१० असार, काठमांडू। संयुक्त राष्ट्र संघ के समुद्री निकाय इंटरनेशनल मेरिटाइम ऑर्गनाइजेशन (आईएमओ) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समुद्री क्षेत्र में फंसे लगभग ११ हजार सीफेयर्स यानि नाविकों को सुरक्षित रूप से बचाने की प्रक्रिया शुरू की है। यह बड़ा अभियान अमेरिका, ईरान, खाड़ी क्षेत्र के तटीय देशों और शिपिंग कंपनियों के सहयोग से संचालित किया जाएगा। इस दौरान जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समुद्री मार्ग से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जाएगा।
कतार और पाकिस्तान के मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में अस्थायी शांति समझौते पर सहमति बनने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का मार्ग खुला हुआ है। स्विट्जरलैंड में ईरान और अमेरिका के बीच हुई वार्ता के बाद अमेरिका ने ईरानी तेल बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाए और १२ अरब डॉलर के कोष को भी फुकवा दिया। इन निर्णयों से दोनों देशों के बीच तनाव में कुछ हद तक कमी का संकेत मिला है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो खाड़ी देशों के दौरे पर हैं। अमेरिका-ईरान समझौते को लागू करने में संदेह व्यक्त कर रहे देशों को स्पष्ट करने के लिए वह खाड़ी देशों का दौरा कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार यूएई, बहरीन और कुवैत को इस समझौते के कुछ बिंदुओं पर चिंता है। समझौते से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में ईरान के प्रभाव के बढ़ने का खतरा माना जा रहा है।
इसके अलावा, समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर कोई स्पष्ट शर्त न रखने को लेकर भी उनकी चिंता है। साथ ही, ईरान के पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित ३०० अरब अमेरिकी डॉलर (करीब २८ लाख करोड़ रुपये) के कोष में खाड़ी देशों के सहयोग की संभावना बताई जा रही है। ऐसे हालात में अमेरिका उन देशों को भरोसा दिलाने और समझौते के समर्थन में सहमति हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
