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शीतलनिवास में युगकवि सिद्धिचरण श्रेष्ठ की 115वीं जयंती, क्षेत्री और शर्मा को सम्मानित किया गया (तस्वीरें)

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा के बाद तैयार किया गया।

  • युगकवि सिद्धिचरण श्रेष्ठ की 115वीं जयंती के अवसर पर डॉ. दुबसु क्षेत्री और डॉ. गार्गी शर्मा को युगकवि सिद्धिचरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • शीतलनिवास में आयोजित विशेष समारोह में राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने उन्हें क्रमशः वर्ष 2082 और 2083 का यह पुरस्कार प्रदान किया।
  • समारोह में राष्ट्रपति पौडेल ने नेपाली भाषा, साहित्य और संस्कृति को मौलिक पहचान और गौरव के रूप में वर्णित किया।

22 जेठ, क़ाठमांडू। युगकवि सिद्धिचरण पुरस्कार समारोह में डॉ. दुबसु क्षेत्री और डॉ. गार्गी शर्मा को सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति निवास शीतलनिवास में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उन्हें युगकवि सिद्धिचरण पुरस्कार प्रदान किया गया।

युगकवि सिद्धिचरण श्रेष्ठ की 115वीं जयंती के अवसर पर डॉ. क्षेत्री को वर्ष 2025 (नया संवत 2082) और डॉ. शर्मा को वर्ष 2026 (नया संवत 2083) के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी प्रस्तुत की गईं।

अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने नेपाली भाषा, साहित्य और संस्कृति को हमारी मौलिक पहचान और गर्व का प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा कि साहित्य केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं बल्कि समाज को सचेत, जागरूक और संवेदनशील बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

‘साहित्य हमारे समाज, जनजीवन, लोकतंत्र, रूपांतरण, परिवर्तन, देशभक्ति और सामाजिक न्याय के लिए प्रेरणा प्रदान करता है और एक सभ्य, सुसंस्कृत समाज के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान देता है। यह समुदाय को जोड़ने, जागरूक बनाने और उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर करने की क्षमता रखता है,’ राष्ट्रपति पौडेल ने कहा।

राष्ट्रपति ने नेपाली भाषा, साहित्य, जनचेतना और राष्ट्रीय भावना के विकास में युगकवि सिद्धिचरण श्रेष्ठ के योगदान को भी याद करते हुए सम्मान व्यक्त किया।

राष्ट्रपति पौडेल ने जन्मभूमि के प्रति गहरा प्रेम, राष्ट्र के प्रति आस्था और जनजीवन के प्रति संवेदनशीलता को अभिव्यक्त करने वाली युगकवि सिद्धिचरण श्रेष्ठ की कविता ‘मेरा प्यारा ओखलढुंगा’ को जन्मभूमि के प्रति अगाध प्रेम की एक अविस्मरणीय रचना माना।