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ऊर्जा संकट के बीच रूस ने दक्षिण-पूर्वी एशिया के लिए ‘तीसरी शक्ति’ के विकल्प के रूप में खुद को स्थापित किया

रूस ने कज़ान में आयोजित ‘आसियान–रूस स्मृति शिखर सम्मेलन’ के माध्यम से दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति का विश्वसनीय विकल्प बनने का दावा किया है। रूस लाओस के साथ परमाणु ऊर्जा के उपयोग और मलेशिया के साथ पेट्रोलियम उत्पादों की दीर्घकालिक आपूर्ति समझौता करने की तैयारी कर रहा है। विश्लेषकों के अनुसार ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ा होने के बावजूद आसियान क्षेत्र में रूस का व्यापार और प्रभाव चीन और अमेरिका की तुलना में काफी कम है। ७ असार, काठमांडू।
दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश वर्तमान में ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितताओं और अस्थिरताओं का सामना कर रहे हैं। वे ईरान संघर्ष के प्रभाव और अमेरिका-चीन के प्रतिस्पर्धा के दबाव में हैं। इसी पृष्ठभूमि में रूस ने इस क्षेत्र के लिए एक भरोसेमंद ‘तीसरी शक्ति’ के विकल्प के रूप में अपनी स्थिति बनाना शुरू कर दिया है, ऐसा विश्लेषकों का कहना है। रूस की यह रणनीति कज़ान में आयोजित ‘आसियान–रूस स्मृति शिखर सम्मेलन’ में स्पष्ट रूप से जाहीर हुई। सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने क्षेत्रीय नेताओं से मुलाकात की और दोनों पक्षों ने राजनीतिक एवं आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर सहमति जताई।
इस दौरान कई द्विपक्षीय समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए। इस सम्मेलन ने रूस को ‘आसियान’ (दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों का संगठन) के साथ निकटता बढ़ाने का एक और मंच प्रदान किया। इस क्षेत्र के कई सरकारें अपनी ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण करना चाहती हैं। वे अपनी कूटनीतिक विकल्पों को खुला रखने और वाशिंगटन या बीजिंग दोनों में से किसी एक के पूर्ण वश में आने से बचने के लिए प्रयासरत हैं। इस सप्ताह रूस ने ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। उसने लाओस के साथ शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा उपयोग के लिए एक सहयोगात्मक रूपरेखा पर हस्ताक्षर किए। लाओस ने 2050 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है और इसके लिए रूसी डिजाइन की परमाणु पावर प्लांट को अपने देश में बनाने की संभावनाओं की तलाश कर रहा है।
रूस ने मलेशिया को पेट्रोलियम, तेल और गैस की आपूर्ति की गारंटी भी दी है। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने पत्रकारों से कहा कि इस दिशा में ‘दीर्घकालिक समझौता’ तैयार किया जा रहा है। इसी बीच, रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी ‘रोसाटॉम’ के महानिदेशक अलेक्जेई लिकाचेव ने इंडोनेशिया की रूचि की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इंडोनेशिया फ्लोटिंग परमाणु पावर प्लांट विकसित करने की योजना बना रहा है और इसके लिए परमाणु तकनीक में गहरी रुचि दिखा रहा है। शिखर सम्मेलन में इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुगियोनो ने रूस के साथ सहयोग बढ़ाने की अपील की।
वैश्विक संघर्षों से उत्पन्न व्यवधानों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता और लचीलापन मजबूत बनाने की आवश्यकता बताते हुए विदेश मंत्री सुगियोनो ने कहा, ‘अब हम पूरे आसियान क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और ऊर्जा संक्रमण को गति देने के लिए निवेश कर रहे हैं। इन प्रयासों को जारी रखने के लिए आसियान अकेले नहीं चल सकता। हमारे बाहरी साझेदारों की गुणवत्ता हमारे सहयोग की क्षमता को अधिक मजबूत बनाती है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अपने साझेदार चुनने का अधिकार हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है। इसलिए रूस के साथ हमारी बातचीत अत्यंत महत्वपूर्ण है।’