
रुकुमपूर्व के पुथा उत्तरगंगा गाउँपालिका–५ में स्थित ठाँकुर क्षेत्र में वर्षा ऋतु के आरम्भ होते ही ढोरपाटन के गोठाल अपने भैंसों के साथ पहुंच गए हैं। समुद्र सतह से चार हजार मीटर की ऊँचाई पर विस्तारित यह विशाल घास का मैदान भैंस चराने की पारंपरिक गोठाल जीवनशैली को जीवित रखे हुए है। प्राकृतिक सौंदर्य और प्राचीन सांस्कृतिक जीवनशैली की झलक दिखाने वाला यह ठाँकुर क्षेत्र रुकुमपूर्व का एक प्रमुख पर्यटक स्थल है। २९ जेठ, रुकुमपूर्व।
समुद्र सतह से चार हजार मीटर की ऊँचाई पर बसा रुकुमपूर्व के पुथा उत्तरगंगा गाउँपालिका–५ का ठाँकुर बेहद आकर्षक स्थान है। प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण ठाँकुर के वृहद हरे भरे मैदानों में इस समय भैंसों के समूह देखे जा सकते हैं। वर्षा ऋतु के आरंभ होते ही ढोरपाटन क्षेत्र के गोठाल भैंस लेकर ठाँकुर में आ जाते हैं। घने जंगलों और ऊंचे हिमालयी पहाड़ों के बीच फैला यह मैदान भैंसों और गोठालों के अस्थायी आवास का स्थल भी है।
आधुनिक जीवनशैली के प्रभाव के बावजूद ढोरपाटन के ये पुराने गोठाल अपनी परंपराओं को कभी नहीं छोड़ते हैं। इसलिए ठाँकुर के इस विस्तृत मैदान में आज भी भैंस चरती देखी जा सकती हैं। वहां का वातावरण, गोठालों की दिनचर्या और पीछे छिपे हिमालयी पहाड़ के हरित पहाड़ियां यहाँ के दृश्य को अनोखा बनाती हैं। यह न केवल प्राकृतिक सुंदरता प्रदान करता है, बल्कि प्राचीन सांस्कृतिक जीवन की भी झलक प्रस्तुत करता है। यह क्षेत्र रुकुमपूर्व का एक महत्वपूर्ण पर्यटक आकर्षण भी है।





