
प्रधानमंत्री बालेन शाह द्वारा व्यक्त किए गए कि नेपाल ने भी भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है, की खबर के बाद संसद और सड़कों पर इसका व्यापक विरोध और चर्चा शुरू हो गई है। पश्चिम नवलपरासी के सुस्ता में निर्माणाधीन बांध के संबंध में भारतीय सीमा सुरक्षा बल ने जिला अधिकारी स्तर पर चर्चा कर कार्य को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है। सशस्त्र पुलिस ने पिछले तीन आर्थिक वर्षों में 2,690 सीमा स्तंभों की मरम्मत की है, जबकि भारतीय पक्ष की सक्रियता अपेक्षाकृत कम देखी गई है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में सांसदों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा, ‘‘मैं प्रधानमंत्री बनने के बाद ही जान पाया कि न केवल भारत ने, बल्कि नेपाल ने भी भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है। इस विषय पर दोनों पक्षों को मिलकर समाधान निकालना आवश्यक है।’’ उन्होंने बताया कि भारत ने नेपाली क्षेत्रों लिपुलेक, लिम्पियाधुरा और कालापानी पर कब्जा किया है, वहीं नेपाल ने भी सीमाओं का अतिक्रमण किया है। उनकी इस अभिव्यक्ति के कारण संसद और सड़कों दोनों जगह गहरा विवाद छिड़ गया है। विपक्षी दलों ने संसद के रिकॉर्ड से इस अभिव्यक्ति को हटाने की मांग की है।
सीमावासी विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं। सशस्त्र पुलिस के सीमा विभाग में सेवा देकर सेवानिवृत्त पूर्व एआईजी के अनुसार विशेष रूप से southern सीमाओं पर विवाद होते रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान सीमा संबंधी समस्याएं और बढ़ गईं। पूर्व एआईजी नारायणबाबु थापा ने बताया कि सीमावासियों की भूमिका प्रथम सीमा रक्षक के समान है, इसलिए वे जो समस्याएं झेलते हैं, उस पर जानकारी दी गई है।
पश्चिम नवलपरासी के सुस्ता में बांध निर्माण का कार्य जारी है। ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय द्वारा तटबंध निर्माण कार्य लगातार चल रहा है। करीब 14 करोड़ रुपये की ठेका राशि से यह कार्य हो रहा है। सीमा क्षेत्र में सशस्त्र पुलिस के एसपी गोविन्द खाती और सीडीओ दीपक नेपाली सहित की एक टीम ने अनुगमन किया है। भारतीय सीमा सुरक्षा बल ने नए बांध के निर्माण से पहले चर्चा की आवश्यकता जताई है, जिसकी जानकारी सुरक्षा अधिकारियों ने दी है।





