपहर १:२३ बजे सुकेधारा में एक महिला लूटी गई। रास्ते पर चलते समय अचानक महिला की आंखों में मिर्ची का धूल फेंका गया। पीड़ा में उसने अपनी आंखें मलनी शुरू कीं। उसी दौरान दो व्यक्तियों ने उसका शरीर तांत्रिक जांच की और गले में पहने एक तोला सुन का बाली तथा मोबाइल छीनकर भाग गए। घटना के बाद महिला ने पुलिस को सूचना दी। तकनीकी विश्लेषण और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से पुलिस ने जांच शुरू की। जिला पुलिस परिसर काठमांडू की टीम ने जांच के दौरान लूटपाट में संलिप्त व्यक्ति की पहचान की, वह ४० वर्षीय गणेश कार्की हैं जो बुढानीलकण्ठ नगरपालिका-३ चपली भद्रकाली के निवासी हैं।
पुलिस के अनुसार, जांच में संलग्न टीम ने घटना के ८ घंटे बाद शनिवार रात ९:२५ बजे काठमांडू महानगरपालिका-३२ जड़ीबूटी मनोहरा खोला कोरिडोर में कार्की को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार करते समय कार्की ने पुलिसकर्मियों की आंखों में मिर्ची का धूल फेंका और खुकुरी से हमला करने का प्रयास किया, जिस पर पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए गोली चलाकर उसे काबू किया। कार्की बाएं पैर के घुटने में गोली लगने से घायल हुआ और फिलहाल राष्ट्रीय ट्रॉमा सेंटर में उसका उपचार चल रहा है।
कार्की के पास से सुकेधारा में लूटे गए सुन का बाली, मोबाइल और खुकुरी बरामद हुए हैं। इस घटना में कार्की के सहयोगी विष्णु गुरुङ, जो इलाम के रहने वाले हैं और धर्मशाला में बसे हैं, को भी गिरफ्तार किया गया है। विष्णु पहले तीन साल की जेल की सजा काटने के बाद बाहर आया था और उसके खिलाफ नशे के मामलों में मामला चल रहा था।
मिर्ची का धूल हमेशा अपने साथ रखने वाले कार्की को पुलिस ने गोली चलाकर पकड़ते समय भी मिर्ची का धूल बरामद किया। उसने सुकेधारा में लूटपाट के दौरान महिला की आंखों में मिर्ची का धूल फेंका था। इससे पहले भी जेएनजी आंदोलन के दौरान कारागार से भागते वक्त उसने पुलिस पर मिर्ची का धूल फेंककर भागने की कोशिश की थी।
एसपी पवनकुमार भट्टराई के अनुसार, कार्की की यह शैली रही है कि चाहे पुलिस उसे पकड़ने आए या अपराध के दौरान, उसके पास हमेशा मिर्ची का धूल होता है। कार्की ने कपन क्षेत्र में भी पुलिस पर मिर्ची का धूल फेंका था।
कार्की को आठ महीनों में नौ बार अपराधी घटनाओं में गोली चलाने के बाद गिरफ्तार किया गया है। वह पिछले भदौ में जेएनजी आंदोलन के दौरान केंद्रीय कारागार सुन्धारा से भाग चुका था। भागने के बाद उसने क्रमवार अपराध किए। पकड़े जाते समय उसने मिर्ची का धूल फेंककर भागने का प्रयास किया। कपन, गौशाला, तिलगंगा, शान्तिनगर सहित कई जगहों पर वह चोरी, लूटपाट और नशे के मामलों में भी संलिप्त था। विशेषकर पशुपति और गौशाला इलाकों में उसकी सक्रियता थी।
कार्की पहले पुलिस में ही था। वह २०६१ साल में पुलिस जवान के पद पर भर्ती हुआ था। लेकिन करीब दो साल नौकरी करने के बाद २०६४ साल में पुलिस छोड़ दिया था। पुलिस से निकलने के बाद उसने अपराध की दुनिया में प्रवेश किया और सामान्य चोरी से लेकर हत्या तक के मामलों में शामिल रहा। २०६४ साल में अभद्र व्यवहार, हथियार नियंत्रण में न रखने और हत्या जैसे मामलों में फंस चुका था।
व्यक्ति हत्या के मामले में दोषी पाये जाने पर कार्की २ वैशाख २०६८ को गिरफ्तार हुआ और बाद में दस साल की सजा पाई। संविधान दिवस पर कैद माफी पाकर ३ असोज २०७८ को जेल से छूटा, लेकिन इसके बाद भी वह अपराधों में संलिप्त रहा। २०७८ साल से उसे डाका चोरी का आरोपी बनाया गया था और वह भदौ में जेएनजी आंदोलन के दौरान जेल से फरार हो गया था।
भागने के बाद वह पुलिस पर मिर्ची का धूल फेंकते हुए भारत गया। कुछ समय भारत में रहने के बाद वापस काठमांडू आकर चोरी और लूटपाट के धंधे में सक्रिय हो गया।





