Skip to main content

वासिंगटन में शांति वार्ता, खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले जारी

२० जेठ, काठमाडौं। पिछले दो दिनों से लेबनान और इजरायल के प्रतिनिधि वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी विदेश मंत्रालय में वार्ता कर रहे हैं। यह वार्ता इजरायल और लेबनान के बीच जारी युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से हो रही है। लेबनानी वार्ताकारों का मानना है कि इस वार्ता से उनके देश पर हो रहे हमले रुकेंगे। फिलहाल इजरायल लेबनान पर सन् २००० के बाद से सबसे तेज हमला कर रहा है। हिजबुल्लाह भी इजरायल पर हमले जारी रखे हुए है। लेबनानी स्रोतों के अनुसार, २ मार्च से इजरायली हमलों में लेबनान में ३,४६८ लोगों की मौत हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया की खबरों के अनुसार दोनों पक्ष इस युद्ध को खत्म करने के इच्छुक दिख रहे हैं। लेकिन समझौते की सफलता को लेकर संदेह बरकरार है। हालिया वार्ता में भी इजरायल द्वारा लेबनान पर हमला जारी रखना वार्ता असफल होने का संकेत माना गया है।

सन् २०२४ में अमेरिका और फ्रांस के मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच वार्ता हुई थी और २७ नवंबर को ६० दिन का युद्धविराम समझौता हुआ था। इस समझौते के अनुसार इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान से वापस लौटेगी और हिजबुल्लाह लिटानी नदी के उत्तर में नहीं जाएगा। परंतु सन् २०२६ में हिजबुल्लाह के पुनः हमले और इजरायल के कड़े जवाब के कारण समझौता पूरी तरह टूट गया। इससे पहले भी कई ऐसी वार्ताएं हुईं, जो असफल रही हैं। इजरायल और लेबनान की शर्तें अलग हैं, लेकिन लेबनान सरकार पूरी तरह युद्धविराम के प्रयास में लगी है। हालांकि वार्ता के दौरान इजरायली सेना लेबनान पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रही है।

इजरायल ने हिजबुल्लाह को निरस्त्रीकरण करने का दृढ़ प्रमाण खोजने के लिए लेबनान सरकार से मांग रखी है। लेबनान इसमें सहमत है, लेकिन पहले अपने दक्षिणी क्षेत्र से इजरायली सेना के वापस आने की इच्छा रखता है। सेना वापसी के बाद १२ लाख से अधिक विस्थापित लोग अपने घर लौट पाएंगे, ऐसा उनका कहना है। इसके बाद ही हिजबुल्लाह का निरस्त्रीकरण और इजरायली हमले से हुए नुकसान की पुनर्निर्माण के रास्ते खुलेगा, यह लेबनान की बात है। हाल ही में शुक्रवार को लेबनानी और इजरायली सैन्य प्रतिनिधियों की बैठक भी हुई थी। ये वार्ताएं लेबनान सरकार और इजरायल के बीच हो रही हैं, जबकि इजरायल से युद्धरत ईरान समर्थित हिजबुल्लाह इसमें शामिल नहीं है।

इजरायल के अनुसार हिजबुल्लाह को निरस्त्रीकृत करने पर दोनों पक्ष सहमत हैं। कुछ इजरायली अधिकारी जल्द ही दोनों देशों के बीच व्यापार और पर्यटन के आदान-प्रदान की संभावना का संकेत दे चुके हैं। लेकिन लेबनान ने सन् १९४९ के युद्धविराम (आर्मिस्टिस एग्रीमेंट) के समीप रहकर सहमति खोजने की बात कही है। पिछले वार्ता में लेबनान ने २०२४ के समझौते के बाद इजरायली हमलों से हुए नुकसान का विवरण प्रस्तुत किया। ईरान से जुड़ा संघर्ष इजरायल और लेबनान के युद्ध को अमेरिका-ईरान के द्वंद्व से अलग नहीं देखा जा सकता।

२८ फ़रवरी को अमेरिकी और इजरायली सैन्य हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली खामेनी की मृत्यु हुई थी। खामेनी की हत्या के दो दिन बाद ही हिजबुल्लाह ने युद्धविराम का उल्लंघन करते हुए इजरायल की ओर छह मिसाइल दागीं। हिजबुल्लाह को ईरान का सबसे मजबूत प्रचार समूह माना जाता है। उस हमले के बाद इजरायल ने पुनः लेबनान पर हमला बढ़ाया और दक्षिणी लेबनान में बनाया गया बफर जोन लिटानी नदी पार कर जाहरानी नदी की ओर बढ़ा। ईरान ने संयुक्त राज्य के साथ हालिया वार्ता में लेबनान के मुद्दे को अपनी शर्त के रूप में रखा है।

ईरान ने भी प्रतिक्रिया देना बंद नहीं किया है। इजरायल और लेबनान के बीच वाशिंगटन में वार्ता जारी रहते हुए ईरान ने कुवेत और बहरीन को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल से हमला किया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मंगलवार रात खाड़ी क्षेत्र में हमला किया। कुवैत में उस हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए। इस घटना के बदले में अमेरिकी सेना ने केसमू द्वीप पर स्थित IRGC संचार टावर पर हमला किया है। IRGC के हमले पर यूएई, सऊदी अरब, कतर, ओमान और जॉर्डन ने कड़ी निंदा की है। यूएई ने कुवेत पर हुए हमले को ’आतंकवादी कार्रवाई‘ बताया है।