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जेनजेड की पसंद में सेकेंड हैंड कपड़ों की बढ़ती लोकप्रियता

फैशन ने दो पीढ़ियों को विभाजित किया है: मिलेनियल्स और जेनजेड। पहले की पीढ़ी फैशन में विलासिता को महत्व देती थी, लेकिन जेनजेड में ऐसा आकर्षण नहीं दिखता। वे स्वतंत्र और मितव्ययी हैं। इसे मापने के तीन पहलू हैं: पहला, सेकेंड हैंड कपड़ों की रुचि; दूसरा, यूनिसेक्स पहनावे का उपयोग; और तीसरा, ओवरसाइज और सादगीपूर्ण शैली। काठमांडू के थ्रिफ्ट कपड़ों की दुकानों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। सोशल मीडिया का प्रभाव, उपभोग संस्कृति में बदलाव और पर्यावरणीय जागरूकता ने सेकेंड हैंड कपड़ों की खरीद-फरोख्त को, खासकर जेनजेड पीढ़ी के बीच, फैशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है।

आज के युवा महंगे ब्रांडों की ही तलाश नहीं करते। वे अपनी पहचान, सहजता, किफायतीपन और स्थिरता को प्राथमिकता देते हैं। इसलिए नेपाल में थ्रिफ्ट स्टोर्स की संख्या बढ़ रही है और सेकेंड हैंड कपड़ों के बाजार का विस्तार हो रहा है, जिससे फैशन की परिभाषा भी बदल रही है। पहले फैशन का मतलब नया कपड़ा, महंगा ब्रांड और चमकदार लुक होता था, लेकिन अब की जेनजेड पीढ़ी फैशन को आत्म-अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में देखती है।

काठमांडू के बांसबारी स्थित विश्व शांति चिरण मिलन कैंपस में स्नातक द्वितीय वर्ष के छात्र गौरव पोखरेल के अनुसार, आज के युवा दूसरों के पहनावे से ज्यादा यह देखते हैं कि उनके लिए क्या उपयुक्त है। उनका मानना है कि जेनजेड पीढ़ी फैशन को केवल ट्रेंड फॉलो करने के बजाय अपनी व्यक्तिगत पहचान प्रस्तुत करने का माध्यम मानती है। सोशल मीडिया के माध्यम से विश्वभर के फैशन ट्रेंड्स आसानी से पहुँच रहे हैं, जिससे नेपाली युवा भी अंतरराष्ट्रीय फैशन से जुड़ रहे हैं।

थ्रिफ्टिंग युवाओं को सीमित बजट में भी अपनी पसंदीदा शैली अपनाने का अवसर देती है। यही कारण है कि जेनजेड पीढ़ी इसे फैशन का एक महत्वपूर्ण विकल्प मानने लगी है। सोशल मीडिया ने थ्रिफ्टिंग को ‘कूल’ बनाकर प्रस्तुत किया है। थ्रिफ्ट बाय कुसकी की संचालक कुसुम केसी के अनुसार, थ्रिफ्टिंग केवल सेकेंड हैंड कपड़े खरीदने का विषय नहीं बल्कि उपभोग की सोच में आए बदलाव का संकेत भी है। जेनजेड की फैशन पसंद यह दिखाती है कि वे ब्रांड प्रदर्शन से ज्यादा अपनी व्यक्तिगत पहचान बनाने में विश्वास रखते हैं।