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एफएटीएफ : नेपाल ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर होने में असफल, परिसंपत्ति शुद्धिकरण पर समझ सुधारने की सलाह क्यों

गत साता हुआ एफएटीएफ का बैठक में पदाधिकारी

तस्वीर स्रोत, FATF

नई सरकार की उम्मीदों के विपरीत, नेपाल वित्तीय अपराधों में अंतरराष्ट्रीय कड़ी निगरानी की सूचियों से बाहर नहीं निकल पाया है। उस संस्था ने देश में परिसंपत्ति शुद्धिकरण और आतंकवादी गतिविधियों के प्रति कम समझ को प्रमुख कारण के रूप में बताया है।

बालेन्द्र शाह ‘बालेन’ की अगुवाई वाली सरकार के गठन के दो महीने न भी हुए थे कि परिसंपत्ति शुद्धिकरण से संबंधित एशिया पैसिफिक ग्रुप (एपीजी) के प्रतिनिधिमंडल ने नेपाल का दौरा किया और अर्थ मंत्रालय के स्वर्णिम वाग्ले, विदेश मंत्री शिशिर खनाल एवं नेपाल राष्ट्र बैंक के गवर्नर विश्व पौडेल समेत अन्य शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर निरंतर निगरानी सूची में नेपाल के बने रहने और बाहर निकलने के उपायों पर चर्चा की।

एपीजी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) का एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय संगठन है।

प्रतिनिधिमंडल के लौटने के एक महीने के भीतर, फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुई एफएटीएफ की बैठक ने छह कारण बताते हुए नेपाल को उसकी सूक्ष्म निगरानी सूची (ग्रे लिस्ट) में बनाए रखने का निर्णय लिया।

19 जून को हुई बैठक में, एफएटीएफ ने नेपाल की परिसंपत्ति शुद्धिकरण, आतंकवादी गतिविधियों और विनाशकारी हथियारों के प्रसार में वित्तीय निवेश के खिलाफ लड़ाई में विद्यमान ‘रणनीतिक अभाव’ को संबोधित करने के लिए कई सुझाव दिए।