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ट्रम्प का दावा – ‘ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता जताई है’

१८ जेठ, काठमाडौँ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान ने परमाणु हथियार विकसित न करने की गारंटी दी है। उन्होंने ईरान के साथ संभावित समझौते में परमाणु हथियार निर्माण रोकना अपनी मुख्य प्राथमिकता बताया है। फॉक्स न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में ट्रम्प ने कहा, ‘मुझे जो भी गारंटी चाहिए वह परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता है। ईरान ने इस पर सहमति व्यक्त की है।’

इसी बीच, अमेरिकी मीडिया के अनुसार ट्रम्प प्रशासन ने ईरान को कड़े शर्तों के साथ एक नई शांति प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव की विषयवस्तु सार्वजनिक नहीं की गई है। ट्रम्प ने संभावित समझौते के तहत ईरान को परमाणु हथियार विकास से रोकने तथा विश्व ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को पूरी तरह से सक्रिय करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। हालांकि, ईरान ने ट्रम्प के दावों पर संदेह जताया है।

ईरानी मीडिया के मुताबिक़ तेहरान ने अपनी परमाणु कार्यक्रम पर ठोस वार्ता से पूर्व विदेशों में फंसे १२ अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर संपत्ति की रिहाई की मांग की है। ईरान ने ट्रम्प के ‘संवर्धित यूरेनियम नष्ट किया गया’ के दावे को निराधार बताया है। साथ ही, किसी भी युद्धविराम या शांति समझौते में लेबनान को भी शामिल करने की अपनी अड़ान जताई है।

इज़रायल ने लेबनान में ईरान समर्थित समूह हिज़बुल्लाह के खिलाफ लक्षित हवाई हमलों का दावा किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पिट हेगसेथ ने भी ट्रम्प की बातों का समर्थन किया है। सिंगापुर में सम्पन्न सांग्रिला डायलॉग में उन्होंने कहा कि आवश्यकतानुसार अमेरिका पुनः सैन्य कार्रवाई करने में पूरी सक्षम है। पिछले अप्रैल में पाकिस्तान की मध्यस्थता में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच अस्थायी युद्धविराम हुआ था। तब से दैनिक नियमित हमले रुके हैं, हालांकि कुछ सशस्त्र घटनाएं जारी हैं।

विश्व तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग माना जाने वाला होर्मुज जलसंधि में युद्ध के बाद आई बाधा ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि की है। इसने अमेरिका सहित वैश्विक आर्थिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है। विश्लेषकों के अनुसार इसी वजह से ट्रम्प प्रशासन पर ईरान के साथ किसी न किसी समझौते के लिए दबाव बढ़ रहा है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया के माध्यम से संभावित समझौते के अंतर्गत होर्मुज मार्ग खोलने की घोषणा की थी और कहा था कि ईरान वहां से गुजरने वाले जहाजों से कोई शुल्क नहीं लेगा। लेकिन, ईरानी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, समझौते के मसौदे में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।