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छत्रकोट गाउँपालिकामा ४ हजार से अधिक विद्यार्थियों के हृदय परीक्षण का कार्य प्रारंभ

समाचार सारांश

संपादकीय रूपमा समीक्षा गरिएको।

  • गुल्मी के छत्रकोट गाउँपालिकास्थित ४० विद्यालयों के ४ हजार १९६ विद्यार्थियों का हृदय परीक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है।
  • नेपाल हृदय रोग निवारण प्रतिष्ठान गुल्मी के संयोजन में संचालित इस कार्यक्रम में हृदय रोग से पीड़ित विद्यार्थियों को उपचार में सहयोग दिया जाएगा।
  • पहले गुल्मी दरबार गाउँपालिका में किए गए परीक्षण में ३ हजार ९५० विद्यार्थियों में से १० विद्यार्थी हृदय समस्या से ग्रस्त पाए गए थे।

१९ जेठ, गुल्मी। गुल्मी जिले के छत्रकोट गाउँपालिका के विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के हृदय परीक्षण का कार्य शुरू किया गया है। यह कार्यक्रम नेपाल हृदय रोग निवारण प्रतिष्ठान गुल्मी के संयोजन तथा छत्रकोट गाउँपालिका के आयोजन में चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत गाउँपालिका की ४० विद्यालयों के ४ हजार १९६ विद्यार्थियों का हृदय परीक्षण किया जाएगा।

कार्यक्रम की शुरुआत छत्रकोट गाउँपालिका स्थित सरस्वती माध्यमिक विद्यालय से की गई है। वरिष्ठ हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. सुमनता बन्जाडे और डॉ. प्रदीप पाण्डे के नेतृत्व में विद्यार्थियों का हृदय परीक्षण किया जा रहा है।

जरूरत पड़ने पर विद्यार्थियों का इकोकार्डियोग्राफी द्वारा भी परीक्षण किया जाएगा ताकि बीमारी की पहचान की जा सके, इसकी व्यवस्था नेपाल हृदय रोग निवारण प्रतिष्ठान गुल्मी के अध्यक्ष ताराप्रसाद भुसाल ने बताई। उनके अनुसार, परीक्षण के दौरान यदि हृदय रोग वाले विद्यार्थी पाए जाते हैं, तो उनके आवश्यक उपचार की व्यवस्था में प्रतिष्ठान सहायता करेगा।

छत्रकोट गाउँपालिका के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी राजन पाण्डे ने बताया कि विद्यार्थी स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए गाउँपालिका ने बजट आवंटित कर इस कार्यक्रम को संचालित किया है। उन्होंने कहा कि समय पर हृदय रोग की पहचान और उपचार के लिए यह अभियान प्रभावकारी और सफल है।

लगभग दो सप्ताह पहले गुल्मी दरबार गाउँपालिका में भी इसी प्रकार का कार्यक्रम संचालित किया गया था। ३ हजार ९५० विद्यार्थियों के हृदय परीक्षण में १० विद्यार्थियों में हृदय संबंधी समस्या पाई गई थी, जिन्हें वरिष्ठ हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. सुमनता बन्जाडे ने जानकारी दी। उनमें से ८ विद्यार्थियों ने औषधि उपचार शुरू किया है एवं २ विद्यार्थियों को अधिक उपचार के लिए काठमांडू भेजा गया है।

नेपाल हृदय रोग निवारण प्रतिष्ठान के केंद्रीय सदस्य अखिलेश्वरप्रसाद पाण्डे ने बताया कि बाल बच्चों में हृदय रोग का प्रारंभिक चरण में पहचान हो जाने पर उपचार सरल हो जाता है। उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार भी उपचार की व्यवस्था करती है, जिससे ऐसे कार्यक्रम अत्यंत प्रभावी होते हैं।

हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. सुमनता बन्जाडे के अनुसार, विद्यालय स्तर के बाल बच्चों में रूमेटिक हृदय रोग का खतरा अधिक होता है। घुटनों में दर्द, गले में दर्द, थूक निगलने में कठिनाई, टांसिल की वृद्धि तथा जोड़ों में दर्द जैसी समस्याओं का समय पर उपचार न करने पर रूमेटिक हृदय रोग हो सकता है, इसलिए जागरूकता और परीक्षण आवश्यक है। वे बाल बच्चों की खान-पान और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने पर जोर देती हैं। अस्वच्छ वातावरण में खेलने और अनुचित खान-पान की वजह से गले में संक्रमण होता है, जो हृदय तक प्रभाव डाल सकता है।

चिकित्सकों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान मां द्वारा जानबूझकर या अनजाने में कड़ी दवाइयां लेने, धूम्रपान, मद्यपान तथा अत्यधिक तनाव के कारण भी बच्चे के हृदय वाल्व में समस्या हो सकती है। नेपाल हृदय रोग प्रतिष्ठान गुल्मी के अध्यक्ष ताराप्रसाद भुसाल ने ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह के स्वास्थ्य परीक्षण अभियानों को बाल बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान मानते हुए विश्वास जताया।